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दीपिका पादुकोण से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक, कैसे बॉलीवुड अभिनेत्रियां बन रही हैं बदलाव की आवाज?

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Bollywood actresses social work
आज के समय में बॉलीवुड सितारों की भूमिका सिर्फ फिल्मों और प्रसिद्धि तक सीमित नहीं रह गई है। विशेष रूप से अब प्रमुख अभिनेत्रियां अपनी पहचान और पहुंच का इस्तेमाल ऐसे सामाजिक मुद्दों के लिए कर रही हैं, जो जागरूकता और जिम्मेदारी से भरपूर हों। 
 
अगर ये कहें तो गलत नहीं होगा कि इस तरह अपने प्रभाव को वास्तविक बदलाव में बदलते हुए वे एक बेहतरीन अदाकारा की बजाय ज़िम्मेदार नागरिक का किरदार निभा रही हैं, जिन्हें स्क्रीन के बाहर भी महसूस किया जा सके।
 
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इन अभिनेत्रियों में पहला नाम आता है दीपिका पादुकोण का, जो भारत में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की अग्रणी आवाज़ों में से एक रही हैं। अपनी संस्था 'द लिव लव लाफ फाउंडेशन' के माध्यम से उन्होंने न सिर्फ भावनात्मक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की संस्कृति को बढ़ावा दिया है, बल्कि उन विषयों को भी सामने लाया है, जिन्हें पहले अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था।
 
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वैश्विक मंचों पर, अपनी लोकप्रियता का परिचय दे चुकीं प्रियंका चोपड़ा जोनस, यूएन एजेंसी, यूनिसेफ के साथ अपने काम के जरिए मानवीय प्रयासों में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। बच्चों के अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर उनका ध्यान इस बात को दर्शाता है कि एक सेलिब्रिटी का प्रभाव कितने व्यापक स्तर पर काम कर सकता है।
 
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इसी के साथ, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बातचीत अब और भी गहराई और विविधता की ओर बढ़ चुकी है और इसे आगे बढ़ाने में जान्हवी कपूर भी अहम भूमिका निभा रही हैं। फिलहाल जान्हवी कपूर ने अमाहा के साथ मिलकर, 'ऑफ द रॉक्स' पहल के जरिए, शराब की लत और उसके मानसिक स्वास्थ्य से संबंध जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया है। ये ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता रहा है। 
गौरतलब है कि जान्हवी की यह पहल इस विषय को न सिर्फ अधिक संवेदनशील और समझदारी से देखने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि बिना किसी झिझक के खुलकर बात करने को भी बढ़ावा देती है।
 
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जान्हवी कपूर के बाद पशुओं के कल्याण के लिए आलिया भट्ट, लगातार करुणा और जागरूक जीवनशैली को बढ़ावा दे रही हैं। उनके इनिशिएटिव 'कोएक्सिस्ट' के ज़रिए उनकी यह पहल पशुओं के प्रति संवेदनशीलता के साथ जिम्मेदार जीवनशैली के बारे में जागरूकता फैलाने का एक निरंतर प्रयास है।
 
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इसी के साथ डिजिटल संस्कृति की चुनौतियों को संबोधित करते हुए, अनन्या पांडे ने भी अपने 'सो पॉज़िटिव' पहल के माध्यम से साइबर बुलिंग के खिलाफ आवाज़ उठाई है। इसके ज़रिए वे ऑनलाइन दुनिया को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
 
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इसी के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जहां दीया मिर्ज़ा भी लंबे समय से सतत विकास और प्रकृति संरक्षण की समर्थक रही हैं, वहीं भूमि पेडणेकर द्वारा शुरू किया गया इनिशिएटिव 'क्लाइमेट वॉरियर' नामक प्लेटफॉर्म, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
 
दिलचस्प बात यह है कि इन सभी प्रयासों में जो बात सबसे अलग नज़र आती है, वह है एक साझा उद्देश्य। ये सभी अभिनेत्रियां, अपने-अपने प्रभाव और पहचान के अनुसार उन मुद्दों से जुड़ रही हैं, जो उनके विचारों से मेल खाते हैं। इस तरह वे सिर्फ क्षणिक लोकप्रियता नहीं, बल्कि स्थायी जागरूकता पैदा कर रही हैं।
 
ऐसे में यह कहें तो गलत नहीं होगा कि जैसे-जैसे इंडस्ट्री बदल रही है, वैसे-वैसे प्रभाव की परिभाषा भी बदल रही है। आज यह सिर्फ स्क्रीन पर मौजूदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन संवादों से जुड़ा है, जो स्क्रीन के बाहर बेहद ज़रूरी हैं। यह ऐसे संवाद हैं जो न सिर्फ जानकारी देते हैं, बल्कि लोगों को जोड़ते हुए बदलाव की प्रेरणा बन रहे हैं।

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