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श्री श्री रवि शंकर के नेतृत्व में 150 देशों के 1.2 करोड़ लोगों ने किया विश्व का सबसे बड़ा सामूहिक ध्यान

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 (09:52 IST)
बेंगलुरु / न्यूयॉर्क: वैश्विक कल्याण के इतिहास में एक निर्णायक क्षण माने जा रहे इस आयोजन में, 150 देशों के 1 करोड़ 20 लाख से अधिक लोगों ने विश्व के सबसे बड़े सामूहिक ध्यान में भाग लिया।ALSO READ: हर दिन ध्यान का संकल्प, ध्यान दिवस पर सैकड़ों ने लिया नियमित ध्यान का प्रण

भारत के आध्यात्मिक गुरु, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर हुआ, जो बढ़ते तनाव, संघर्ष और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच शांति और आंतरिक दृढ़ता की वैश्विक खोज को प्रतिबिंबित करता है।
 
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2024 में विश्व ध्यान दिवस को मानसिक कल्याण और सामाजिक सद्भाव में ध्यान की भूमिका को रेखांकित करने वाले वार्षिक आयोजन के रूप में औपचारिक मान्यता दी थी।

इस वर्ष का मुख्य कार्यक्रम न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र ट्रस्टीशिप काउंसिल में आयोजित हुआ, जहां राजनायकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुदेव की उपस्थिति में ध्यान में किया। यहां से यह अभ्यास विश्वभर में फैल गया- भारत के शहरों और गांवों से लेकर अफ्रीका, यूरोप, एशिया, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के समुदायों तक।
 
भव्य रैलियों या उत्सवों के विपरीत, इस आयोजन का प्रभाव इसके साझा मौन और एक साथ मिलकर ध्यान करने में निहित अनुभव किया गया। इस समारोह ने 60 से अधिक देशों में छात्रों, पेशेवरों, किसानों और जेलों में बंद कैदियों सहित भिन्न-भिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को एक साथ जोड़ा।
 
इस वैश्विक पहल को ध्यान और कल्याण पर अपनी तरह के पहले अध्ययन की घोषणा से और गति मिली। विश्व ध्यान दिवस से ठीक पहले ‘गैलप और द आर्ट ऑफ़ लिविंग’ ने संयुक्त रूप से इस ऐतिहासिक वैश्विक अध्ययन की शुरुआत की।

इस सहयोग के तहत, गैलप अपने ‘गैलप वर्ल्ड पोल’ में ध्यान से जुड़े नए प्रश्न शामिल करेगा। इसका उद्देश्य यह समझना है कि ध्यान विभिन्न लोगों में भावनात्मक स्वास्थ्य, जीवन संतुष्टि और सामाजिक कल्याण से कैसे जुड़ा है। इस पैमाने पर ऐसा तुलनात्मक और डेटा-आधारित अध्ययन पहले कभी नहीं हुआ है।
 
गैलप के हालिया शोध बताते हैं कि तनाव और चिंता जैसी नकारात्मक भावनाएं दुनिया भर में लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। यह तथ्य ऐसे व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर अपनाए जा सकने वाले मानसिक स्वास्थ्य समाधानों की तत्काल आवश्यकता को इंगित करता है।
 
इस ऐतिहासिक क्षण के केंद्र में भारत की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत रही, जो आज अरबों लोगों को चिंता, थकान और सामाजिक तनाव से निपटने के लिए एक व्यावहारिक और साक्ष्य-आधारित साधन प्रदान कर रही है।
 
संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम में संबोधित करते हुए गुरुदेव ने कहा, 'ध्यान अब कोई विलासिता नहीं है, यह एक आवश्यकता है।' यह भावना अब राजनीतिक गलियारों से लेकर धरातली स्तर के समुदायों तक गूंज रही है।
 
इस वैश्विक अध्ययन के परिणाम दिसंबर 2026 में जारी होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि ये निष्कर्ष दुनिया भर में सार्वजनिक नीति, शिक्षा और कार्यस्थल पर कल्याण से जुड़ी पहलों को नई दिशा देंगे।ALSO READ: ध्यान की कला: स्वयं की खोज की ओर एक यात्रा

Photo courtesy: Art of living

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