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चीन को लेकर बड़ा खुलासा, गलवान झड़प के बाद किया था परमाणु टेस्‍ट, अमेरिका के दावे पर भड़का China

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Big revelation by US regarding China
Big revelation by US regarding China : अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थॉमस डीनैनो ने चीन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि चीन ने जून 2020 में गलवान घाटी में भारत के साथ हुए हिंसक संघर्ष के महज एक हफ्ते बाद एक गुप्त परमाणु परीक्षण किया था। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने जानबूझकर 6 साल पुराने इस राज को अब खोला है क्योंकि उसे पता है कि चीन निकट भविष्य में परमाणु नियंत्रण पर सहयोग करने के मूड में नहीं है। हालांकि चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें झूठा नैरेटिव करार दिया।

खबरों के अनुसार, अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थॉमस डीनैनो ने चीन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि चीन ने जून 2020 में गलवान घाटी में भारत के साथ हुए हिंसक संघर्ष के महज एक हफ्ते बाद एक गुप्त परमाणु परीक्षण किया था। हालांकि चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें झूठा नैरेटिव करार दिया।
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सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने जानबूझकर 6 साल पुराने इस राज को अब खोला है क्योंकि उसे पता है कि चीन निकट भविष्य में परमाणु नियंत्रण पर सहयोग करने के मूड में नहीं है। चीन के राजदूत शेन जियान ने कहा कि अमेरिका चीन के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, ताकि वह अपनी सैन्य आधुनिकरण की योजनाओं को सही ठहरा सके।

चीन ने इन विस्फोटों को छिपाने के लिए 'डिकपलिंग' जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया ताकि भूकंपीय निगरानी के जरिए इनका पता न चल सके। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन अपनी परमाणु शक्ति को बेहद तेजी से बढ़ा रहा है और अनुमान है कि साल 2030 तक उसके पास 1,000 से अधिक परमाणु वॉरहेड होंगे।
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शेन जियान ने कहा कि उनका देश अमेरिका और रूस की इस नई बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा। हमारे पास हथियारों की संख्या का छोटा सा हिस्सा है। लगभग 600 के आसपास जबकि रूस और अमेरिका के पास लगभग 4 हजार हैं। वर्तमान में चीन के पास लगभग 600 वॉरहेड हैं, जबकि रूस और अमेरिका प्रत्येक के पास करीब 4000-4000 वॉरहेड हैं। अमेरिकी अधिकारी ने कहा, चीन ने न्यूक्लियर एक्सप्लोसिव टेस्ट किए, जिसमें सैकड़ों टन की तय क्षमता वाले टेस्ट की तैयारी भी शामिल है।

डीनैनो ने चीन द्वारा किए गए न्यूक्लियर एक्सप्लोसिव टेस्ट की पूरी प्रक्रिया और इसके खतरे के बारे में भी बताया। अमेरिकी अधिकारी डीनैनो ने कहा, अमेरिका की लगभग सभी तैनात न्यूक्लियर फोर्स न्यू START के दायरे में थीं, जबकि रूस के बहुत बड़े जखीरे का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा ही इसके दायरे में था।
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चीन के एक भी न्यूक्लियर हथियार न्यू START के दायरे में नहीं थे। यूएस की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। गौरतलब है कि गलवान घाटी में हुई जानलेवा झड़प में कई भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी।
Edited By : Chetan Gour

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