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महाविनाश की कगार पर मिडिल ईस्ट! ट्रंप बोले- जल्द खत्म होगा युद्ध, पर ईरान की 'ना' ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

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Iran US war
Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच का त्रिकोणीय संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है, जहां से वापसी का रास्ता धुंधला दिखाई दे रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संघर्ष विराम की उम्मीद जगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध के मैदान से आती खबरें किसी बड़े वैश्विक संकट की आहट दे रही हैं।

ट्रंप की चेतावनी : शांति या विध्वंस?

सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के साथ बातचीत में बेहद पेचीदा संकेत दिए। उन्होंने एक ओर कहा कि यह युद्ध 'बहुत जल्द' खत्म हो सकता है, लेकिन तुरंत बाद ईरान को कड़ी चेतावनी भी दे दी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों का रास्ता रोकना बंद नहीं किया, तो अमेरिका और भी आक्रामक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
 
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख 'सॉफ्ट और हार्ड' डिप्लोमेसी का मिश्रण है, जहां वे एक हाथ से जैतून की शाखा (शांति) बढ़ा रहे हैं और दूसरे हाथ में मिसाइल का बटन दबाने की तैयारी रखे हुए हैं। ALSO READ: 20 ईरानी युद्धपोत डूबे, फिर भी थर-थर कांप रही US नेवी! होर्मुज में ईरान का 'अदृश्य शिकारी' मचा रहा है तबाही

ईरान और इजराइल : समझौते को तैयार नहीं

जहां ट्रंप शांति की बात कर रहे हैं, वहीं युद्ध के मुख्य पक्षकारों के तेवर ठंडे नहीं पड़े हैं:
  • ईरान की दो टूक : ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ ने साफ कर दिया कि ईरान संघर्ष विराम (Ceasefire) की भीख नहीं मांग रहा है।
  • नेतन्याहू की रणनीति : इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब ईरान की जनता से 'सत्ता परिवर्तन' की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का अंत ईरानी अवाम पर निर्भर करता है कि वे कब इस शासन को उखाड़ फेंकते हैं।

तेल की 'नब्ज' पर ईरान का हाथ : वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरे में

दुनिया का लगभग 20% तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इसका असर इतना गहरा है कि पाकिस्तान जैसे देशों को अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत तैनात करने पड़े हैं। ALSO READ: न्यूक्लियर वॉर की आशंका से खाड़ी देशों में हड़कंप, घर वापसी की होड़, दुबई एयरपोर्ट पर हजारों की लंबी कतारें
 
ईरानी तेल डिपो पर हुए हमलों ने न केवल ऊर्जा संकट पैदा किया है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में 'काली बारिश' और जहरीले धुएं ने लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

11वें दिन की तबाही : मौतों का आंकड़ा 1300 के पार

युद्ध के 11वें दिन भी हिंसा का तांडव जारी रहा:
  • लेबनान का मोर्चा : इजराइली बमबारी में लेबनान में अब तक 500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 6 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। जवाब में हिज्बुल्लाह ने भी इजराइल पर रॉकेट हमलों की रफ्तार बढ़ा दी है।
  • मानवीय त्रासदी : एक हृदयविदारक घटना में, एक अमेरिकी मिसाइल ने कथित तौर पर ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय को निशाना बनाया, जिसमें 175 लोगों (ज्यादातर बच्चे) की मौत हो गई।
  • खाड़ी देशों में दहशत : बहरीन की राजधानी मनामा में ईरानी हमले में एक नागरिक की मौत हुई है, जबकि सऊदी अरब और कुवैत लगातार ड्रोन मार गिराने का दावा कर रहे हैं।

तुर्की में पैट्रियट मिसाइलें और ऑस्ट्रेलिया का बड़ा कदम

बढ़ते खतरों को देखते हुए तुर्की के पूर्वी हिस्से में अमेरिकी पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली (Patriot Missile System) तैनात की जा रही है। वहीं, अमेरिका ने अपने राजनयिकों को सुरक्षा कारणों से वापस बुलाना शुरू कर दिया है।
 
इसी बीच, खेल के मैदान से एक साहसी खबर आई है। ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की 5 सदस्यों को मानवीय वीजा दिया है। इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद ईरान में उन्हें 'गद्दार' घोषित कर दिया गया था। ALSO READ: कहानी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के ख़ात्मे की

क्या कूटनीति की कोई गुंजाइश बची है?

फिलहाल, किसी भी पक्ष के बयानों में सुलह की गुंजाइश नहीं दिख रही है। 1300 से ज्यादा जानें जाने के बाद भी 'ईगो' और 'रणनीति' की जंग जारी है। क्या ट्रंप अपनी 'डील मेकिंग' कला से इस युद्ध को रोक पाएंगे, या मिडिल ईस्ट की ये आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी? यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 

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