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Iran war : डरने की बजाय और आक्रामक हो गया ईरान, सऊदी-कुवैत-कतर की रिफाइनरियों पर हमले, उठने लगे आग और धुएं के गुबार

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Iran attack on Gulf countries
मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायल और अमेरिका के हमलों से बौखलाए ईरान ने अब खाड़ी देशों के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा हमलों में ईरान ने सऊदी अरब, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक  खाड़ी क्षेत्र की रिफाइनरियों और LNG टर्मिनलों पर हमलों से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे एशिया और यूरोप में गैस और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान का बड़ा टारगेट सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की SAMREF रिफाइनरी रही, जिसे मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में गिना जाता है। इस रिफाइनरी की क्षमता करीब 7.3 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जाती है। हमले के बाद इलाके में आग और धुएं के गुबार देखे गए, हालांकि आधिकारिक तौर पर नुकसान की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

कुवैत, कतर और UAE के एनर्जी प्लांट भी निशाने पर

 
रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने कुवैत की मीना अब्दुल्लाह रिफाइनरी पर भी हमला किया, जहां आग लगने की खबर है। वहीं कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यात केंद्र को भी नुकसान पहुंचा है। कतर वैश्विक स्तर पर LNG का बड़ा सप्लायर है, ऐसे में इस हमले का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित रुवैस रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद एहतियातन कामकाज रोक दिया गया। इसे संचालित करने वाली ADNOCने नुकसान की पुष्टि नहीं की, लेकिन सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है।
 

साउथ पार्स हमले के बाद भड़का ईरान

बताया जा रहा है कि ईरान ने इन हमलों को अपने साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हुए हमले का जवाब बताया है। यह दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक है और ईरान की लगभग 70 प्रतिशत घरेलू गैस आपूर्ति यहीं से होती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि यह युद्ध अब केवल सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला बड़ा संकट बनता जा रहा है। Edited by : Sudhir Sharma

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