रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सत्ता संभाले एक चौथाई सदी यानी पूरे 25 साल हो चुके हैं। इस लंबे कार्यकाल में उन्होंने खुद को एक ऐसे मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है, जो रूस को फिर से विश्व महाशक्ति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। रूसी जनता के लिए यह छवि बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन हालिया एक घटना ने इस इमेज को गहरा झटका दिया है।
उत्तरी अटलांटिक महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सैन्य बलों ने रूसी झंडे वाले तेल टैंकर 'मैरीनेरा' को जब्त कर लिया। यह कार्रवाई अमेरिकी तट से करीब 4000 किलोमीटर दूर हुई। खास बात यह है कि टैंकर के पास रूस की एक परमाणु पनडुब्बी तैनात होने की खबरें थीं, जो इसे रूस की सुरक्षा प्रदान कर रही थी। इसके बावजूद अमेरिकी बलों ने बिना किसी प्रतिरोध के टैंकर पर कब्जा कर लिया और इसे अमेरिका की ओर ले जा रहे हैं।
यह टैंकर पहले 'बेला-1' के नाम से जाना जाता था और वेनेजुएला से प्रतिबंधित तेल ले जाने के आरोप में अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह 'शैडो फ्लीट' का हिस्सा था, जो रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों के लिए प्रतिबंधों से बचकर तेल परिवहन करता है। जब्ती अमेरिकी फेडरल कोर्ट के वारंट पर आधारित थी। टैंकर पर सवार 28 क्रू मेंबर्स में तीन भारतीय भी शामिल हैं, जिन्हें हिरासत में लिया गया है।
रूस ने इस कार्रवाई को 'समुद्री डकैती' करार देते हुए कड़ी निंदा की है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन है। कुछ रूसी सांसदों ने तो परमाणु हमले तक की धमकी दी है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर रूस ने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की।
यूरेशियन टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में रक्षा विशेषज्ञ सुमित अहलावत ने इस घटना को रूस की कमजोरी का प्रतीक बताया है। उनके अनुसार, यह साबित करता है कि अमेरिका जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी के सामने रूस एक 'कागजी शेर' मात्र है। अगर पुतिन इस गंभीर उकसावे को अनदेखा करते हैं, तो वे खुद को एक कमजोर और हिम्मतहीन नेता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। यह पुतिन की उस छवि को चोट पहुंचाता है, जिसे उन्होंने 25 वर्षों में बड़ी मेहनत से बनाया है।
पुतिन का सत्ता में 25 साल का सफर 1999 से शुरू हुआ, जब वे प्रधानमंत्री बने और फिर राष्ट्रपति। इस दौरान रूस ने आर्थिक संकट से उबरकर खुद को मजबूत किया, लेकिन यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं रूस की अंतरराष्ट्रीय छवि और पुतिन की घरेलू लोकप्रियता दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।
Edited By: Navin Rangiyal