ट्रंप ने कहा कि वो डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस का कंट्रोल मॉरीशस को सौंपने और फिर उसे वापस लीज पर लेने की ब्रिटिश योजना के खिलाफ हैं। वह हिंद महासागर में एक संयुक्त अमेरिका-ब्रिटेन मिलिट्री बेस 'डिएगो गार्सिया' से जुड़े इस अरेंजमेंट का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि लंदन उस चीज को क्यों छोड़ेगा जिसे वो बहुत महत्वपूर्ण और रणनीतिक संपत्ति बताता है।
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि UK का इतनी जरूरी जमीन देना बहुत बड़ी बेवकूफी है और यह नेशनल सिक्योरिटी के उन कई कारणों में से एक है, जिनकी वजह से ग्रीनलैंड को हासिल करना जरूरी है।
कहां है डिएगो गॉसिया
डिएगो गार्सिया, हिंद महासागर में भारत के दक्षिणी तट से सिर्फ 1800 किलोमीटर दूर चागोस द्वीप समूह का हिस्सा है। ये पूर्वी अफ्रीका के तट से करीब 3,200 किलोमीटर दूर है। यहां कई दशकों से अमेरिका और ब्रिटेन का मिलिट्री बेस है। जहां से उन्हें मिडिल ईस्ट से एशिया तक मिशन चलाने में मदद मिलती है। 1960 के दशक में ब्रिटेन ने स्थानीय लोगों को निकाल दिया और इस द्वीप को ब्रिटेन के इंडिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी का हिस्सा बनाया। 1970 के आसपास फिर अमेरिका और ब्रिटेन ने एक संयुक्त सैन्य अड्डा स्थापित किया। ब्रिटेन अमेरिका से इस जगह का कोई किराया भी नहीं लेता है।
क्या है डिएगो गॉसिया पर ब्रिटेन और मॉरिशस की डील
ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने 2025 इन द्वीपों को मॉरीशस को वापस सौंपने और मिलिट्री बेस को लीज पर वापस लेने के लिए एक डील की थी। ब्रिटेन वापस लीज पर इसे लेगा और बदले में मॉरीशस को सालाना 10 करोड़ पाउंड देगा। इस तरह अगले 99 साल तक डिएगो गार्सिया ब्रिटेन के पास रहेगा। पिछले साल ट्रंप ने इस डील का समर्थन किया था, लेकिन अब वो पलट गए हैं।
क्यों नाराज हैं ट्रंप
अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से इस द्वीप को बेहद महत्वपूर्ण मानता है। ट्रंप का मानना है कि अगर मालिकाना हक बदला तो इस द्वीप पर अमेरिकी पकड़ कमजोर हो सकती है। इससे एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में भी अमेरिका की नजर कमजोर होने का खतरा है।
भारत मॉरिशस के साथ
भारत ने UK और मॉरीशस के बीच चागोस संधि पर औपचारिक हस्ताक्षर का स्वागत किया था। भारत चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के दावे का समर्थन करता रहा है। उसका मानना है कि यह क्षेत्रीय अखंडता का मामला है। भारत ने इस समझौते को कराने में एक अहम भूमिका निभाई थी। उसने यह भी सुनिश्चित कराया कि मॉरीशस को संप्रभुता वापस मिलने के बाद भी अमेरिकी बेस चालू रहे।
edited by : Nrapendra Gupta