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Ayatollah Ali Khamenei का निधन: मध्य पूर्व की सियासत में भूचाल, ईरान के बाद अब क्या?

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ईरान अमेरिका के फ्‍लैग के बख्तरबंद टैंक और ऊपर लिखा 'ईरान और अमेरिका युद्ध पर बड़ी भविष्‍यवाणी'
ईरान के सरकारी मीडिया और वैश्विक समाचार एजेंसियों ने पुष्टि की है कि ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई (86 वर्ष) का निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना अमेरिका और इसराइल द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों के बाद हुई है। ईरान सरकार ने देश में 40 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है।
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1. ईरान के लिए ख़ामेनेई का महत्व: 35 साल का एकछत्र राज

अयातुल्लाह ख़ामेनेई 1989 में क्रांति के जनक आयतुल्लाह रुहोल्ला खोमेनी के निधन के बाद सत्ता में आए थे।
* सत्ता का केंद्र: ईरान की जटिल राजनीतिक व्यवस्था में 'सर्वोच्च नेता' का पद राष्ट्रपति से भी ऊपर होता है। सेना (IRGC), न्यायपालिका और विदेश नीति पर उन्हीं का अंतिम नियंत्रण था।
* परमाणु और सैन्य शक्ति: ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल तकनीक को वैश्विक दबाव के बावजूद आगे बढ़ाने में उनकी मुख्य भूमिका रही।
* अपेक्षाओं के विपरीत उदय: 1989 में जब उन्हें चुना गया, तो वे धार्मिक पदानुक्रम में सबसे वरिष्ठ नहीं थे, लेकिन अपनी कूटनीतिक सूझबूझ से उन्होंने खुद को खोमेनी का असली वारिस साबित किया।

2. इसराइल और अमेरिका का रुख: "न्याय की जीत" या "क्षेत्रीय खतरा"?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
* अमेरिका: व्हाइट हाउस ने इसे "ईरानी जनता के लिए अपनी आजादी वापस पाने का मौका" करार दिया है। अमेरिका ने इन हमलों को अपनी सुरक्षा के लिए 'आवश्यक' बताया है।
* इसराइल: इसराइल के लिए ख़ामेनेई सबसे बड़े दुश्मन थे। उनकी मृत्यु के बाद इसराइल को उम्मीद है कि 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (हिजबुल्लाह, हमास, हूती) का नेटवर्क कमजोर होगा।

3. मुस्लिम जगत की संभावित प्रतिक्रिया

मुस्लिम देशों के बीच इस घटना को लेकर गहरा विभाजन देखा जा रहा है:
* शिया राष्ट्रों में शोक: इराक, लेबनान और सीरिया में उनके समर्थकों के बीच भारी गम और गुस्से का माहौल है। ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) ने इस हत्या का "भयानक बदला" लेने की कसम खाई है।
* सुन्नी देशों की चिंता: सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देश सीधे तौर पर इसराइल/अमेरिका का समर्थन करने से बच रहे हैं। उन्हें डर है कि ईरान में पैदा होने वाला 'पावर वैक्यूम' पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है।

4. उत्तराधिकार की चुनौती: अब आगे क्या?

ईरान के संविधान के अनुसार, अब 'विशेषज्ञों की परिषद' (Assembly of Experts) नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करेगी।अयातुल्लाह ख़ामेनेई की मृत्यु ने ईरान को एक दोराहे पर खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ इसराइल और अमेरिका इसे अपनी जीत मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह "तीसरे विश्व युद्ध" जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसके परिणाम आने वाले कुछ ही घंटों में दिखने शुरू हो जाएंगे।

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