Publish Date: Wed, 11 Feb 2026 (16:19 IST)
Updated Date: Wed, 11 Feb 2026 (18:07 IST)
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में एक ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। आसिफ ने अमेरिका के साथ पाकिस्तान के पुराने रिश्तों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने इस्लामाबाद का इस्तेमाल एक 'टॉयलेट पेपर' की तरह किया- काम निकल जाने के बाद जिसे कूड़े के ढेर में फेंक दिया जाता है। ख्वाजा आसिफ का यह बयान न केवल अमेरिका के प्रति उनकी कड़वाहट को दर्शाता है, बल्कि यह पाकिस्तान के भीतर अपनी ही विदेश नीति की विफलताओं को स्वीकार करने की एक छटपटाहट भी है।
पिछली गलतियों का 'सफेद झूठ' बेनकाब
अक्सर अपनी आतंकी हिस्ट्री से पल्ला झाड़ने वाले पाकिस्तान के सुर इस बार बदले हुए नजर आए। ख्वाजा आसिफ ने बड़ी बेबाकी से स्वीकार किया कि: पाकिस्तान अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय हमेशा उन्हें पिछले तानाशाहों के मत्थे मढ़कर अपना पल्ला झाड़ता रहा है। अफगान युद्धों में शामिल होना पाकिस्तान की सबसे बड़ी रणनीतिक भूल थी। आज पाकिस्तान जिस आतंकवाद की आग में जल रहा है, वह दरअसल उन्हीं पुरानी गलतियों का कड़वा फल है।
जिहाद नहीं, 'सुपरपावर' की चापलूसी थी वजह
आसिफ ने उस सरकारी नैरेटिव को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें अफगान युद्धों में शामिल होने को 'धार्मिक मजबूरी' बताया जाता रहा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:
"जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ जैसे तानाशाहों ने पाकिस्तानियों को इस्लाम के लिए नहीं, बल्कि एक सुपरपावर (अमेरिका) को खुश करने के लिए जिहाद के नाम पर आग में झोंका था।"
9/11 के बाद का सौदा पड़ा भारी
रक्षा मंत्री ने 1999 के बाद और विशेष रूप से 2001 (9/11) के बाद अमेरिका का साथ देने के फैसले को आत्मघाती बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका तो अफगानिस्तान से निकल गया, लेकिन पीछे पाकिस्तान के लिए हिंसा, कट्टरपंथ और आर्थिक बदहाली का ऐसा अंतहीन सिलसिला छोड़ गया, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
आतंकवाद को स्वीकारा
उन्होंने यह भी माना कि पाकिस्तान का आतंकी इतिहास रहा है। आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान की दो जंगों में शामिल होना पाकिस्तान की बड़ी भूल थी और आज देश में जो आतंकवाद है, वह उन्हीं गलतियों का नतीजा है।
Edited by : Sudhir Sharma