Publish Date: Mon, 18 May 2026 (08:45 IST)
Updated Date: Mon, 18 May 2026 (09:11 IST)
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात के अल धफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के परिसर में रविवार को बड़ा हमला हुआ। हमले के बाद पावर प्लांट में आग लग गई। UAE प्रशासन की ओर से अभी तक हमले के पीछे किसी देश या संगठन का आधिकारिक नाम नहीं लिया गया है। भारत ने यूएई पर हुए अटैक की आलोचना की है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे कार्य अस्वीकार्य हैं और तनाव बढ़ाने का काम करते हैं। हम तत्काल संयम बरतने और संवाद और कूटनीति की ओर लौटने का आह्वान करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने हमले पर गंभीर चिंता जताते हुए बताया है कि UAE के बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट में हालात फिलहाल सामान्य हैं। IAEA ने कहा कि वह UAE अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर मदद देने के लिए तैयार है।
हमला से कितना नुकसान?
अबू धाबी के अधिकारियों ने बताया कि अल दफरा क्षेत्र स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट की सीमा के बाहर एक बिजली जनरेटर में लगी। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है और रेडियोलॉजिकल सुरक्षा स्तर पर भी कोई असर नहीं पड़ा है। आग का असर पावर प्लांट की सुरक्षा या उसकी ज़रूरी प्रणालियों की तैयारियों पर नहीं पड़ा है और सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
क्यों खास है बराकाह न्यूक्लियर प्लांट
बराकाह न्यूक्लियर पावर यूएई के उत्तर-पश्चिमी रेगिस्तान में सऊदी अरब और कतर की सीमा के पास अल दफरा क्षेत्र में स्थित है। इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस परमाणु संयंत्र का निर्माण अमीरात न्यूक्लियर एनर्जी कॉर्पोरेशन के एक समूह ने दक्षिण कोरियाई ऊर्जा कंपनी के साथ मिलकर किया था। बराकाह प्लांट के परमाणु रिएक्टर हर साल 40 टेरावॉट-घंटे बिजली पैदा करते हैं, जो यूएई की कुल बिजली जरूरतों का करीब 25 प्रतिशत है।
edited by : Nrapendra Gupta
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