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नीदरलैंड ने भारत को दिया खास तोहफा, PM मोदी को लौटाई ये बेशकीमती चीज, चोल राजवंश से है कनेक्‍शन

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Prime Minister Narendra Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों के दौरे पर हैं। उनकी 6 दिवसीय यात्रा में यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी 15 मई को यूएई गए थे और अब वो नीदरलैंड पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान नीदरलैंड सरकार ने 11वीं सदी के दुर्लभ अनैमंगलम ताम्रपत्र (तांबे की प्लेटें) भारत को लौटा दिए हैं, जो तमिल और संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं। ये ऐतिहासिक कलाकृतियां दक्षिण भारत के महान चोल राजवंश से संबंधित हैं। इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये ताम्रपत्र 18वीं शताब्दी में कोरोमंडल तट पर डच औपनिवेशिक शासन के दौरान नीदरलैंड ले जाए गए थे।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों के दौरे पर हैं। उनकी 6 दिवसीय यात्रा में यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी 15 मई को यूएई गए थे और अब वो नीदरलैंड पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान नीदरलैंड सरकार ने 11वीं सदी के दुर्लभ अनैमंगलम ताम्रपत्र (तांबे की प्लेटें) भारत को लौटा दिए हैं, जो तमिल और संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं।

क्‍या कहते हैं इतिहासकार?

ये ऐतिहासिक कलाकृतियां दक्षिण भारत के महान चोल राजवंश से संबंधित हैं। इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये ताम्रपत्र 18वीं शताब्दी में कोरोमंडल तट पर डच औपनिवेशिक शासन के दौरान नीदरलैंड ले जाए गए थे। डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1690 में अपना कोरोमंडल मुख्यालय पुलिकट से नागापट्टिनम ट्रांसफर कर दिया था। इसी अवधि के दौरान ये कलाकृतियां यूरोपीय कब्जे में चली गईं।

कहां रखी थीं ये ऐतिहासिक धरोहरें?

ये बेशकीमती धरोहरें पिछले 300 वर्षों से नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी के संग्रह में रखी गई थीं। इन ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी भारत सरकार, डच सरकार और लीडेन विश्वविद्यालय के बीच कई वर्षों तक चली बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के बाद संभव हो सकी। नीदरलैंड में इन प्लेटों को 'लीडेन प्लेट्स' के नाम से जाना जाता है।
 

क्या लिखा है इन बेशकीमती धरोहरों पर?

इन अभिलेखों से यह भी पता चलता है कि उस समय के हिंदू शासक बौद्ध संस्थानों को भी संरक्षण और सहायता देते थे। इससे अलग-अलग धर्मों के बीच आपसी सम्मान और साथ मिलकर रहने की परंपरा की झलक मिलती है। इन तांबे की प्लेटों में नागपट्टिनम में बने एक बौद्ध मठ 'चूड़ामणि विहार' को दी गई जमीन, कर और राजस्व से जुड़े अनुदानों का जिक्र है। इतिहासकारों और विद्वानों के मुताबिक, उस समय भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध थे।

बेहद कीमती ऐतिहासिक दस्तावेज़

विशेषज्ञों का मानना है कि ये तांबे की पट्टिकाएं सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड नहीं हैं, बल्कि बेहद कीमती ऐतिहासिक दस्तावेज़ हैं। अनैमंगलम ताम्रपत्रों में 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटें शामिल हैं। इनका वजन लगभग 30 किलोग्राम है। ये एक गोलाकार तांबे की रिंग द्वारा आपस में बंधी हुई हैं। चोल काल अपनी खूबसूरत कांस्य मूर्तियों के लिए भी प्रसिद्ध रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा में व्यापार, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, वॉटर मैनेजमेंट, ग्रीन एनर्जी और रक्षा सहयोग जैसे कई बड़े मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। भारत और नीदरलैंड के बीच सेमीकंडक्टर, हाई-टेक इंडस्ट्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे तकनीकी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदारी है।
Edited By : Chetan Gour

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