Publish Date: Mon, 18 May 2026 (13:04 IST)
Updated Date: Mon, 18 May 2026 (14:02 IST)
पाकिस्तान के लाहौर को उसकी पुरानी ऐतिहासिक, हिंदू और ब्रिटिश कालीन पहचान लौटाने के लिए सड़कों, चौकों और ऐतिहासिक मोहल्लों के नाम बदल गए हैं। पाकिस्तानी पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज और मुस्लिम लीग (नवाज) के प्रमुख नवाज शरीफ की अगुवाई में सरकार ने लाहौर के करीब 9 प्रमुख स्थानों के नाम बदलकर उनके मूल नाम बहाल कर दिए हैं। इसके तहत इस्लामपुरा हुआ कृष्णनगर हो गया तो बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर 'जैन मंदिर चौक' कर दिया गया।
किन जगहों के नाम बदले गए?
1990 के दशक में लाहौर की कई पुरानी जगहों के हिंदू और ब्रिटिश नामों को बदलकर उनका 'इस्लामीकरण' कर दिया गया था। अब उन्हें वापस बदल दिया गया है:
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इस्लामपुरा का नाम बदलकर फिर से 'कृष्णनगर' कर दिया गया है।
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बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर 'जैन मंदिर चौक' कर दिया गया।
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मुस्तफाबाद का नाम बदलकर वापस 'धर्मपुरा' किया गया।
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मौलाना जफर अली चौक का नाम बदलकर 'लक्ष्मी चौक' हुआ।
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सुन्नत नगर का नाम बदलकर 'संतनगर' किया गया है।
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रहमान गली का नाम 'राम गली' हो गया।
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सर आगा खान चौक का नाम बदलकर 'डेविस रोड' किया गया।
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अल्लामा इकबाल रोड को फिर से 'जेल रोड' और फातिमा जिन्ना रोड को 'क्वींस रोड' किया गया।
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बाग-ए-जिन्ना को दोबारा उसके पुराने नाम 'लॉरेंस रोड/गार्डन' के नाम से पहचाना जाएगा।
क्यों बदले नाम
इतिहास और विरासत का संरक्षण: पंजाब सरकार के 'लाहौर हेरिटेज एरियाज रिवाइवल' (LAHR) प्रोजेक्ट के तहत यह फैसला लिया गया है। नवाज शरीफ का मानना है कि यूरोप की तरह पाकिस्तान को भी अपने ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। पुरानी इमारतें और नाम लाहौर की असली पहचान हैं।
आम जनता की आदत: सरकार के अधिकारियों का कहना है कि दशकों पहले कागजों में नाम बदल दिए जाने के बावजूद, लाहौर की आम जनता आज भी बातचीत में इन्हें 'लक्ष्मी चौक' या 'जैन मंदिर चौक' ही बुलाती थी। नए नाम कभी भी जनमानस में पूरी तरह स्वीकार नहीं हो पाए।
पर्यटन को बढ़ावा: लाहौर की सांस्कृतिक विविधता (जिसमें मुस्लिम, हिंदू, सिख और ब्रिटिश इतिहास शामिल है) को दिखाकर शहर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर चमकाना भी इसका एक बड़ा उद्देश्य है।
लोगों ने नहीं किया विरोध
हैरान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के भीतर इसके खिलाफ कोई बड़ा विरोध या प्रदर्शन देखने को नहीं मिला है। आमतौर पर कट्टरपंथी संगठनों द्वारा ऐसे फैसलों का हिंसक विरोध होता है, लेकिन वर्तमान में मरियम नवाज सरकार ने कट्टरपंथी संगठन 'तहरीक-ए-लबैक पाकिस्तान' (TLP) जैसी ताकतों पर सख्त रुख अपनाया हुआ है। इसके अलावा, स्थानीय मौलवियों का कहना है कि इस्लाम को किसी पुराने मंदिर, गुरुद्वारे या ऐतिहासिक नाम से कोई समस्या नहीं है। 90 के दशक में नाम बदलना महज एक राजनीतिक फैसला था।
अगला कदम क्या है?
सरकार लाहौर के परकोटा शहर के सभी 8 ऐतिहासिक दरवाजों (जैसे दिल्ली गेट, भाटी गेट आदि) का जीर्णोद्धार कर रही है। लाहौर के बाद दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में भी उन ऐतिहासिक जगहों के मूल नाम वापस लौटाए जा सकते हैं, जिन्हें समय के साथ बदल दिया गया था।
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