Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

यदि डोनाल्ड ट्रंप मिडटर्म इलेक्शन हार गए तो क्या होगा?

Advertiesment
Donald Trump
US Midterm Elections 2026: अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन (Midterm Elections) 3 नवंबर 2026 को होने वाले हैं। इस ईरान के साथ युद्ध में जूझ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक 'अग्निपरीक्षा' की तरह हैं। इस बीच, सबसे अहम बात यह है कि ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई है। अब हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि ट्रंप के खिलाफ स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं।  इस बीच, अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है।
 
वर्तमान में यह अपने शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण चरण यानी 'प्राइमरी इलेक्शन' (Primary Elections) में है। इसकी शुरुआत 3 मार्च 2026 से कई टेक्सस, अर्कांसस, नॉर्थ कैरोलिना जैसे राज्यों से शुरू हो चुकी है। यह प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों में सितंबर 2026 तक चलेगी। इस चुनाव में अमेरिकी संसद (Congress) के निचले सदन (House) की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होगा। मार्च 2026 के ताजा सर्वेक्षणों के अनुसार, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 33% के करीब पहुंच गई है।
 
दरअसल, अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसमें हो रही जनहानि के विरोध में वॉशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, शिकागो आदि शहरों में 'युद्ध विरोधी' (Anti-War) प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि ईरान के साथ तत्काल युद्धविराम किया जाए। देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों में उछाल को लेकर भी लोगों में भारी असंतोष है। हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों से प्रेरित बताया है। आइए जानते हैं कि यदि ट्रंप की पार्टी यदि मिडटर्म इलेक्शन हार जाती है तो ट्रंप का राजनीतिक भविष्य कैसा होगा..? 

शक्तिहीन हो जाएंगे ट्रंप

मिडटर्म इलेक्शन में हार का असर सीधे राष्ट्रपति ट्रंप पर भी होगा। अगर सदन और सीनेट दोनों में विपक्षी डेमोक्रेट्स का कब्जा हो जाता है, तो ट्रंप अपने कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों के लिए 'शक्तिहीन' हो सकते हैं। इसे राजनीति में 'लेम डक' स्थिति कहा जाता है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति चाहकर भी अपनी मर्जी के कानून पास नहीं करा पाता है। 

ईरान और इजराइल नीति पर ब्रेक

अभी ट्रंप का जो 'फाइनल अटैक' प्लान या मिडिल ईस्ट में आक्रामक रुख है, उस पर लगाम लग सकती है। युद्ध या सैन्य अभियानों के लिए बजट की मंजूरी कांग्रेस (संसद) देती है। विपक्षी बहुमत ट्रंप के सैन्य खर्चों को रोक सकता है। डेमोक्रेट्स मिडिल ईस्ट नीति और ईरान के साथ युद्ध की स्थिति को लेकर कड़े सवाल उठा सकते हैं और संसदीय जांच शुरू कर सकते हैं। इससे ट्रंप की स्थिति और खराब हो सकती है। 

महाभियोग और कानूनी मुश्किलें

सदन में बहुमत मिलते ही विपक्षी दल ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांचों की झड़ी लगा सकते हैं। उनके व्यापारिक सौदों, पारिवारिक निवेश और सरकारी निर्णयों की गहन जांच हो सकती है। यदि कोई गंभीर खामी पाई गई, तो ट्रंप पर महाभियोग का खतरा मंडरा सकता है।

घरेलू एजेंडे पर संकट

ट्रंप के कई प्रमुख वादे बीच में लटक सकते हैं। व्यापार युद्ध और नए आयात शुल्क लगाने की उनकी शक्ति सीमित हो जाएगी। इसके बाद वे 'टैरिफ टेरर' से दूसरे देशों को डरा नहीं पाएंगे। इमिग्रेशन को रोकने के लिए दीवार (Border Wall) बनाने के लिए फंड मिलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। सीनेट में हार का मतलब है कि ट्रंप अपनी पसंद के जज या कैबिनेट मंत्रियों को नियुक्त नहीं कर पाएंगे।

2028 के चुनाव के लिए संदेश

मिडटर्म हार को राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता के 'अविश्वास प्रस्ताव' के रूप में देखा जाता है। इससे रिपब्लिकन पार्टी के अंदर ट्रंप के प्रभाव पर सवाल उठ सकते हैं और 2028 के अगले राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेट्स का मनोबल काफी बढ़ जाएगा। हालांकि ट्रंप अमेरिकी नियमों के अनुसार अगला राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, लेकिन मिडटर्म की हार से पार्टी की संभावनाओं पर विपरीत असर पड़ना स्वाभाविक है। रिपब्लिकन पार्टी के पास अभी सदन में बहुत कम बहुमत है। सर्वे बता रहे हैं कि महंगाई और युद्ध के कारण ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई है, जिससे 2026 के अंत में होने वाले चुनाव में ट्रंप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

जैश सरगना मसूद अजहर के बड़े भाई ताहिर अनवर की मौत, संदिग्ध हालत में मिला शव