
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेल को एक ऐसा नेता माना जाता है जो शोर-शराबे से दूर रहकर चुपचाप अपना काम करने में विश्वास रखते हैं। शांत और स्थिर स्वभाव उनकी नेतृत्व शैली की खास पहचान है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन हर परिस्थिति में धैर्य और स्थिरता बनाए रखी। वे बातों की बजाय एक्शन में विश्वास रखते हैं, जिसकी वजह से उनके नेतृत्व में गुजरात में कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू की गईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उनके व्यक्तित्व की इन्हीं खूबियों के कायल हैं। मोदी ने कई मौकों पर मुख्यमंत्री पटेल को 'मृदु अने मक्कम' मुख्यमंत्री बताया है। मृदु अर्थात शालीन और विनम्र, जबकि गुजराती शब्द 'मक्कम' का अर्थ होता है दृढ़ या अडिग। यदि दूसरे शब्दों में कहें तो इन दो शब्दों के आसपास ही उनका समूचा व्यक्तित्व सिमटा हुआ है। पटेल के समर्थक उन्हें एक सक्षम, ईमानदार और विकासोन्मुखी मुख्यमंत्री मानते हैं, जो गुजरात को प्रगति के पथ पर आगे ले जा रहे हैं।
गुजरात के 17वें मुख्यमंत्री और पेश से 'बिल्डर' भूपेन्द्र भाई पटेल अब गुजरात के 'नवनिर्माण' की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे विवादों और दिखावे से दूर लो-प्रोफाइल रहकर कार्य करते हैं। पटेल 2017 में पहली बार विधायक बने। राज्य की घाटलोडिया सीट पर उन्होंने रिकॉर्ड 1 लाख 17 हजार वोटों से जीत दर्ज की। भाजपा नेतृत्व ने उनकी खूबियों और क्षमताओं को परखा और तत्कालीन सीएम विजय रूपाणी के इस्तीफे के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से नवाजा, जबकि कई बार के जीते हुए विधायक इस दौड़ में शामिल थे। पटेल की यही खूबियां उन्हें और नेताओं से अलग बनाती हैं। विधानसभा चुनाव के बाद 12 दिसंबर, 2022 को एक बार फिर उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत (156 सीटें) के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भूपेंद्र पटेल और उनकी टीम की सराहना की थी। उन्होंने 'नरेंद्र-भूपेंद्र' की जोड़ी का नारा दिया, जो यह बताता है कि मोदी भूपेंद्र पटेल को अपने विश्वसनीय सहयोगी के रूप में देखते हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भाजपा की विकास केंद्रित राजनीति के प्रबल समर्थक हैं। वे अक्सर प्रधानमंत्री मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के मंत्र का उल्लेख करते हैं। वे मानते हैं कि भाजपा इसी सिद्धांत पर काम करती है। उनके अनुसार, भाजपा सरकारें नागरिकों के कल्याण और देश को 'विकसित राष्ट्र' बनाने के लिए काम कर रही हैं। पटेल भाजपा को एक मजबूत, अनुशासित और विकासोन्मुखी पार्टी मानते हैं, जिसका नेतृत्व शीर्ष स्तर पर अत्यंत प्रभावी है।
भूपेंद्र पटेल ने 'मोदी स्टोरी' में बताया था
माननीय नरेंद्रभाई से मेरी पहली मुलाकात तब हुई जब मैं स्कूल बोर्ड का वाइस चेयरमैन था। उस समय मोदीजी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तब मुझे कुछ संशय था कि म्युनिसिपल स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बहुत गरीब घरों से आते हैं। इसलिए अगर उनके साथ मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को नहीं रखा जाएगा तो ये बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पाएंगे। लेकिन, मोदीजी ने मुझसे कहा कि कुछ भी करो, पर इन बच्चों की शिक्षा की स्थिति में सुधार लाकर दिखाओ। आज जब पीछे मुड़कर उनकी उस बात को देखता हूं तो एहसास होता है कि देश में परिवर्तन लाने के लिए भी मोदीजी इसी दृष्टिकोण के साथ काम करते हैं।
भूपेंद्र भाई रजनीकांत पटेल 1990 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। संघ से जुड़ाव के कारण उनकी संगठनात्मक समझ काफी मजबूत है। पटेल 1995-96 में मेमनगर नगर पालिका की स्थायी समिति के अध्यक्ष बने फिर वर्ष 1999 में मेमनगर नगर पालिका के अध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने वर्ष 1999-2000 और 2004-2006 के दौरान मेमनगर नगर पालिका के अध्यक्ष के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन किया।
वर्ष 2008-2010 के दौरान उन्होंने अहमदाबाद नगर निगम के स्कूल बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन किया। इसके बाद, वर्ष 2010 से 2015 तक पटेल थलतेज क्षेत्र के वार्ड पार्षद रहे। इस दौरान, भूपेंद्रभाई अहमदाबाद नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 2015 में उन्हें अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (AUDA) के अध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद, वर्ष 2017 में पटेल घाटलोडिया विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने। यह सीट गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के राज्यपाल बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी। इस सीट पर पटेल ने 13 सितंबर, 2021 को पहली बार गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
गुजराती कड़वा पाटीदार परिवार में 15 जुलाई, 1962 को अहमदाबाद में भूपेंद्र भाई पटेल का जन्म हुआ। गुजराती में पाटीदार समाज को संख्या और आर्थिक मामले में काफी सक्षम माना जाता है। उन्होंने अप्रैल 1982 में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, अहमदाबाद से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। भूपेंद्र पटेल सरदारधाम विश्व पाटीदार केंद्र के ट्रस्टी और विश्व उमिया फाउंडेशन की स्थायी समिति के अध्यक्ष भी हैं। वे दादा भगवान द्वारा स्थापित 'अक्रम विज्ञान आंदोलन' के कट्टर अनुयायी हैं। इसीलिए उन्हें प्यार से 'दादा' कहा जाता है।
गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार 'विकसित गुजरात @2047' के विजन को लेकर कार्य कर रही है। सरकार ने बुनियादी ढांचे, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। अगस्त 2025 में, साणंद में भारत की पहली एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) सुविधा का उद्घाटन किया गया। गुजरात देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां चार सेमीकंडक्टर प्लांट (साणंद और धोलेरा) में एक साथ काम कर रहे हैं। राज्य के 7 हजार 500 स्कूलों में AI-आधारित शिक्षा शुरू की गई है। इतना ही नहीं गुजरात स्कूल जाने वाले बच्चों को 100% डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड (1.15 करोड़ से अधिक कार्ड) देने वाला देश का पहला राज्य है।
भूपेंद्र पटेल का मानना है कि सरकार का काम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना है। उनके नेतृत्व में गुजरात ने कई ऐसी योजनाएं लागू की हैं, जो सीधे आम आदमी को लाभ पहुंचा रही हैं
महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को 1000 दिनों तक पौष्टिक भोजन देकर लाखों जीवन संवारे जा रहे हैं।
14 आदिवासी जिलों में महिलाओं को हर दिन एक समय का पौष्टिक भोजन सुनिश्चित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल को गुजरात में तेजी से लागू कर महिलाओं को कृषि प्रौद्योगिकी से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
2024 और 1,24,310 करोड़ रुपए का विशाल लिंग बजट महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
शिक्षा और रोज़गार पर जोर।
9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को ₹15,000 तक की वार्षिक सहायता देकर स्कूल छोड़ने की दर को कम किया जा रहा है।
विज्ञान के छात्रों को ₹25,000 की सहायता देकर भविष्य के वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
'एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज स्टैटिस्टिक्स-2023' के अनुसार, युवाओं को रोजगार देने में गुजरात देश में पहले स्थान पर है। पिछले चार वर्षों में 5 लाख से अधिक युवाओं को रोज़गार मिला।
सुशासन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर।
संक्षेप में, भूपेंद्र पटेल एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो बोलते कम और काम ज्यादा करते हैं। उनका यह सफर साबित करता है कि वे जमीनी हकीकत को समझते हैं और लोगों से गहराई से जुड़े हुए हैं। वे गुजरात के विकास के लिए सतत काम कर रहे हैं। लेकिन, उनकी सबसे बड़ी ताकत है केन्द्र में भाजपा की नरेन्द्र मोदी सरकार। उनका नेतृत्व गुजरात को न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध बना रहा है, बल्कि सामाजिक कल्याण और सुशासन की एक नई परिभाषा भी गढ़ रहा है।