संयुक्त अरब अमीरात में सत्ता संघर्ष के बीच राष्ट्रपति नायद ने अपने बेटे और क्राउन प्रिंस खालिद को 260 अरब डॉलर की संपत्ति सौंप दी है। इस खबर के बाद यूएई में सत्ता बदलने के कयास लगाए जा रहे हैं।
बता दें कि यूएई शाही परिवार के पास 335 अरब डॉलर की कुल संपत्ति है। ऐसा माना जा रहा है कि खालिद को पैसे सौंपे जाने के बाद कहा जा रहा है कि जल्द ही सर्वोच्च नेता की कुर्सी भी जायद उन्हें सौंप सकते हैं।
कैसे घिर गया यूएई : बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने अपने बेटे शेख खालिद को एक ही रात में 260 बिलियन डॉलर की संपत्ति सौंप दी है। जायद ने यह फैसला ऐसे वक्त में किया है, जब संयुक्त अरब अमीरात मुसीबतों में फंसा है। यूएई का एक तरफ सऊदी अरब से पंगा चल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ जायद अल नाहयान परिवार में सत्ता का संघर्ष छिड़ा है।
क्या यह सत्ता सौंपने के संकेत हैं : वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने 260 बिलियन डॉलर की संपत्ति अपने बेटे को सौंपकर यह संकेत दे दिया कि राष्ट्रपति की गद्दी अब उन्हें ही मिलेगी। कहा जा रहा है कि यूएई में जल्द ही सत्ता का हस्तांतरण हो सकता है।
कौन हैं शेख खालिद बिन मोहम्मद : खालिद यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के सबसे बड़े बेटे हैं। वर्तमान में खालिद अमीरात की सरकार में युवराज घोषित हैं। खालिद का जन्म साल 1982 में हुआ था। 2016 में खालिद पहली बार राजनीति में आए। उस वक्त उन्हें सुरक्षा प्रमुख बनाया गया था। 2023 में खालिद का प्रमोशन हुआ और उन्हें यूएई का युवराज घोषित किया गया। खालिद ने शुरुआती पढ़ाई लिखाई अबू धाबी में ही पूरी की। इसके बाद मास्टर करने के लिए वे जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी वाल्श स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस चले गए। खालिद की पढ़ाई राजनीतिक विज्ञान में हुई है।
नाहयान परिवार के पास संपत्ति : ब्लूमबर्ग ने साल 2025 में दुनिया के सबसे अमीर परिवारों की सूची जारी की थी। इस लिस्ट में नाहयान का परिवार दूसरे नंबर पर था। रिपोर्ट के मुताबिक यूएई के शाही परिवार की कुल संपत्ति 335 अरब अमेरिकी डॉलर है। संयुक्त अरब अमीरात के इस शासक परिवार की सारी संपत्ति का स्रोत तेल का कारोबार है। इस परिवार के मुखिया शेख मोहम्मद बिन जायद संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति भी हैं। अब नाहयान ने अपनी कुल 335 अरब डॉलर में से 260 अरब डॉलर की संपत्ति अपने बेटे को ट्रांसफर कर दी है।
Edited By: Naveen R Rangiyal