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मिडिल ईस्ट में कभी भी छिड़ सकती है जंग! ईरान ने अमेरिका को ललकारा- 'हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं'

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, गुरुवार, 29 जनवरी 2026 (17:15 IST)
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसकी उंगलियां ट्रिगर पर हैं। क्या डोनल्ड ट्रंप की घेराबंदी से शुरू होगा युद्ध? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
 
मिडिल ईस्ट (Middle East) इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक छोटी सी चिंगारी भी महायुद्ध का रूप ले सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है। तेहरान ने बेहद कड़े लहजे में अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनकी 'उंगलियां अब ट्रिगर पर हैं' और किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का अंजाम बेहद भयानक होगा।

क्यों गहराया युद्ध का संकट?

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा मिडिल ईस्ट में USS अब्राहम लिंकन जैसे विध्वंसक विमानवाहक युद्धपोत और  'आर्माडा' (जंगी जहाजों का बेड़ा) तैनात करने के बाद ईरान भड़क उठा है। ईरान के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे इस  घेराबंदी को एक सीधी चुनौती के रूप में देख रहे हैं।

ईरान की दो टूक चेतावनी

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के करीब माने जाने वाले सूत्रों के अनुसार, ईरान ने साफ़ कर दिया है कि:
  • अगर ईरान की सीमा या उसके हितों पर कोई भी हमला होता है, तो उसे 'फुल स्केल वॉर' माना जाएगा।
  • ईरान ने अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और हाइपरसोनिक 'फतह' (Fateh) मिसाइल सिस्टम को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।
  • तेहरान का दावा है कि उनके पास अमेरिका के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पर्याप्त सैन्य ताकत मौजूद है।

अमेरिका का क्या है रुख?

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी है कि ईरान किसी भी तरह की गलतफहमी न पाले।  अमेरिका ने साफ किया है कि यह सैन्य तैनाती केवल एहतियात के तौर पर है, लेकिन अगर अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वे पीछे नहीं हटेंगे।
 
'हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर हम पर हमला हुआ तो ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।' – अमेरिकी रक्षा विभाग  के सूत्रों का संकेत।

दुनिया भर में खौफ का माहौल

इस तनाव के बीच वैश्विक तेल बाज़ार और शेयर बाज़ारों में अस्थिरता देखी जा रही है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने ईरान और  उसके पड़ोसी देशों के एयरस्पेस का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि संघर्ष शुरू होता है, तो  इसमें केवल दो देश नहीं बल्कि पूरा मिडिल ईस्ट और कई महाशक्तियां शामिल हो सकती हैं।
 

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