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Donald Trump : चीन पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग ने एयरपोर्ट पर नहीं किया स्वागत, महंगाई और तेल संकट के बीच बदले अमेरिका के सुर

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Donald Trump China visit
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विमान एयरफोर्स वन बुधवार शाम बिजिंग के कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतर चुका है। करीब 9  साल बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का यह पहला चीन दौरा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि ट्रंप के स्वागत के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि शी जिनपिंग खुद एयरपोर्ट पर मौजूद नहीं थे और उनकी जगह चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने ट्रंप की अगवानी की।
चीन के प्रोटोकॉल के मुताबिक राष्ट्रपति आमतौर पर एयरपोर्ट पर मेहमानों का स्वागत नहीं करते। ट्रंप के लिए भी गुरुवार को ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में भव्य स्वागत समारोह रखा गया है, जहां उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। ट्रंप 15 मई तक चीन में रहेंगे और 14-15 मई को उनकी शी जिनपिंग के साथ अहम बैठकें प्रस्तावित हैं।
यह दौरा इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कई महीनों से ट्रंप लगातार चीन पर हमला बोलते रहे हैं। उन्होंने चीन पर अमेरिकी तकनीक चोरी करने, ईरान को हथियार देने और अनुचित व्यापारिक नीतियां अपनाने के आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं, ट्रंप प्रशासन ने चीनी सामानों पर भारी टैरिफ भी लगाया था।
 
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अमेरिका में लगातार बढ़ती महंगाई, तेल की आसमान छूती कीमतें और Strait of Hormuz संकट ने ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। ईरान-इजराइल तनाव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप इस दौरे के दौरान चीन से बड़े व्यापारिक समझौते कराने की कोशिश करेंगे ताकि अमेरिकी कंपनियों को राहत मिल सके। उनके साथ अमेरिकी टेक जगत के कई बड़े नाम भी चीन पहुंचे हैं, जिनमें Elon Musk और Jensen Huang शामिल हैं। ट्रंप चाहते हैं कि NVIDIA और Tesla जैसी कंपनियों को चीन में कारोबार विस्तार के लिए बेहतर अवसर मिलें।
 
अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों से जनता में नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में ट्रंप का यह चीन दौरा केवल कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।   Edited by : Sudhir Sharma

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