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अयातुल्लाह खामेनेई की हत्या: मोसाद ईरान के सुप्रीम लीडर तक कैसे पहुंची?

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खामेनेई हत्या
2024 में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने CNN Turk को दिए इंटरव्यू में दावा किया था कि ईरान की काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट का हेड और उसके 20 एजेंट मोसाद के लिए काम कर रहे थे। यह दावा तब हैरतअंगेज़ था, लेकिन 28 फरवरी 2026 को घटित घटना ने इसे और भी विश्वसनीय बना दिया। अयातुल्लाह अली खामेनेई, ईरान के सुप्रीम लीडर (1989 से शासन), अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए। ईरानी स्टेट मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की, जिसमें कहा गया कि वे अपने ऑफिस में काम कर रहे थे जब हमला हुआ।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर घोषणा की कि खामेनेई “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक” मारा गया। इज़राइल ने भी पुष्टि की कि यह एक “डिकैपिटेशन स्ट्राइक” था, जिसमें कई टॉप अधिकारी मारे गए।
यह हमला ईरान के कई प्रांतों में हुआ, जिसमें तेहरान के खामेनेई के कंपाउंड को निशाना बनाया गया। ईरान ने 40 दिनों का शोक घोषित किया और बदला लेने की कसम खाई, लेकिन यह घटना मोसाद की इंटेलिजेंस की गहराई को फिर से उजागर करती है।

खामेनेई और उनके करीबी सहयोगियों की हालिया हत्याएं

28 फरवरी 2026 के हमलों में सिर्फ खामेनेई ही नहीं, बल्कि उनके कई करीबी और टॉप अधिकारी मारे गए। प्रमुख उदाहरण:
•  अयातुल्लाह अली खामेनेई (सुप्रीम लीडर) – उनके ऑफिस/कंपाउंड पर हमला, मौत की पुष्टि ईरानी स्टेट टीवी से। उनकी बेटी, दामाद और पोते भी मारे गए।
•  अली शमखानी (खामेनेई के सीनियर एडवाइजर और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी) – हमलों में मारे गए।
•  मोहम्मद पाकपुर (IRGC कमांडर-इन-चीफ) – IRGC के प्रमुख, हमलों में मौत।
•  अमीर नसीरजादेह (ईरान के डिफेंस मिनिस्टर) – इज़राइल ने उनकी मौत की पुष्टि की।
•  अन्य: कई IRGC कमांडर और सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य।
ये हमले “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” जैसे नामों से जुड़े बताए जा रहे हैं, जहां इज़राइल ने लीडरशिप को टारगेट किया जबकि अमेरिका ने मिसाइल और न्यूक्लियर साइट्स पर फोकस किया।
2025 के संदर्भ में: जून 2025 के “ट्वेल्व-डे वॉर” में भी इज़राइल ने कई टॉप IRGC कमांडरों को मारा था, जैसे हुसैन सलामी (IRGC कमांडर-इन-चीफ), मोहम्मद बघेरी (आर्म्ड फोर्सेस चीफ ऑफ स्टाफ), अमीर अली हाजीज़ादेह (एयरोस्पेस फोर्स कमांडर)। ये घटनाएं दिखाती हैं कि इज़राइल ने ईरान की मिलिट्री लीडरशिप को लगातार कमजोर किया।
मोसाद की ताकत: बहुस्तरीय इंटेलिजेंस नेटवर्क और हालिया सफलता
खामेनेई की हत्या जैसी हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन के लिए सटीक इंटेलिजेंस जरूरी थी – लोकेशन, मीटिंग टाइमिंग, सिक्योरिटी गैप। मोसाद की सफलता के कारण:
1.  मानव खुफिया (HUMINT): अहमदीनेजाद के दावे के अनुसार, ईरान की एंटी-मोसाद यूनिट में घुसपैठ। लोकल एजेंट्स, असंतुष्ट अधिकारी या आर्थिक मजबूरी से रिक्रूटमेंट। 2026 के हमलों में सैटेलाइट और ग्राउंड इंटेल से कंपाउंड की लोकेशन मिली।
2.  साइबर और टेक्नोलॉजी: AI, ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी। स्टक्सनेट जैसी साइबर ऑपरेशंस से ईरान के सिस्टम में पैठ।
3.  लंबी रणनीतिक तैयारी: दशकों की प्लानिंग। 2018 की न्यूक्लियर आर्काइव चोरी से लेकर 2025-26 के हमलों तक।
4.  सहयोगी नेटवर्क: अमेरिका के साथ जॉइंट ऑपरेशन, क्षेत्रीय इंटेल शेयरिंग।
ये हमले दिखाते हैं कि मोसाद ने ईरान को “ओपन बुक” बना रखा था – जहां टॉप लीडरशिप की मीटिंग्स तक की जानकारी थी।

खुफिया दुनिया में सच और प्रचार: 

खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई, लेकिन कई दावे राजनीतिक हैं। ईरान ने पहले इनकार किया, फिर पुष्टि की। मोसाद की सफलताएं दर्ज हैं, लेकिन प्रचार भी चलता है।
फिर भी, 2025-26 की घटनाएं – खामेनेई, IRGC कमांडरों की हत्याएं – मोसाद की गहरी पैठ साबित करती हैं।
 
इज़राइल की इंटेलिजेंस कोई जादू नहीं, बल्कि HUMINT, टेक्नोलॉजी और दशकों की तैयारी का नतीजा है। खामेनेई की हत्या ने ईरान में लीडरशिप क्राइसिस पैदा कर दी है। जानकारी ही असली ताकत है – और मोसाद इसमें माहिर है।

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