विश्व ध्यान दिवस पर गुरुदेव श्रीश्री रविशंकरजी के नेतृत्व में विश्वभर में होगा सामूहिक ध्यान
मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख लोग एक साथ करेंगे ध्यान
विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर आध्यात्मिक गुरु एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्रीश्री रविशंकरजी के सान्निध्य में 21 दिसंबर को विश्व भर में सामूहिक ध्यान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस ऐतिहासिक आयोजन के अंतर्गत मध्यप्रदेश में लगभग डेढ़ लाख लोग एक साथ ध्यान करेंगे। इससे राज्य ध्यान एवं मानसिक शांति के वैश्विक मानचित्र पर विशेष पहचान बनाएगा।
आर्ट ऑफ लिविंग ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन के राज्य समन्वयक रितुराज असाटी ने बताया कि मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों, शहरों एवं ग्रामीण अंचलों में एक साथ सामूहिक ध्यान सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें युवा, विद्यार्थी, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक एवं सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता रहेगी।
पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित पहले विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर दुनिया भर से 85 लाख से अधिक लोगों ने एक साथ ध्यान कर वैश्विक चेतना को ऊंचा उठाया था। इसी ऐतिहासिक क्षण की पृष्ठभूमि में गुरुदेव श्रीश्री रविशंकरजी ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा मुख्यालय से, आज के अशांत और बेचैन होते संसार के लिए इस कालातीत साधना को अपनाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि ध्यान केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन समाजों के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है जो थकान, तनाव, संघर्ष, अनिश्चितता और भावनात्मक पीड़ा से जूझ रहे हैं।
दूसरे विश्व ध्यान दिवस के उत्सवों की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र जिनेवा में विश्व शांति के लिए ध्यान विषय पर गुरुदेव के विशेष संबोधन से हुई। यह कार्यक्रम भारत के स्थायी मिशन, जिनेवा द्वारा द आर्ट ऑफ लिविंग के सहयोग से आयोजित किया गया। ऐसे समय में, जब हर आयु वर्ग और भौगोलिक सीमाओं के पार चिंता, बर्नआउट और अकेलेपन की समस्या बढ़ती जा रही है, गुरुदेव का संदेश इस बात पर केंद्रित था कि अशांति का समाधान केवल बाहरी उपायों से नहीं, बल्कि मानव मन को स्थिर करने से भी संभव है।
गुरुदेव ने कहा कि ध्यान अब दुनिया के लिए कोई विलासिता नहीं रह गया है। जब हमारी एक तिहाई आबादी अकेलेपन से और आधी आबादी मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों से जूझ रही है, तब हमें ऐसा कुछ करने की आवश्यकता है जो हमें स्वयं से जोड़ सके, जो हमारे भीतर जमा तनाव को दूर कर सके। यहीं ध्यान की भूमिका सामने आती है।
ध्यान के संदर्भ में माइंडफुलनेस की अवधारणा को समझाते हुए गुरुदेव ने कहा कि माइंडफुलनेस ड्राइववे है और ध्यान आपका घर। ध्यान आपको भीतर गहराई तक ले जाता है और वह शांति देता है जिसकी आज सख्त ज़रूरत है। यह कोई कठिन प्रक्रिया नहीं है। ध्यान तो बस मन के कंप्यूटर में जमा अनावश्यक फाइलों को डिलीट करने जैसा है।
गुरुदेव ने यह भी समझाया कि “हम सभी ऊर्जा हैं। उन्होंने श्रोताओं को इस ऊर्जा के स्वरूप पर विचार करने के लिए प्रेरित किया, “क्या यह ऊर्जा सामंजस्यपूर्ण है, क्या यह हमारे परिवेश में एकता और सौहार्द पैदा करती है? ध्यान इसका उत्तर देता है। ध्यान हमारे चारों ओर आवश्यक सामंजस्य रचता है और हमारी तरंगों को शुद्ध करता है।”
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, महामहिम श्री अरिंदम बागची ने कहा, “हमें पिछले वर्ष जिनेवा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए गुरुदेव की यात्रा आज भी सादर स्मरण है। गहरे संघर्ष और अविश्वास से भरी दुनिया में, ध्यान केवल आत्म-विकास की व्यक्तिगत साधना नहीं है, बल्कि जटिल वैश्विक परिस्थितियों को समझने, अविश्वास को पाटने और सहानुभूति विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है।”
आधुनिक युग के बड़े हिस्से में, पश्चिमी दुनिया में ध्यान को या तो 'रहस्यमय' का दर्जा मिला, या फिर इसे हाशिए की साधना मानकर नज़रअंदाज़ किया गया। 1980 के दशक की शुरुआत में, जब आंतरिक विज्ञान पर चर्चा के लिए मुख्यधारा में बहुत कम स्थान था, तब गुरुदेव ने एक ऐसी यात्रा आरंभ की जिसने धीरे-धीरे लोगों को भीतर की ओर देखने के दृष्टिकोण को बदल दिया। उन्होंने ध्यान को दुनिया तक पहुँचाया। शिक्षा, संघर्ष समाधान, किसान कल्याण, कारागार सुधार, युवा नेतृत्व, कॉर्पोरेट तनाव प्रबंधन और समुदायों के पुनर्निर्माण जैसे विविध क्षेत्रों में ध्यान को अपने कार्य का केंद्र बनाते हुए, वे 182 से अधिक देशों तक पहुँचे।
बुधवार के अपने संबोधन में गुरुदेव ने उन 192 देशों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस प्रस्ताव के अनुमोदन का समर्थन किया। किसी आंतरिक साधना का इतने व्यापक सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और संस्थागत स्तर पर, विभिन्न देशों और आस्थाओं के बीच स्वीकार किया जाना विरल है, और यही इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता है।
इसी वैश्विक गति को आगे बढ़ाते हुए, गुरुदेव 19 दिसंबर को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से एक प्रमुख भाषण भी देंगे, जिसमें वे मानसिक दृढ़ता, संवाद और शांति को सुदृढ़ करने में ध्यान की भूमिका को और अधिक रेखांकित करेंगे, विशेषकर एक ऐसे विश्व में जो लगातार ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रहा है।
इस वर्ष भी 21 दिसंबर को लाखों लोगों के गुरुदेव के साथ जुड़ने की संभावना है, जब वे न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित प्रतिष्ठित ओक्यूलस से रात 8.30 बजे (भारतीय समयानुसार) एक परिवर्तनकारी सत्र और संक्षिप्त ध्यान का मार्गदर्शन करेंगे।