Publish Date: Fri, 20 Feb 2026 (17:46 IST)
Updated Date: Fri, 20 Feb 2026 (17:56 IST)
अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों को पूरी तरह कुचलते हुए तालिबान ने एक बेहद विवादित और डरावना कानून लागू किया है। तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा द्वारा हस्ताक्षरित एक नए 60 पन्नों के दंड संहिता (Penal Code) में अब पुरुषों को अपनी पत्नियों और बच्चों को पीटने की खुली छूट दे दी गई है।
'हड्डी न टूटे तो पिटाई अपराध नहीं'
ब्रिटिश अखबार 'द टेलीग्राफ' द्वारा प्राप्त इस आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, घरेलू हिंसा को अब 'आपराधिक कृत्य' की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, एक पति अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक सजा दे सकता है, बशर्ते उस हिंसा से "हड्डी न टूटे या शरीर पर कोई खुला घाव (Open Wound)" न हो। तालिबान ने इसे 'ताज़ीर' (Tazir) यानी विवेकाधीन सजा की श्रेणी में रखा है।
गंभीर चोट पर भी मामूली सजा
हैरानी की बात यह है कि अगर पति की पिटाई से गंभीर चोट लगना साबित भी हो जाता है, तब भी कानून बेहद नरम है। सजा का प्रावधान: 'अत्यधिक बल' या 'गंभीर चोट' (जैसे हड्डी टूटना) साबित होने पर भी अधिकतम सजा केवल 15 दिन की जेल तय की गई है। साबित करने की चुनौती: सजा तभी मुमकिन है जब पीड़ित पत्नी अदालत में हिंसा को सफलतापूर्वक साबित कर सके, जो अफगानिस्तान की वर्तमान न्याय व्यवस्था में लगभग नामुमकिन माना जा रहा है।
मानवाधिकारों का होता दमन
तालिबान के इस 90 पन्नों के नए कोड ने घरेलू हिंसा को एक तरह से 'वैध' बना दिया है। महिला अधिकार संगठनों ने इसे वैश्विक स्तर पर महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। इस कानून के बाद अब घर के भीतर होने वाले जुल्मों के खिलाफ महिलाओं के पास कोई कानूनी सुरक्षा नहीं बची है। अगस्त 2021 में सत्ता संभालने के बाद से, तालिबान लगातार ऐसे कानून बना रहा है जो महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और अब बुनियादी सुरक्षा से भी वंचित कर रहे हैं। Edited by : Sudhir Sharma