पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश, भारत 6वें नंबर पर; यूपी का लोनी बना सबसे गंदा शहर, दिल्ली चौथे स्थान पर
भारत दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में
Publish Date: Wed, 25 Mar 2026 (14:03 IST)
Updated Date: Wed, 25 Mar 2026 (14:04 IST)
कल्पना कीजिए, आप सांस ले रहे हैं और वो हवा जो आपको ज़िंदा रखनी चाहिए, वो ही आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है। स्विट्जरलैंड की मशहूर कंपनी IQAir की वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 ने यही हकीकत सामने रख दी है। सूक्ष्म कणों (PM2.5) के स्तर के आधार पर पाकिस्तान दुनिया का नंबर-1 सबसे प्रदूषित देश बन गया है। भारत छठे स्थान पर है, लेकिन शहरों की बात करें तो हमारे यहां की स्थिति और भी चिंताजनक है।
देशों की रैंकिंग: एशिया और अफ्रीका की हवा सबसे खतरनाक
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे प्रदूषित देशों की लिस्ट इस तरह है:
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पाकिस्तान
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बांग्लादेश
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ताजिकिस्तान
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चाड
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कांगो
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भारत
143 देशों, क्षेत्रों और 9,446 शहरों के 9,446 निगरानी केंद्रों के डेटा से यह रिपोर्ट तैयार की गई है। अच्छी खबर? दुनिया के सिर्फ 14% शहर ही WHO के सुरक्षित स्तर (5 µg/m³) पर पहुंच पाए – पिछले साल ये 17% था। सिर्फ 13 देश/क्षेत्र ही पूरी तरह सुरक्षित हवा वाले हैं – जैसे आइसलैंड, ऑस्ट्रेलिया और एस्टोनिया।
भारतीय शहरों की दर्दनाक हकीकत:
लोनी नंबर-1, दिल्ली 4th
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 5 भारत में हैं!
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लोनी (उत्तर प्रदेश) – दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
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दिल्ली – चौथे स्थान पर
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बर्नीहाट (असम-मेघालय बॉर्डर)
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गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
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उला/बीरनगर (पश्चिम बंगाल)
लोनी में PM2.5 का सालाना औसत 112.5 µg/m³ दर्ज किया गया – जो 2024 से 23% ज्यादा है और WHO के गाइडलाइन से 22 गुना ज्यादा! मतलब, वहां एक दिन की हवा 22 दिनों की साफ हवा जितनी खतरनाक है
दिल्ली की कहानी : हर साल सांस लेना मुश्किल
दिल्ली चौथे नंबर पर है। राजधानी की सड़कें, ट्रैफिक और धुंध हर साल नवंबर-दिसंबर में खबरों में छा जाती हैं। रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहरों में से ज्यादातर भारत, पाकिस्तान और चीन में हैं – और टॉप-4 शहरों में से 3 भारत के!
पिछले साल से क्या बदला?
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54 देशों में PM2.5 बढ़ा
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75 देशों में घटी
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12 नए देश रिपोर्ट में शामिल
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कुल 143 देशों का विश्लेषण
WHO का मैसेज साफ है
WHO कहता है – सालाना PM2.5 5 µg/m³ से कम होनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर जगहें इससे कहीं ज्यादा हैं। नीचे दिए चार्ट से समझिए कि हवा कितनी खराब होने पर क्या असर होता है:
अब सवाल ये है – हम क्या करें?
रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, चेतावनी भी है। बच्चों, बुजुर्गों और दिल-फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों के लिए ये हवा खासतौर पर खतरनाक है। सरकारें, उद्योग और हम– सबको मिलकर काम करना होगा। पेड़ लगाना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट बढ़ाना, पटाखे बंद करना, और EV को बढ़ावा देना– छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं।अभी के लिए, जब बाहर निकलें तो N95 मास्क जरूर पहनें, घर में एयर प्यूरीफायर रखें और बच्चों को सुबह-शाम बाहर खेलने से बचाएं। हवा हमारी जिंदगी है। इसे साफ रखना हमारा फर्ज है। IQAir की ये रिपोर्ट सिर्फ रैंकिंग नहीं – अलार्म है। क्या हम इसे सुनेंगे?
(स्रोत: IQAir World Air Quality Report 2025)
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