Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरुण जर्मन पुरस्कार से सम्मानित

Advertiesment
Dr. Varun Venkataramani
जर्मनी के हाइडेलबेर्ग विश्वविद्यालय अस्पताल में कार्यरत भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट (तंत्रिका वैज्ञानिक) डॉ. वरुण वेंकटरामणि को, 2026 के पाउल एर्लिश और लुडविश डार्मश्टेटर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 36 वर्षीय वेंकटरामणि को जर्मनी का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार, 'ग्लियोब्लास्टोमा' कहलाने वाले विशेष रूप से घातक मस्तिष्क ट्यूमर के बारे में चिकित्सा विज्ञान के अब तक के ज्ञान का 'मौलिक विस्तार' करने में उनके योगदान के लिए, 14 मार्च को फ्रैंकफर्ट शहर के सेंट पॉल चर्च में हुए एक समारोह में दिया गया।
 
पाउल एर्लिश और लुडविश डार्मस्टेटर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, जो पहली बार 2006 में प्रदान किया गया था, प्रतिवर्ष पाउल एर्लिश फाउंडेशन द्वारा जर्मनी में कार्यरत किसी नवोदित शोधकर्ता को जैव चिकित्सा अनुसंधान में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। 60000 यूरो (1यूरो=106 रुपए) की पुरस्कार राशि का उपयोग अनुसंधान से जुड़े उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए। पुरस्कार के लिए नामांकन जर्मन अनुसंधान संस्थानों के विश्वविद्यालय प्रोफेसरों और वरिष्ठ शोधकर्ताओं द्वारा किये जाते हैं। प्राप्तकर्ता का चयन आठ सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश के आधार पर फाउंडेशन परिषद द्वारा किया जाता है।

ग्लियोब्लास्टोमा आक्रामक मस्तिष्क ट्यूमर है

वरुण वेंकटरामणि का मुख्य कार्यक्षेत्र 'ग्लियोब्लास्टोमा' रहा है। ग्लियोब्लास्टोमा एक आक्रामक व बहुत तेज़ी से बढ़ने वाला एस्ट्रोसाइटोमा (मस्तिष्क ट्यूमर) है, जो ग्लियल कोशिकाओं से उत्पन्न होता है और मुख्य रूप से मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है। जब मस्तिष्क की कोशिकाओं के DNA में बदलाव होता है, तो वे अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह ट्यूमर असामान्य कोशिकाओं के एक झुंड या गांठ के समान होता है, जो वयस्कों में सबसे आम व घातक प्राथमिक मस्तिष्क ट्यूमर होने के कारण अत्यधिक आक्रामक भी होता है, आसपास के ऊतकों में भी अक्सर फैल जाता है। उसे पूरी तरह से हटाना मुश्किल हो जाता है। सामान्य लक्षणों में गंभीर सिरदर्द, चक्कर आने के दौरे पड़ना, व्यक्तित्व में परिवर्तन और तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार शामिल हैं।
 
ग्लियल कहलाने वाली कोशिकाओं का कार्य तंत्रिका (न्यूरॉन) कोशिकाओं की रक्षा और पोषण करना है। वेंकटरामणि ने अपने शोध में यह पता लगाया कि ग्लियोब्लास्टोमा किस प्रकार तंत्रिका तंत्र का मानो अपहरण करके उसकी विद्युत आपूर्ति का दोहन करते हैं, जिसका उपयोग वे अपनी घातक वृद्धि को और भी तेज करने के लिए करते हैं। इस विद्युत प्रवाह को बाधित करने के लिए बनाई गई एक दवा का परीक्षण इस समय रोगियों पर किया जा रहा है।

मस्तिष्क में लगभग 100 अरब तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं

मस्तिष्क के ट्यूमर (अर्बुद) तंत्रिका कोशिकाओं से नहीं बने होते हैं। परिपक्व तंत्रिका कोशिकाएं —कुछ बहुत कम अपवादों को छोड़कर — विभाजित होने की क्षमता खो चुकी होती हैं। अधिकांश मस्तिष्क ट्यूमर ग्लियोमा होते हैं। उनकी उत्पत्ति संभवतः ग्लियल कोशिकाओं के पूर्ववर्तियों से होती है। एक वयस्क व्यक्ति के मस्तिष्क में इन पूर्ववर्तियों की संख्या, तंत्रिका कोशिकाओं की अपनी लगभग 100 अरब की संख्या के बराबर होती है, जिनके लिए पू्रवर्वती मुख्य रूप से आधार और पोषक तत्वों के स्रोत का कार्य करते हैं।
 
ग्लियोब्लास्टोमा विशेष रूप से खतरनाक होते हैं। इस समय उपलब्ध सर्वोत्तम उपचार के बावजूद, इस प्रकार के ट्यूमर वाले रोगियों के लिए निदान और मृत्यु के बीच जीवित रहने का औसत काल अधिकतम 18 महीने है। ग्लियोब्लास्टोमा एक महीने के भीतर अपना आकार दोगुना कर लेते हैं। ट्यूमर वाली जगह से फैलती कोशिकाएं, तंत्रिका मार्गों के साथ पूरे मस्तिष्क में फैल जाती हैं। ऐसा करते हुए, वे एक ऐसा जाल बनाती हैं जो अत्यंत लंबे और पतले प्रक्रमों के माध्यम से अन्य ग्लियोमा कोशिकाओं से जुड़कर तंत्रिका कोशिकाओं के जाल को आपस में उलझा देता है।

तंत्रिका तंत्र में सिनैप्स की भूमिका

11 वर्ष पूर्व, डॉक्टर की उपाधि के लिए अपने मेडिकल शोध के एक हिस्से के रूप में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की सहायता से इन विस्तारों की जांच करते समय, वरुण वेंकटरामणि की नजर इस सूक्ष्मदर्शी में बनी छवि के एक हिस्से पर पड़ी: उन्होंने जो देखा वह दो ट्यूमर कोशिकाओं के बीच का संबंध नहीं था, बल्कि एक ट्यूमर कोशिका और एक तंत्रिका कोशिका के बीच एक ऐसी संरचना के माध्यम से बना संबंध था, जो सिनैप्स (synapse) जैसी दिखती थी— दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच एक चिरकालिक इलेक्ट्रोकेमिकल संबंध के समान। तंत्रिका तंत्र में, सिनैप्स एक ऐसी संरचना है जो एक न्यूरॉन (या तंत्रिका कोशिका) को किसी दूसरे न्यूरॉन या लक्ष्य तक विद्युत या रासायनिक संकेत भेजने की अनुमति देती है।
webdunia
वेंकटरामणि और उनके डॉक्टरेट सलाहकारों को शुरू में लगा कि यह एक त्रुटि है। वेंकटरामणि ने हार नहीं मानी। अपने सहयोगियों-सलाहकारों के समर्थन से, निरंतर परिश्रम और अपने असाधारण कौशल के बल पर, वे अगले वर्षों में अपने अवलोकन को प्रयोगात्मक रूप से सत्यापित करने में सफल रहे, जिसका परिणाम 2019 में प्रतिष्ठित पत्रिका 'नेचर' में एक अपूर्व प्रकाशन के रूप में सामने आया। वे ग्लिओमा कोशिकाएं, जो अपना विस्तार करने की कोशिश करती हैं, सक्रिय रूप से ऐसी तंत्रिका कोशिकाओं के साथ सिनैप्टिक संपर्क स्थापित करती हैं, जो मस्तिष्क के विकास के दौरान अपरिपक्व तंत्रिका कोशिकाओं के व्यवहार की नकल करती हैं। इन सिनैप्स के माध्यम से, वे पूर्व साइनैप्टिक तंत्रिका तंतुओं से विद्युत आवेग प्राप्त करती हैं, जिससे उनके विभाजन को बढ़ावा मिलता है और उनका फैलाव तेज हो जाता है।

संभावित उपचार का अभी मात्र आरंभ है

वेंकटरामणि के लिए यह अध्ययन, प्रभावकारी ग्लियोमा उपचारों के संभावित विकास का मात्र आरंभ है। उनके शोध समूह ने हाल ही में एक जीन थेरेपी प्रक्रिया की व्यवहार्यता प्रदर्शित की है, जिसका उपयोग भविष्य में ग्लियोमा के निदान और उपचार के लिए किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में केवल उन्हीं तंत्रिका कोशिकाओं को रंगों से चिह्नित किया जाता है, जो सिनैप्स के माध्यम से ट्यूमर कोशिकाओं से जुड़ी होती हैं। इस प्रकार ये तंत्रिका कोशिकाएं, नियोजित कोशिका मृत्यु (एपॉप्टोसिस) के लिए तैयार हो जाती हैं। जब ये कोशिकाएं इस प्रक्रिया से गुज़रती हैं, तो ट्यूमर कोशिकाएं वह संबंध खो देती हैं जो उनके विकास के लिए आवश्यक था। वे तंत्रिका तंत्र के विद्युत ग्रिड से अलग हो जाती हैं।

वेंकटरामणि 'कैंसर न्यूरोसाइंस' के सह-स्थापक हैं

वेंकटरामणि की खोज से पहले 'कैंसर न्यूरोसाइंस' नाम का शोध-क्षेत्र अस्तित्व में नहीं था। उन्होंने इसकी सह-स्थापना की है और इसके विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे मस्तिष्क में मौजूद तथाकथित 'ट्यूमर नेक्टोम' (Tumor Connectome) को अधिक से अधिक सटीकता से समझने को अपना प्राथमिक लक्ष्य मानते हैं। ट्यूमर कनेक्टोम मस्तिष्क के भीतर ट्यूमर (tumor) और मस्तिष्क के सामान्य तंत्रिका संजाल (neuronal network) के बीच संबंधों का एक विस्तृत मानचित्र या 'वायरिंग डायग्राम' है। 'कैंसर न्यूरोसाइंस' का क्षेत्र जितना अधिक विस्तारित हो रहा है, उतना ही यह भी स्पष्ट होता जा रहा है कि तंत्रिका तंत्र और कैंसर कोशिकाओं के बीच की परस्पर क्रिया अन्य अंगों में भी ट्यूमर के विकास को बढ़ावा देती है।
 
वरुण वेंकटरामणि ने 2009 से 2016 तक जर्मनी के हाइडेलबेर्ग विश्वविद्यालय में मानव चिकित्सा का अध्ययन किया। वहां उन्हें संरचित डॉक्टरेट कार्यक्रम के लिए चुना गया, जो चिकित्सा विज्ञान के विशेष रूप से प्रतिभाशाली छात्रों को डॉक्टरेट की दोहरी उपाधि प्राप्त करने के सक्षम बनाता है। उन्होंने 2019 में चिकित्सा विज्ञान में डॉक्टरेट (डॉ. मेड.) और एक वर्ष बाद प्राकृतिक विज्ञान में डॉक्टरेट (डॉ. रेर. नेट.) की उपाधि प्राप्त की। 2022 से, वे हाइडेलबर्ग विश्वविद्यालय के चिकित्सा संकाय में 15 सदस्यीय शोध समूह का नेतृत्व कर रहे हैं और साथ ही विश्वविद्यालय अस्पताल के तंत्रिका विज्ञान विभाग में न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में भी कार्यरत हैं।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

58 गंदे वीडियो, 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति, तं‍त्र-मंत्र के नाम पर दरिंदगी का खेल, पढ़िए ज्योतिषी भोंदू बाबा की क्राइम स्टोरी