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ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप के लिए एक युवक ने दे दी अपनी बलि

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Puria Hamidi
Pouria Hamidi Iran suicide: ईरान के एक युवक ने, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प को संबोधित एक वीडियो संदेश पोस्ट करने के बाद, शुक्रवार 6 फ़रवरी के दिन आत्महत्या कर ली। अपने वीडियो में, पूरिया हामिदी नाम के इस युवक ने अमेरिकी प्रशासन से ईरान के साथ कोई समझौता नहीं करने और वहां के सत्ताधारियों के विरुद्ध प्रदर्शन करने वालों के समर्थन में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
 
पूरिया हामिदी, दक्षिणी ईरान के बंदरगाह नगर बुशहर का निवासी था। इस युवक ने सोशल मीडिया पर अपना अंतिम वीडियो संदेश साझा करने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। 10 मिनट और 44 सेकंड के इस वीडियो में, हामिदी ने सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प को संबोधित करते हुए अमेरिकी प्रशासन से वर्तमान ईरानी नेतृत्व के साथ किसी भी प्रकार की राजनयिक वार्ता या समझौते से दूर रहने की दारुण अपील की है। यह वीडियो 5 फरवरी को हामिदी के यूट्यूब चैनल 'पूरिया एक्स' पर अपलोड किया गया था।
 
आत्महत्या नहीं, आत्मबलि है : यह घटना वास्तव में आत्महत्या नहीं, आत्मबलि है; ईरान में व्याप्त गंभीर आंतरिक अशांति और दमनचक्र के बीच घटी है। हामिदी ने अपने अंतिम संदेश में ईरान में निर्ममता पूर्वक कुचल दिए गए देशव्यापी आंदोलन में भाग लेने वाले या उसका समर्थन करने वाले ईरानी युवाओं की हताशा को उजागर किया है। 'यह मेरा बलिदान है - कृपया, मेरे देश को आज़ाद करो' शीर्षक अपने इस वीडियो में हामिदी का कहना है कि ईरान में घरेलू दमन के कारण हुई मौतें, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में हुई मौतों से कहीं अधिक हैं, भले ही स्वतंत्र निगरानी एजेंसियों द्वारा इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की गई है।
 
मुख्य रूप से अंग्रेजी में रिकॉर्ड किया गया हामिदी का यह वीडियो, अमेरिका और उसके राष्ट्रपति से यह सीधी अपील है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता या राजनयिक संबंध का अर्थ, सड़कों पर प्रदर्शनों के दौरान मारे गए हज़ारों लोगों के साथ 'विश्वासघात' होगा। वीडियो में कहा गया है कि ईरानियों ने राष्ट्रपति ट्रम्प के वादों पर पूरा भरोसा जताया था और अमेरिका से ईरानी अयातुल्लाओं की नृशंस तानाशाही के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाने का आग्रह किया था।
 
बाहरी सहायता की गुहार : हामिदी ने बाहरी सहायता के बिना ईरान में आंतरिक परिवर्तन की संभावना के प्रति गहरी निराशा व्यक्त की है। वीडियो में उसका कहना है कि निहत्थे नागरिक राज्यसत्ता के सुरक्षा तंत्र का प्रभावी ढंग से सामना नहीं कर सकते। देश के युवाओं के लिए भविष्य की अनिश्चितता व्यापक मनोवैज्ञानिक संकट बन गई है। ईरान में इस समय जो स्थिति है, उसमें वह खुद भी खाने-पीने और सो सकने में असमर्थ है। आत्महत्या के अपने निश्चय को हामिदी ने अपने साथी नागरिकों की दुर्दशा की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने का एक हताश प्रयास बताया है।
 
वीडियो में हामिदी ने, 1980 में दिवंगत हो गए ईरान के अंतिम राजा, शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के अमेरिका में रह रहे निर्वासित पुत्र रज़ा पहलवी को, एक संक्रमणकालीन सरकार के संभावित नेता के रूप में अपना समर्थन दिया है। ईरानियों से सरकारी दबाव के सामने एकजुट रहने और एक-दूसरे का समर्थन करने का आह्वान किया है।
 
दमनचक्र थम नहीं रहा : इस बीच कहा जा रहा है कि ईरान की कट्टर इस्लाम पंथी सरकार के विरुद्ध वहाँ जो व्यापक प्रदर्शन आदि हुए, उनमें लगभग 40 हज़ार लोग मारे गए। मानवाधिकार संस्थाओं के अनुसार, ईरानी सरकार ने अपने विरोधियों की आवाज़ दबाने के प्रयासों को अब और अधिक तेज़ कर दिया है, जिसमें नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की जेल की सज़ा बढ़ा देना और प्रमुख असंतुष्टों के पारिवारिक सदस्यों की गिरफ़्तारी भी शामिल है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि हामिदी की मृत्यु, जनता पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव का ही एक उदाहरण है। लोगों के पास अपनी शिकायतों को व्यक्त करने के लिए कोई कानूनी या सुरक्षित रास्ता नहीं है।
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हो सकता है कि पूरिया हामिदी की आत्मबलि, ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति और अमेरिका से जुड़े जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्यों पर दुनिया का नए सिरे से ध्यान आकर्षित करे। हालाँकि, अमेरिकी प्रशासन ने इस विशिष्ट अपील पर आधिकारिक तौर पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
 
अमेरिकी सैन्य तैयारियां : पूरिया हामिदी वास्तव में या तो अंतहीन निराश हो गया था या उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य घेरेबंदी शुरू कर दी है। इसे एक विडंबना ही कहा जायेगा कि 6 फ़रवरी को हामिदी ने आत्मबलि दी, और उसी सप्ताह के अंत से यूरोप और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ने की ख़बरें आने लगी हैं।
 
कहा जा रहा है कि यूरोप और मध्य पूर्व में 100 से अधिक C-17 अमेरिकी रणनीतिक विमान तैनात किए गए हैं। विमानों की टोह लेन वाले तथाकथित 'फ्लाइट ट्रैकिंग इंटेलिजेंस' का उपयोग करते हुए इन दावों की पड़ताल की गई है और फारस की खाड़ी के किनारे अमेरिकी सैन्य गश्ती दल का पता लगाया गया है। ईरान से संबंधित घटनाओं पर नज़र रखने वाले लोग यूरोप और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उड़ानों की रिपोर्ट से बहुत उत्साहित हैं।
 
अधिकतर मालवाही विमान : कहा जा रहा है कि इन विमानों में से अधिकांश भारी मालवाहक विमान थे। शनिवार,7 फरवरी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 112 C-17 ग्लोबमास्टर सैन्य मालवाहक विमान इस अशांत क्षेत्र में प्रवेश कर गए। 9 फरवरी की सुबह, 'ओपन सोर्स इंटेलिजेंस' (OSINT) टूल से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह निर्धारित किया गया कि यूरोप और खाड़ी के हवाई अड्डों पर कई अमेरिकी C-17A विमान तैनात हैं, लेकिन यह सत्यापित नहीं हो सका कि उनकी संख्या 100 से अधिक है या नहीं। उस दिन क़तर के अल उदैद एयर बेस पर, जहां आमतौर पर अमेरिकी वायु सेना की भारी उपस्थिति रहती है, पांच C-17A, छह KC-135 स्ट्रैटोटैंकर और एक RC-135V रिवेट जॉइंट विमान तैनात मिले।
 
इसी प्रकार, अबू धाबी के अल धाफरा एयर बेस पर दो MQ-4C ट्राइटन मानवरहित विमान प्रणालियां तैनात हैं। 9 फ़रवरी तक सबसे अधिक विमान 'नाटो' गुट के नाम पर जर्मनी में स्थित अमेरिका के रामश्टाइन एयरबेस पर पाए गए। वहां बारह C-17, सात C-130J और एक C-5M गैलेक्सी विमान था। अमेरिका की तथाकथित 'वैश्विक प्रवेश द्वार' इकाई रामश्टाइन में ही स्थित है, जो C-130 विमानों का स्थायी रूप से संचालन करती है। अमेरिका के हर समय 34,500 से 38,000 सैनिक जर्मनी में ही तैनात रहते हैं।
 
जर्मनी में अमेरिकी उपस्थिति : अमेरिका की ओर से जर्मनी में नाटो के रामश्टाइन अड्डे पर एक दर्जन C-17 विमानों का भेजा जाना वैसे तो असामान्य है, पर यही संकेत देता है कि वह भी ईरान में भावी अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की तैयारी का ही एक भाग है। अमेरिकी सेनाएं अप़ग़ानिस्तान में जब हुआ करती थीं, तब जर्मनी में स्थित रामश्टाइन बेस से ही उन्हें निर्देश आदि मिला करते थे। अब रामश्टाइन से ही फ़ारस की खाड़ी की निगरानी भी की जा रही है।
 
बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के बीच वाले समुद्री क्षेत्र में गश्त लगाते हुए अमेरिकी नौसेना का एक P-8A पोसाइडन विमान, बार-बार एक ही मार्ग पर उड़ान भरता हुआ देखा गया। पोसाइडन गश्ती विमान ऐसे प्रारंभिक गुप्तचरी, निगरानी और टोही मिशनों का काम करते हैं, जो आमतौर पर किसी भी सैन्य अभियान से पहले किए जाते हैं। इस क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाही युद्धक जलपोत 'अब्राहम लिंकन' की उपस्थिति, वेनेजुएला में हुए 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' की पुनरावृत्ति बन सकती है। चीन के सरकारी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' में यही तुलना की गई है।
 
अमेरिका भी दूध का धुला नहीं है : ईरान के धर्मांध शासकों ने अपनी ही निरीह जनता पर जो अवर्णनीय अत्याचार किए हैं, अविश्वसनीय ख़ून बहाया है, उसे कतई अनदेखा नहीं किया जा सकता। पर, उनके विरुद्ध किसी सैन्य अभियान का यह भी परिणाम नहीं होना चाहिये कि सारा मध्यपूर्व जलने लगे या एक नया विश्वयुद्ध छिड़ जाए। सद्दाम हुसैन के इराक़ और तालिबान के अफ़़ानिस्तान में अमेरिकी हस्तक्षेप के परिणाम उत्सहवर्धक या प्रशंसनीय नहीं थे। जापान पर दो-दो परमाणु बम गिराने वाला अमेरिका भी दूध का धुला नहीं है कि उसकी हर बात पर आंख मूंद कर विश्वास कर लिया जाए।

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