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डोनाल्ड ट्रंप की 'रेड लाइन' मानने को तैयार नहीं ईरान, जेडी वेंस का बड़ा बयान

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Iran US War
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार को खुलासा किया कि ईरान, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तय की गई शर्तों को स्वीकार नहीं कर रहा है। यह बयान मंगलवार को जिनेवा में हुई परमाणु वार्ता के दूसरे दौर के बाद आया है। वेंस ने कहा कि  'कूटनीतिक समाधान के लिए ट्रंप ने जो 'रेड लाइन' तय की हैं, ईरान ने उन सभी पर सहमति नहीं दी है।'  उन्होंने संकेत दिया कि इसी वजह से अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
जिनेवा वार्ता के बाद वेंस ने कहा कि कुछ मामलों में बातचीत ठीक रही। ईरान वार्ता के लिए आया, जो एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन कई मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने बेहद स्पष्ट रूप से कुछ रेड लाइन तय की हैं और ईरानी सरकार उन्हें स्वीकार कर लागू करने के लिए तैयार नहीं है। 
 

ट्रंप लेंगे अंतिम फैसला

वेंस ने आगे कहा कि हम वार्ता को प्राथमिकता देते हैं और इस दिशा में प्रयास जारी रखेंगे। लेकिन कड़े कदम उठाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति के पास है। यदि बातचीत बेनतीजा रहती है तो आगे क्या करना है, इसका फैसला वही करेंगे। हमें उम्मीद है कि बातचीत से समाधान निकलेगा, लेकिन असफल होने की स्थिति में राष्ट्रपति निर्णय लेंगे।”
 

जिनेवा में तीन घंटे चली वार्ता

मंगलवार को अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में करीब तीन घंटे तक परमाणु वार्ता हुई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत को सकारात्मक बताया। वहीं अमेरिकी पक्ष ने भी तेहरान के साथ हुई अप्रत्यक्ष वार्ता को रचनात्मक करार दिया। हालांकि, वार्ता जारी रहने के बावजूद ट्रंप संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते रहे हैं।
 

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

अमेरिका, इज़राइल और कई पश्चिमी देशों ने पिछले कुछ वर्षों में बार-बार आरोप लगाया है कि ईरान परमाणु बम बनाने की दिशा में काम कर रहा है। ईरान ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
 
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई वर्षों से जारी है। बीच-बीच में वार्ता होती रही है, लेकिन पिछले वर्ष अमेरिकी हमलों के बाद बातचीत ठप हो गई थी। अब एक बार फिर वार्ता शुरू हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उम्मीद है कि कूटनीति सफल होगी और किसी बड़े संघर्ष या युद्ध की नौबत नहीं आएगी। Edited by : Sudhir Sharma

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