Publish Date: Wed, 01 Apr 2026 (13:28 IST)
Updated Date: Wed, 01 Apr 2026 (13:37 IST)
Saudi Pak Defense Agreement: अमेरिका और इज़राइल की ईरान पर भीषण बमबारी ने वैश्विक व्यवस्था की चूलें हिला दी हैं। 9 से अधिक देशों में तबाही का मंजर है और वैश्विक अर्थव्यवस्था हर दिन अरबों डॉलर का घाटा सह रही है। पिछले एक महीने से मिडिल ईस्ट (Middle East) श्मशान बना हुआ है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान इस युद्ध का अगला खिलाड़ी बनने जा रहा है?
2025 का रक्षा समझौता : पाकिस्तान की मजबूरी या वफादारी?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार का बयान बेहद गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह संघर्ष केवल “मौत और विनाश” लेकर आएगा। लेकिन असली पेंच फंसा है 2025 के सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते में।
ईरान द्वारा सऊदी अरब और खाड़ी देशों (GCC) पर ड्रोन हमलों के बाद स्थिति नाजुक है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने हाल ही में रियाद को भरोसा दिलाया है कि पाकिस्तान हमेशा अपने 'भाई' सऊदी अरब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। अगर सऊदी अरब जवाबी सैन्य कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान को इस समझौते के तहत अपने सैनिक युद्ध के मैदान में उतारने पड़ सकते हैं।
पाकिस्तान क्यों कतरा रहा है युद्ध से?
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद सईद के अनुसार, सऊदी अरब ने अब तक "अद्भुत संयम" दिखाया है। पाकिस्तान युद्ध से बचने की कोशिश इसलिए कर रहा है क्योंकि:
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भारत के साथ हालिया तनाव : एक साल पहले ही भारत के साथ चार दिनों का मिसाइल युद्ध पाकिस्तान की कमर तोड़ चुका है।
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तालिबान फ्रंट : पश्चिमी सीमा पर अफगानिस्तान के साथ लगातार झड़पें जारी हैं।
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आर्थिक बदहाली : पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किसी भी बड़े सैन्य अभियान का बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है।
कूटनीति का 'सेंटर पॉइंट' बना इस्लामाबाद
वॉशिंगटन के एक्सपर्ट कामरान बुखारी का मानना है कि ईरान के लिए पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है जो मध्यस्थ बन सकता है। इसी कड़ी में इस्लामाबाद में तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के शीर्ष राजनयिकों की आपात बैठक हुई है।
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की पेशकश की है, जिसे चीन का भी समर्थन मिला है। हालांकि, इशाक डार चोटिल होने के बावजूद बीजिंग की यात्रा पर हैं ताकि किसी भी तरह इस आग को फैलने से रोका जा सके।
हूती विद्रोह और ट्रंप-नेतन्याहू का 'ऐतिहासिक सबक'
युद्ध का दायरा तब और बढ़ गया जब यमन के हूती विद्रोहियों ने पहली बार सीधे इज़राइल पर निशाना साधा। उधर, ईरान के सुरक्षा अधिकारियों ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा है कि यह हमारा युद्ध है। हम ट्रंप और नेतन्याहू को ऐतिहासिक सबक सिखाकर ही दम लेंगे। ईरान ने फिलहाल पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली क्षेत्रीय बैठकों से दूरी बना ली है, जिससे शांति की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं।
क्या होगा आगे?
वर्तमान स्थिति बेहद अनिश्चित है। यदि ईरान ने सऊदी अरब की रेड लाइन को पार किया, तो पाकिस्तान की कूटनीति समाप्त हो जाएगी और सैन्य हस्तक्षेप शुरू हो जाएगा। दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है। पाकिस्तान की "शांति पहल" शायद आखिरी उम्मीद है। यदि अगले 48 घंटों में इस्लामाबाद, रियाद और तेहरान के बीच कोई सहमति नहीं बनी, तो "मौत और विनाश" का यह तांडव पूरे दक्षिण एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है।
वेबदुनिया रिसर्च टीम
Publish Date: Wed, 01 Apr 2026 (13:28 IST)
Updated Date: Wed, 01 Apr 2026 (13:37 IST)