Publish Date: Sun, 17 May 2026 (10:59 IST)
Updated Date: Sun, 17 May 2026 (11:03 IST)
अफ्रीकी देश Democratic Republic of the Congo इस समय इबोला वायरस के गंभीर प्रकोप का सामना कर रहा है। इस खतरनाक बीमारी ने अब तक दर्जनों लोगों की जान ले ली है। इससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार इस बार संक्रमण इबोला वायरस के दुर्लभ 'बुंडीबुग्यो स्ट्रेन' (Bundibugyo strain) से फैल रहा है, जो सामान्य रूप से पाए जाने वाले ज़ैरे स्ट्रेन से अलग माना जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पूर्वी इतुरी प्रांत में सैकड़ों संदिग्ध मामलों की निगरानी की जा रही है। पड़ोसी देशों युगांडा और दक्षिण सूडान से नजदीकी संपर्क होने के कारण संक्रमण के सीमापार फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला वायरस डिजीज (EVD) दुनिया की सबसे घातक वायरल बीमारियों में से एक मानी जाती है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ जैसे खून, पसीना, लार, उल्टी और अन्य द्रवों के संपर्क से तेजी से फैलती है। गंभीर मामलों में यह शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचाकर भारी रक्तस्राव, अंग फेल होने और मौत का कारण बन सकती है।
यह बीमारी पहली बार वर्ष 1976 में कांगो की इबोला नदी के पास सामने आई थी। तब से अफ्रीका में इसके कई प्रकोप देखे जा चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था, भीड़भाड़, संघर्ष और इलाज में देरी जैसी परिस्थितियां संक्रमण को और खतरनाक बना देती हैं।
कैसे फैलता है संक्रमण?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इबोला वायरस आमतौर पर संक्रमित जंगली जानवरों से इंसानों में फैलता है। फ्रूट बैट यानी फल खाने वाले चमगादड़ों को इसका प्राकृतिक वाहक माना जाता है। संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने या उनका मांस खाने से इंसान संक्रमित हो सकते हैं।
एक बार इंसान संक्रमित हो जाए तो यह वायरस सीधे संपर्क के जरिए तेजी से फैलता है। संक्रमित कपड़े, बिस्तर, सुई या मेडिकल उपकरण भी संक्रमण फैला सकते हैं।
इबोला के प्रमुख लक्षण
इबोला के लक्षण संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। शुरुआती लक्षण फ्लू या मलेरिया जैसे लगते हैं, जिससे पहचान मुश्किल हो जाती है।
शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और गले में खराश शामिल हैं। बीमारी बढ़ने पर उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते, आंखों और मसूड़ों से खून आना तथा अंदरूनी रक्तस्राव जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं क्योंकि वे संक्रमित मरीजों के सीधे संपर्क में आते हैं। संक्रमित परिजनों की देखभाल करने वाले लोगों को भी ज्यादा खतरा होता है।
रोकथाम के उपाय
विशेषज्ञों ने लोगों को संक्रमित व्यक्तियों और जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। नियमित हाथ धोना, साफ-सफाई रखना और शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से बचना जरूरी बताया गया है।
स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा किट, दस्ताने, मास्क और विशेष सैनिटाइजेशन प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि मौजूदा वैक्सीन बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पर कितनी प्रभावी साबित होगी। Edited by : Sudhir Sharma
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