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गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2026, दो चरणों में मतदान की संभावना

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Gujarat Toll Tax Hike 2026: गुजरात के राजनीतिक पटल पर जिस क्षण का लंबे समय से इंतजार था, वह स्थानीय निकाय चुनावों की सुगबुगाहट अब अपने चरम पर पहुंच गई है। प्रशासनिक तंत्र की तैयारी और राजनीतिक दलों की आक्रामक रणनीति को देखते हुए यह साफ है कि सत्ता के इस महासंग्राम का 'काउंटडाउन' आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है। अगले कुछ दिनों में घोषित होने वाला चुनाव कार्यक्रम राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक साबित होगा।

आधिकारिक घोषणा का काउंटडाउन शुरू

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया की आधारशिला मानी जाने वाली 'अंतिम मतदाता सूची' 1 अप्रैल को प्रकाशित होने जा रही है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। प्रबल संभावना है कि 1 अप्रैल की शाम या 2 अप्रैल की दोपहर तक चुनाव आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर 15 नगर निगमों और अन्य निकायों के लिए चुनाव कार्यक्रम की विधिवत घोषणा कर सकता है।

चुनाव का व्यापक स्वरूप और आंकड़े

इस बार का चुनाव केवल एक स्थानीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसकी व्यापकता को देखते हुए इसे 'मिनी असेंबली' यानी लघु विधानसभा चुनाव माना जा रहा है। इस महासंग्राम में 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों के लिए मतदान होगा। इतने बड़े स्तर पर होने वाली यह प्रशासनिक कवायद राज्य तंत्र के लिए सुरक्षा की एक बड़ी चुनौती है, तो वहीं राजनीतिक दलों के लिए जनता तक पहुंचने का एक सुनहरा अवसर भी है।

दो चरणों में मतदान की संभावना

चुनावी गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, प्रशासनिक सुगमता के लिए मतदान प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है। ऐसी संभावना है कि पहले चरण में नगर निगमों और नगर पालिकाओं जैसे शहरी क्षेत्रों में मतदान हो, जबकि दूसरे चरण में जिला और तालुका पंचायतों जैसे ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किया जाए। इस विभाजन से दल अपने स्टार प्रचारकों का उपयोग अधिक सटीक तरीके से कर सकेंगे।

भाजपा की माइक्रो-प्लानिंग और बूथ मैनेजमेंट

सत्ताधारी दल भाजपा हमेशा की तरह अपने मजबूत संगठन और 'कैडर-बेस्ड' दृष्टिकोण के साथ मैदान में उतर रही है। बूथ प्रबंधन और पेज समितियों को और अधिक धारदार बनाने के लिए लगातार बैठकों का दौर जारी है। कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर 'एंटी-इंकंबेंसी' फैक्टर को रोकने और शहरी क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए पार्टी ने अभी से पूरी ताकत झोंक दी है।

कांग्रेस और आप (AAP) की आक्रामक रणनीति

दूसरी ओर, कांग्रेस इस बार 'ग्रासरूट' स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाकर अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने की कोशिश कर रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) पिछले चुनावों के प्रदर्शन से उत्साहित है और विशेष रूप से सौराष्ट्र जोन में अपना सब कुछ दांव पर लगा रही है। सौराष्ट्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाकर AAP गुजरात में तीसरे मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।

अप्रैल के अंत में महासंग्राम का फैसला

चुनाव आयोग की तैयारियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि यदि अप्रैल के पहले सप्ताह में घोषणा होती है, तो अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई के शुरुआती दिनों में मतदान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। अगले 48 घंटे गुजरात की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन चुनावों के परिणाम न केवल स्थानीय प्रतिनिधि तय करेंगे, बल्कि 2026 के राज्य के समग्र राजनीतिक मिजाज का स्पष्ट संकेत भी देंगे।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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