Publish Date: Thu, 12 Mar 2026 (11:15 IST)
Updated Date: Thu, 12 Mar 2026 (14:05 IST)
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच उच्च‑स्तरीय कूटनीतिक बातचीत सफल रही। विदेशमंत्री जयशंकर की सिर्फ एक कॉल पर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों को गुजरने की इजाजत दी है। इस फैसले से ईरान और भारत के बीच की राजनीतिक संबंधों की सराहना हो रही है। आकलन किया जा रहा है कि भारत की विदेश निति काम कर रही है।
बता दें कि यह फैसला उस समय आया है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल के जहाज अभी भी प्रतिबंधों और हमलों के खतरे का सामना कर रहे हैं। कूटनीतिक सहमति के तुरंत बाद दो भारतीय टैंकर Pushpak' और Parimal' होर्मुज से सुरक्षित रूप से गुजरते हुए देखे गए।
इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ऐसे समय में एक महत्वपूर्ण संकेत है जब कई देशों के जहाजों को क्षेत्रीय तनाव के चलते गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। यह राहत ऐसे समय में आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हमलों की घटनाएं तेज हुई हैं। कई विदेशी जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हो चुके हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है।
ईरान ने सीधे कहा है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के हित वाले तेल को होर्मुज से गुजरने नहीं देगा। ईरान ने कहा, 'हम एक भी लीटर तेल को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए गुजरने नहीं देंगे' यह बयान खुद साबित करता है कि ईरान इस जलडमरूमध्य को रणनीतिक हथियार की तरह उपयोग कर रहा है। दूसरे शब्दों में होर्मुज को नियंत्रित कर ईरान दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को झकझोरने की क्षमता रखता है।
युद्ध और नाकेबंदी के बीच भारत ने ईरान के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता की और भारत- झंडाधारी जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल गया। इससे यह साफ है कि युद्ध के बीच भी कूटनीति की भूमिका अहम है।
Edited By : Naveen R Rangiyal
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