Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia

आज के शुभ मुहूर्त

(नवमी तिथि)
  • तिथि- वैशाख कृष्ण नवमी
  • अभिजीत मुहूर्त (सबसे शुभ)-11:46 एएम से 12:36 पीएम
  • विजय मुहूर्त-02:16 पीएम से 03:06 पीएम
  • राहुकाल (अशुभ समय)-09:11 एएम से 10:46 एएम
webdunia

वैशाख महीना किन देवताओं की पूजा के लिए है सबसे शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व

Advertiesment
lord vishnu
Lord Vishnu Puja in Vaishakh: हिंदू धर्म में वैशाख का महीना आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है। इस महीने में मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। यहां इस महीने की महत्ता और पूजनीय देवताओं के बारे में विस्तार से बताया गया है।
 

1. भगवान विष्णु पूजा: (माधव, मोहिनी, नृसिंह, कच्छप और परशुराम पूजा)

वैशाख मास को भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। पुराणों के अनुसार, इस महीने का अधिष्ठाता स्वरूप "माधव" है, इसलिए इसे 'माधव मास' भी कहते हैं। 'माधव' नाम का अर्थ है 'लक्ष्मी के पति'। वैशाख मास में ही भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था ताकि समुद्र मंथन से निकले अमृत को असुरों से बचाकर देवताओं को पिलाया जा सके। इसी महीने में भगवान विष्णु के परशुराम, नृसिंह और कूर्म (कछुआ) अवतार हुए थे।
 
विशेष पूजा: इस दौरान भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है। तुलसी पत्र से उनकी पूजा करने पर जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं। इस दौरान श्री सूक्त का पाठ और सफेद वस्तुओं का दान आर्थिक उन्नति के द्वार खोलता है। मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करने का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति मोह-माया के बंधनों से मुक्त होता है। अक्षय तृतीया पर किया गया दान और पूजन कभी क्षय (नष्ट) नहीं होता। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग के बाद त्रेता युग का आरंभ वैशाख मास की तृतीया तिथि से ही हुआ था।
 

2. महादेव (भगवान शिव)

गर्मी की शुरुआत होने के कारण, इस महीने में शिव लिंग पर 'जलधारा' बाँधने का विशेष महत्व है। भक्त शिव जी को शीतल रखने के लिए उन पर जल और बेलपत्र चढ़ाते हैं, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।
 

3. गंगा पूजा: 

धार्मिक लोग पूरे वैशाख महीने सूर्योदय से पूर्व गंगा स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान करने का संकल्प लेते हैं। इसे 'वैशाख स्नान व्रत' कहा जाता है। मान्यता है कि वैशाख के महीने में पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। यदि नदी जाना संभव न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाना भी लाभकारी है। 
 

4. भगवान बुद्ध: 

वैशाख माह की पूर्णिमा को ही गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। इसे 'पीपल पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है, जिस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।
 

5. वैशाख मास के मुख्य नियम और लाभ

इस महीने में केवल पूजा ही नहीं, बल्कि कुछ विशिष्ट कार्यों का भी महत्व है:
जल दान: प्यासे को पानी पिलाना, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना और प्याऊ लगवाना इस महीने का सबसे बड़ा पुण्य कर्म माना गया है।
स्नपन (स्नान): सूर्योदय से पूर्व गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
पंखा और छतरी दान: गर्मी से राहत देने वाली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार: "न वैशाख समो मासो, न कृतेन समं युगम्।" अर्थात वैशाख के समान कोई महीना नहीं है और सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है।
फसल उत्सव: बैसाखी मुख्य रूप से फसल और नए साल का पर्व है। पंजाब में यह किसानों की नई फसल और धार्मिक उत्सव का प्रतीक है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

Guru Tegh Bahadur: गुरु तेग बहादुर जयंती, जानें सिख धर्म में उनका योगदान