Publish Date: Thu, 26 Mar 2026 (18:29 IST)
Updated Date: Thu, 26 Mar 2026 (18:34 IST)
AG Report Gujarat 2024-25: गुजरात में ड्रग्स के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के बड़े दावों के बीच एक अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। 25 मार्च, 2026 को गुजरात विधानसभा में पेश की गई वित्तीय वर्ष 2024-25 की कैग (CAG) रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 12 वर्षों में पुलिस द्वारा जब्त किए गए ड्रग्स की कुल मात्रा में से एक बड़ा हिस्सा रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। इस रिपोर्ट ने राज्य की कानून और व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस का अजीब तर्क सामने आया है। पुलिस के मुताबिक जब्त किए गए ड्रग्स को चूहे चट कर गए।
2332 किलो ड्रग्स का कोई हिसाब नहीं
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, गायब हुए ड्रग्स का कुल वजन लगभग 2332 किलो है। यह आंकड़ा जब्त किए गए कुल ड्रग्स का करीब 35 प्रतिशत है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मादक द्रव्यों का गायब हो जाना केवल एक सांख्यिकीय गलती नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। इस घटना ने पुलिस विभाग के भीतर चल रही आंतरिक गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है।
जब्त किए गए जत्थे और निपटान के आंकड़ों में भारी अंतर
कैग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2010 से नवंबर 2022 तक की अवधि में गुजरात पुलिस और अन्य एजेंसियों ने कुल 6,510.54 किलो ड्रग्स और 848 बोतलें जब्त की थीं। नियम के अनुसार इस ड्रग्स का निपटान (Destruction) करना होता है, लेकिन जब नष्ट किए गए जत्थे का मिलान किया गया, तो केवल 4177.86 किलो ड्रग्स का ही रिकॉर्ड मिला। इस प्रकार, 2332.68 किलो ड्रग्स का कोई पता नहीं चला है।
पुलिस का अजीब तर्क : 'चूहे ड्रग्स खा गए'
जब गृह विभाग ने इतने बड़े अंतर के बारे में स्पष्टीकरण मांगा, तो एडीजीपी सीआईडी क्राइम द्वारा दिया गया जवाब हास्यास्पद और हैरान करने वाला था। पुलिस प्रशासन ने दावा किया कि लगभग 144 किलो गांजा चोरी हो गया है और बाकी का बड़ा हिस्सा चूहे खा गए! यह तर्क सुनकर कैग के अधिकारी भी दंग रह गए, क्योंकि चूहों का इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स खा जाना गले उतरने वाली बात नहीं है।
वजन में कमी के लिए नमी का बहाना
पुलिस विभाग द्वारा एक अन्य कारण यह भी दिया गया कि गांजा और अफीम जैसे मादक पदार्थ लंबे समय तक पुलिस स्टेशन के मालखाने में पड़े रहते हैं। इस दौरान उनमें मौजूद नमी सूख जाने से उनके वजन में प्राकृतिक रूप से कमी आती है। हालांकि, कैग के अनुसार इस कारण से कुछ ग्राम या किलो का अंतर तो आ सकता है, लेकिन हजारों किलो की कमी कभी संभव नहीं है।
कैग ने पुलिस की दलीलों को सिरे से खारिज किया
कैग ने पुलिस विभाग की इन तमाम दलीलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस तंत्र जानबूझकर इतनी बड़ी अनियमितता को छिपाने का प्रयास कर रहा है। हजारों किलो ड्रग्स का गायब होना कोई सामान्य लापरवाही नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित घोटाले की आशंका पैदा करता है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होना आवश्यक है।
अत्यंत खराब सुरक्षा और रखरखाव
कैग की रिपोर्ट में जब्त ड्रग्स को रखने की व्यवस्था पर भी गंभीर टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट में शामिल तस्वीरों में देखा गया कि ड्रग्स को अत्यंत असुरक्षित और अव्यवस्थित कमरों में रखा गया था। जहां दरवाजे भी ठीक से बंद नहीं थे और सुरक्षा के लिए कोई सीसीटीवी या गार्ड की व्यवस्था नहीं थी। ऐसी लापरवाही के कारण ही ड्रग्स की हेराफेरी या चोरी होने की पूरी संभावना बनी रहती है।
समाज के लिए गंभीर खतरे की चेतावनी
यह घटना साबित करती है कि ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ लड़ाई केवल ड्रग्स पकड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यदि पकड़ा गया ड्रग्स फिर से बाजार में पहुंच जाता है या उसका उचित निपटान नहीं होता है, तो यह समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए और भी घातक साबित हो सकता है। पारदर्शी निपटान प्रक्रिया और सख्त निगरानी के बिना ड्रग्स विरोधी अभियान अधूरा है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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