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मां ने छोड़ा साथ तो खिलौने में तलाशी ममता, जापान के नन्हे 'पंच-कुन' की भावुक कर देने वाली दास्तान

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Punch kun
कहते हैं कि मां की ममता का कोई विकल्प नहीं होता, लेकिन जब कुदरत बेरहम हो जाए, तो बेजुबान भी अपना सहारा खुद ढूंढ लेते हैं। इन दिनों जापान के एक नन्हे बंदर 'पंच-कुन' की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं, जो किसी भी पत्थर दिल इंसान को पिघला सकते हैं। लोग इन तस्‍वीरों को देखकर रो रहे हैं, तस्‍वीरों को शेयर कर रहे हैं, लेकिन दुखद है कि कोई भी पंचकुन का दर्द बांट नहीं सकता।

खबर और कुछ रिपोर्ट के मुताबिक जन्म के कुछ समय बाद ही पंच-कुन को उसकी मां ने ठुकरा दिया था। एक नन्हा जीव जिसे अपनी मां की गर्माहट की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वह अचानक बिल्कुल अकेला पड़ गया। चिड़ियाघर के रखवालों ने उसकी देखभाल तो की, लेकिन उसकी उदासी और दर्द दूर नहीं हो रहे थे। तभी उन्हें एक विचार आया और उन्होंने पंच-कुन के बाड़े में बंदर जैसा दिखने वाला एक नरम खिलौना रख दिया।

खिलौने को ही मान लिया अपनी मां : हैरानी की बात यह है कि इस नन्हे बंदर ने उस बेजान खिलौने को ही अपनी मां समझ लिया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पंच-कुन हर पल उस खिलौने से चिपका रहता है। वह उसी के सीने से लगकर सोता है। दूध पीते समय भी वह खिलौने का हाथ कसकर पकड़े रहता है। जब कोई उसे उस खिलौने से अलग करने की कोशिश करता है, तो वह उसे वैसे ही कसकर पकड़ लेता है जैसे कोई बच्चा अपनी मां का पल्लू पकड़ता है।

सोशल मीडिया पर उमड़ा प्यार : दुनियाभर के लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हैं। 'X' (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर यूजर्स लिख रहे हैं कि यह कहानी हमें सिखाती है कि प्यार और सुरक्षा का अहसास किसी भी रूप में मिल सकता है। एक जापानी यूजर ने लिखा, "पंच-कुन की आंखें बताती हैं कि वह इस खिलौने में रूह देख रहा है।"

क्‍या यह 'आर्टिफिशियल कंफर्ट' है : जापान के विशेषज्ञ इसे 'आर्टिफिशियल कंफर्ट' कहते हैं, लेकिन देखने वालों के लिए यह एक मासूम दिल की पुकार है जो बस थोड़ा सा सुकून और साथ चाहता है। यह कहानी याद दिलाती है कि कभी-कभी बेजान चीज़ें भी वह मरहम बन जाती हैं, जो दुनिया की कोई और दवा नहीं कर सकती।

लेकिन इस कहानी की सबसे बड़ी त्रासदी चिड़ियाघर के भीतर नहीं थी। वह हमारे भीतर थी। लाखों लोगों ने पंच-कुन का वीडियो देखा। शेयर किया। कमेंट किया। लेकिन बहुत कम लोगों ने उसे महसूस किया। उसका दर्द एक अनुभव नहीं बना, एक कंटेंट बन गया। उसकी असहायता ने सहानुभूति नहीं जगाई उसने एंगेजमेंट पैदा किया।

हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं, जहां पीड़ा को समझा नहीं जाता, उसे प्रसारित किया जाता है। जहां अकेलापन रोका नहीं जाता, उसे रिकॉर्ड किया जाता है। जहां भावनाएं जी नहीं जातीं, उन्हें स्क्रॉल किया जाता है। पंच-कुन फिर भी प्रयास करता रहा। अस्वीकृति के बाद भी उसने जुड़ने की कोशिश नहीं छोड़ी। उसने अपने भीतर की संवेदना को मरने नहीं दिया। उसने अपने छोटे से अस्तित्व में भी भावनात्मक साहस बनाए रखा और यही वह बिंदु है जहां वह एक बंदर नहीं, बल्कि एक मानवीय संवेदना बन गया है।

क्‍या हम इतना संवेदनशील हो पाएंगे : लगातार बढती तकनीक के बीच इंसान मशीन होता जा रहा है। उसके अंदर से मानवीय भावनाएं, संवेदनाएं, करूणा, दया, मदद और प्‍यार जैसे भाव लगातार खत्‍म हो रहे हैं। ऐसे में पंच कुन बंदर का यह वीडियो हमें बहुत बडा मैसेज दे रहा है। क्‍या हम इंसान पंच कुन से कुछ सीख पाएंगे।Edited By: Naveen R Rangiyal

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