Publish Date: Wed, 25 Feb 2026 (16:42 IST)
Updated Date: Wed, 25 Feb 2026 (16:48 IST)
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध अब सिर्फ दो देशों की जंग नहीं रह गया है, बल्कि यह मानवीय क्रूरता की सारी हदें पार कर चुका है। बीबीसी की नई डॉक्युमेंट्री The Zero Line में चार रूसी सैनिकों ने मोर्चे से जो सच बताया है, वह किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है। इसे रूस की मीट स्टॉर्म (Meat Storm) रणनीति कहा जा रहा है, जहाँ सैनिकों को इंसान नहीं, बल्कि सिर्फ मांस का लोथड़ा समझा जाता है।
क्या है ज़ीरोइंग? जब अपनों को ही मार दी जाती है गोली: रूसी सेना में अनुशासन बनाए रखने के नाम पर एक खौफनाक शब्द का इस्तेमाल हो रहा है— “ज़ीरोइंग” (Zeroing)। इसका मतलब है आदेश न मानने वाले या पीछे हटने वाले अपने ही सैनिकों को मौके पर ही गोली मार देना।
इल्या की आपबीती: इल्या नामक एक पूर्व सैनिक ने बताया कि उसने अपने कमांडर को चार साथियों को बहुत करीब से गोली मारते देखा। उनका अपराध बस इतना था कि वे फ्रंट लाइन के नर्क से भागना चाहते थे। इल्या के मुताबिक, "वे चिल्लाते रहे कि हमें मत मारो, हम कुछ भी करेंगे, लेकिन कमांडर ने उन्हें 'ज़ीरो' कर दिया।"
अमानवीय सजा: जब इल्या ने हमले में शामिल होने से मना किया, तो उसे पेड़ से बांधकर पीटा गया और उस पर पेशाब किया गया। अपमान की इस पराकाष्ठा ने उसे आत्महत्या की कोशिश करने पर मजबूर कर दिया।
हीरो ऑफ रशिया या एक क्रूर कसाई?
डॉक्युमेंट्री में दीमा नाम के सैनिक ने अपने कमांडर अलेक्सी क्सेनोफोंटोव की पोल खोली है। अलेक्सी को 2024 में रूस का सर्वोच्च सम्मान हीरो ऑफ रशिया मिला था, लेकिन दीमा उसे “कसाई” कहता है।
"मैने एक गड्ढे में 20 रूसी सैनिकों के शव देखे। उन्हें दुश्मनों ने नहीं, बल्कि उनके ही साथियों ने मारा था। मारने के बाद उनके बैंक कार्ड तक चुरा लिए गए ताकि उनकी सैलरी हड़पी जा सके। यह कोई फिल्म नहीं, कड़वा सच है।"— दीमा, रूसी सैनिक
मीट स्टॉर्म: गोला-बारूद खत्म करने की आत्मघाती चाल
रूस की सबसे विवादास्पद रणनीति मीट स्टॉर्म है। इसमें सैनिकों को लहरों की तरह तब तक मौत के मुँह में भेजा जाता है, जब तक कि यूक्रेनी सेना की गोलियां और गोले खत्म न हो जाएं।
पहली लहर: 3 सैनिकों को भेजा जाता है (निश्चित मौत)।
दूसरी लहर: 10 सैनिकों को भेजा जाता है।
तीसरी लहर: 50 या उससे अधिक सैनिकों को तब तक भेजा जाता है जब तक यूक्रेनी डिफेंस थक न जाए।
दीमा के शब्दों में, "भले ही तीन दिन में पूरी रेजिमेंट खत्म हो जाए, लेकिन वे तब तक सैनिकों को भेजते रहते हैं जब तक रास्ता साफ न हो जाए।
यह खुलासे बताते हैं कि युद्ध के मैदान में रूसी सैनिकों के लिए दुश्मन की गोली से ज्यादा खतरनाक उनके अपने कमांडरों का आदेश बन चुका है। 'द जीरो लाइन' की यह रिपोर्ट पुतिन की युद्ध नीति पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
Edited By: Naveen R Rangiyal