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Bangladesh Politics : क्या Tarique Rahman का PM बनना भारत के लिए फायदेमंद? India-Bangladesh Relations में नई शुरुआत के संकेत

तारिक रहमान की ताजपोशी से बदलेगा खेल? क्या भारत-बांग्लादेश रिश्तों में आएगी नई गर्माहट या फिर बढ़ेगी दूरी!

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tarik rehman
बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय तक ‘डार्क प्रिंस’ कहे जाने वाले तारिक रहमान (Tarique Rahman) अब सत्ता के केंद्र में पहुंचते दिख रहे हैं। शुक्रवार को हुए चुनाव में उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार जीत दर्ज की। इसके साथ ही उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना प्रबल हो गई है।  भारत ने भी नतीजों की औपचारिक घोषणा से पहले ही तारिक रहमान को बधाई देकर यह संकेत दे दिया कि वह बांग्लादेश के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने को उत्सुक है। 
अब सवाल यह है कि क्या तारिक रहमान भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई शुरुआत करेंगे, या फिर अतीत की परछाइयां भविष्य पर असर डालेंगी? आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि ‘मैत्री एक्सप्रेस’ की रफ्तार तेज होगी या फिर सियासी मोड़ों पर अटक जाएगी।
2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया था।  तारिक रहमान का अतीत भी विवादों से घिरा रहा है। 2001-2006 के दौरान जब उनकी मां खालिदा जिया के नेतृत्व में BNP सत्ता में थी, तब भारत-बांग्लादेश संबंधों को सबसे खराब दौर में से एक माना गया।  उन पर 2004 के चिटगांव हथियार तस्करी मामले और असम के उग्रवादी संगठन उल्फा से कथित संबंधों के आरोप लगे।
 

भारत के लिए क्या मायने

भारत के नीति-निर्माताओं के बीच BNP को हमेशा जमाते इस्लामी (Jamaat-e-Islami) की तुलना में अधिक उदार और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देखा गया है। हालांकि, तारिक ऐसे समय में सत्ता संभालेंगे जब दोनों देशों के रिश्ते दो अलग-अलग धाराओं पर चल रहे हैं।
 
 एक ओर, 4,000 किमी लंबी सीमा, व्यापार, बिजली और कनेक्टिविटी के कारण भारत बांग्लादेश के लिए अनिवार्य साझेदार है। दूसरी तरफ छात्र आंदोलनों के बाद शेख हसीना के भारत आने और प्रत्यर्पण में देरी को लेकर बांग्लादेश में खासकर युवाओं के बीच भारत के प्रति संशय का माहौल है।
 

अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा बड़ा सवाल

पिछले दिनों बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमले हुए हैं। इसके लिए उन्होंने अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा का भरोसा दिलाया और कहा कि धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन राष्ट्र सबका है। 

पीएम मोदी ने दी बधाई, विदेश मंत्री पहुंचे थे बांग्लादेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान से फ़ोन पर बात की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान की 'निर्णायक जीत' पर शुक्रवार को उन्हें बधाई देते हुए कहा कि वह विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि रहमान की जीत ने उनके नेतृत्व में बांग्लादेश की जनता के भरोसे को दर्शाया है।
 
जब खालिदा जिया का निधन हुआ तो पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट की। खालिदा जिया के निधन पर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ढाका पहुंचे और तारिक से मिले थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग गए और शोक व्यक्त किया।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई

बांग्लादेश के आम चुनावों में शानदार जीत हासिल करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर मुकदमा चलाने के लिए उनके भारत से प्रत्यर्पण की अपनी मांग दोहराई है। बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि विदेश मंत्री पहले ही उनके प्रत्यर्पण के पक्ष में तर्क दे चुके हैं, और हम भी इसका समर्थन करते हैं।

बांग्लादेश फर्स्ट का नारा 

लंदन में 17 साल के निर्वासन के बाद वापसी करने वाले तारिक रहमान ने बांग्लादेश (Bangladesh First) का नारा दिया है, जो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका (America First) मॉडल से प्रेरित बताया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार भारत, चीन और पाकिस्तान से समान दूरी बनाए रखेगी। उन्होंने अपने भाषणों में यह भी कहा कि न दिल्ली, न पिंडी, सबसे पहले बांग्लादेश। Edited by : Sudhir Sharma

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