UAE Presidents Al Nahyan visit to Pakistan: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 26 दिसंबर 2025 को पाकिस्तान की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा की। यह दौरा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण पर हुआ और इसे दोनों देशों के बीच गहरे भाईचारे का प्रतीक बताया जा रहा है। यूएई राष्ट्रपति का विमान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस पर उतरा, जहां उन्हें रेड कार्पेट स्वागत, 21 तोपों की सलामी और पाकिस्तानी वायुसेना के जेएफ-17 फाइटर जेट्स द्वारा एस्कॉर्ट मिला। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद एयरबेस पर उनका स्वागत किया।
यह स्वागत इसलिए भी खास है क्योंकि नूर खान एयरबेस मई 2025 में भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से पहलगाम आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों और कुछ सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। सैटेलाइट इमेजेस से पता चला था कि नूर खान बेस पर हैंगर, रनवे और कमांड सेंटर को काफी नुकसान पहुंचा था। हालांकि, पाकिस्तान ने जल्दी मरम्मत कर इसे फिर से उपयोग योग्य बना लिया और यूएई राष्ट्रपति की लैंडिंग को पाकिस्तान ने अपनी ताकत का संदेश बताया।
पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण : यूएई और पाकिस्तान के संबंध दशकों पुराने हैं। यूएई पाकिस्तान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और वहां लाखों पाकिस्तानी प्रवासी काम करते हैं, जो बड़ी मात्रा में रेमिटेंस भेजते हैं। 2025 में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरे में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा हुई। यूएई ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के वादे किए हैं, जो पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है।
पाकिस्तान ने इस दौरे को 'भाईचारे की मिसाल' बताया, जबकि यूएई ने इसे रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का अवसर कहा। दोनों देशों ने संयुक्त बिजनेस काउंसिल स्थापित करने जैसे समझौते किए।
भारत पर प्रभाव : यूएई भारत का भी करीबी साझेदार है। भारत-यूएई संबंध 2015 से तेजी से मजबूत हुए हैं, जिसमें व्यापार 100 अरब डॉलर से ज्यादा का लक्ष्य, सीईपीए समझौता और रक्षा सहयोग शामिल है। यूएई में 35 लाख से ज्यादा भारतीय प्रवासी हैं और दोनों देश आई2यू2 ग्रुप में साथ हैं।
हालांकि, यूएई की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी भारत के लिए चिंता का विषय है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूएई ने भारत-पाकिस्तान दोनों से संयम बरतने की अपील की थी, लेकिन पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक समर्थन जारी रखा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यूएई की तटस्थ नीति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छी है, लेकिन पाकिस्तान के साथ गहरे रक्षा और निवेश संबंध भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकते हैं। खासकर जब पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ रहा हो।
भारत ने हमेशा यूएई के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दी है और दोनों देश आतंकवाद विरोध में एकजुट हैं। फिर भी, यूएई का पाकिस्तान के क्षतिग्रस्त एयरबेस पर उच्चस्तरीय लैंडिंग करना पाकिस्तान के लिए मनोबल बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। यूएई राष्ट्रपति का यह दौरा दोनों देशों के लिए आर्थिक और रणनीतिक लाभ लेकर आया है। लेकिन दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह भारत के लिए एक संकेत है कि क्षेत्रीय शक्तियां संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। भारत को अपने मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का लाभ उठाते हुए क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala