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कांग्रेसी धारा से अलग होकर कैसे हेडगेवार ने बनाई RSS, जानिए संघ निर्माण की कहानी

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 19 अगस्त 2025 (14:41 IST)
history of rashtriya swayamsevak sangh: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन है जिसकी स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर, 1925 को विजयदशमी के दिन नागपुर में की थी। हेडगेवार एक युवा क्रांतिकारी थे जो स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे। उन्होंने अपनी युवावस्था में अनुशीलन समिति जैसे गुप्त क्रांतिकारी संगठनों में भी काम किया और असहयोग आंदोलन के दौरान जेल भी गए। हालांकि, इस दौरान उन्हें भारतीय समाज और राजनीतिक आंदोलनों में कुछ कमियां नजर आईं, जिनसे वे असंतुष्ट थे। और इसी के बाद नींव पड़ी RSS की।

गांधी और कांग्रेस से वैचारिक मतभेद
डॉ. हेडगेवार का महात्मा गांधी के नेतृत्व वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ वैचारिक मतभेद था। उनका मानना था कि कांग्रेस का आंदोलन राष्ट्र के निर्माण के बजाय केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर केंद्रित है। उन्हें यह भी लगा कि कांग्रेस का 'अहिंसा' का सिद्धांत और 'खिलाफत आंदोलन' के प्रति समर्थन हिंदू समाज के हितों को कमजोर कर रहा है। हेडगेवार, तिलकवादी कांग्रेस के सदस्य, हिंदू महासभा के राजनीतिज्ञ और नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता बीएस मुंजे के राजनीतिक शिष्य थे।  हेडगेवार का मानना था कि भारत को एक मजबूत और संगठित राष्ट्र बनाने के लिए सबसे पहले हिंदू समाज को एकजुट करना आवश्यक है। उनकी नजर में, हिंदू समाज में एकता और 'पराक्रम' की कमी थी, जिसके कारण मुट्ठी भर अंग्रेजों ने इतने बड़े देश पर राज किया। इन विचारों ने उन्हें एक ऐसे संगठन की स्थापना के लिए प्रेरित किया, जो सामाजिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर केंद्रित हो, बजाय कि केवल राजनीतिक आंदोलन पर।

सावरकर और हिंदुत्व का प्रभाव
डॉ. हेडगेवार, क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के विचारों से काफी प्रभावित थे। सावरकर ने 1923 में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'हिंदुत्व' लिखी थी, जिसमें उन्होंने 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा को विस्तार से समझाया था। हेडगेवार ने सावरकर से रत्नागिरी जेल में मुलाकात की थी और उनके विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने हिंदू समाज को संगठित करने का संकल्प लिया। सावरकर का 'हिंदुत्व' दर्शन और हिंदुओं को एक पहचान के तहत एकजुट करने का विचार हेडगेवार के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना। आरएसएस की स्थापना का प्राथमिक उद्देश्य इसी सोच पर आधारित था - हिंदू समाज में एकता, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना, ताकि वे एक गौरवशाली राष्ट्र का निर्माण कर सकें।

आरएसएस की स्थापना कब हुई थी?
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर, 1925 को विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की की थी। इसके लिए सबसे पहले उन्होंने स्वंयसेवकों को संबोधित किया था। संघ की पहली बैठक उनके अपने घर में हुई।  

आरएसएस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य
गांधी और सावरकर, इन दोनों की विचारधाराओं से भिन्न हेडगेवार ने अपना एक रास्ता चुना। उन्होंने आरएसएस को एक गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया, जिसका मुख्य लक्ष्य हिंदू समाज का सांस्कृतिक और सामाजिक पुनर्गठन करना था। उनका मानना था कि एक बार जब समाज मजबूत हो जाएगा, तो वह अपने आप ही राष्ट्र की समस्याओं का समाधान कर लेगा।
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