Publish Date: Mon, 18 May 2026 (18:34 IST)
Updated Date: Mon, 18 May 2026 (19:01 IST)
Iran Internet Threat: होमुर्ज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स मांगने वाले ईरान ने अब एक नई चाल चल दी है। दरअसल, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नीचे बिछी अंडर-सी इंटरनेट केबलों को ब्लॉक करने या ठप करने की अप्रत्यक्ष धमकी दी है।
दरअसल, अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच ईरान अब इंटरनेट को एक नए भू-राजनीतिक हथियार (Digital Weapon) की तरह इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। ईरानी सेना (IRGC) से जुड़े मीडिया और सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाघरी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट कहा है कि हम इंटरनेट
इंटरनेट ट्रैफिक को ठप करने की धमकी
इतना ही नहीं ईरान इस मामले में एकाधिकार चाहता है। उसका कहना है कि समुद्र के नीचे इन केबलों की मरम्मत और देखरेख का जिम्मा सिर्फ और सिर्फ ईरानी कंपनियों के पास होगा। ईरान और उसकी सरकारी मीडिया का कहना है कि यदि दुनिया की इन दिग्गज कंपनियों ने ईरान की शर्तों और टैक्स को मानने से इनकार किया, तो इस रूट से होने वाले इंटरनेट ट्रैफिक को ठप या बाधित कर दिया जाएगा।
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होर्मुज क्यों है इतना अहम
पूरी दुनिया का लगभग 99% इंटरनेशनल इंटरनेट डेटा समुद्र के नीचे बिछी इन्हीं फाइबर-ऑप्टिक सबसी केबल्स (Subsea Cables) के जरिए ट्रांसफर होता है। होर्मुज स्ट्रेट के नीचे से कई महत्वपूर्ण नेटवर्क गुजरते हैं। यह साउथ-ईस्ट एशिया को मिस्र के रास्ते सीधे यूरोप से जोड़ता है। यह भारत और श्रीलंका को सीधे खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, कतर) और मिस्र से जोड़ता है। यह रूट एशिया और यूरोप के बीच का सबसे बड़ा डिजिटल कॉरिडोर है।
क्या होगा इसका दुनिया पर असर?
विशेषज्ञों की मानें तो यदि ईरान इन केबलों को नुकसान पहुंचाता है या डेटा ब्लॉक करता है, तो इसका असर केवल धीमी इंटरनेट स्पीड तक सीमित नहीं रहेगा। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन भुगतान और स्टॉक एक्सचेंज बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। इतना ही नहीं यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में बने टेक दिग्गजों के डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर ठप हो सकते हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
यदि इंटरनेट केबल ठप होती है तो भारत पर भी इसका असर हुए बिना नहीं रहेगा। भारत की आउटसोर्सिंग (IT) इंडस्ट्री और ऑनलाइन बिजनेस को भारी नुकसान हो सकता है क्योंकि भारत का एक बड़ा डेटा ट्रैफिक इसी रास्ते से पश्चिम की तरफ जाता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए ईरान की बात मानना भी मुश्किल है, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वे कानूनी रूप से ईरान सरकार को कोई सीधा भुगतान या टैक्स नहीं दे सकती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह डिजिटल विवाद और गहरा सकता है। यह भी माना जा रहा है कि ईरान इस माध्यम से परोक्ष रूप से अमेरिका पर दबाव बनाना चाहता है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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