ईरान युद्ध की भारी कीमत : भारत के सालाना स्पेस बजट से भी ज्यादा अमेरिका का 1 दिन का खर्च, आंकड़े डराने वाले हैं
US-Iran War: हर दिन 7,500 करोड़ रुपये फूंक रहा है अमेरिका, दुनिया में गहराया तेल और गैस का बड़ा संकट
Publish Date: Mon, 09 Mar 2026 (18:48 IST)
Updated Date: Mon, 09 Mar 2026 (18:58 IST)
ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध में अमेरिका पानी की तरह पैसा बहा रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इस संघर्ष में हर दिन लगभग 891 मिलियन डॉलर (करीब 7,500 करोड़ रुपए) खर्च कर रहा है। वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक 'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' (CSIS) के विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। युद्ध के पहले हफ्ते में ही कुल खर्च 6 बिलियन डॉलर (50,000 करोड़ रुपए अधिक) तक पहुंच गया है, और एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि यह आंकड़ा आने वाले समय में कई खरबों तक जा सकता है।
अमेरिका का एक दिन का युद्ध खर्च (891 मिलियन डॉलर) भारत के साल भर के कुल स्पेस बजट (ISRO) से भी ज्यादा है।
सिर्फ 10 दिनों का युद्ध खर्च पाकिस्तान के पूरे सालाना रक्षा बजट के बराबर है।
नेपाल की पूरी जीडीपी (GDP) के बराबर पैसा अमेरिका सिर्फ दो महीने से कम समय में युद्ध में उड़ा देगा।
पेंटागन ने कांग्रेस से मांगी और फंडिंग
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को सूचित किया है कि पहले हफ्ते का खर्च 6 अरब डॉलर रहा है। इसमें से 4 अरब डॉलर केवल मिसाइलों और हथियारों पर खर्च हुए हैं, जिनका उपयोग ईरानी मिसाइलों को हवा में मार गिराने के लिए किया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस भारी भरकम खर्च के बावजूद अपने रुख पर कायम हैं, जबकि विपक्ष ने इस 'महंगे युद्ध' पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
ऑपरेशन का खर्च: प्रतिदिन का गणित
CSIS की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध का दैनिक खर्च कुछ इस प्रकार है:
हवाई अभियान: 30 मिलियन डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपये) प्रतिदिन।
नौसेना ऑपरेशन: 15 मिलियन डॉलर (करीब 125 करोड़ रुपये) प्रतिदिन।
जमीनी कार्रवाई: 1.6 मिलियन डॉलर प्रतिदिन।
क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 50,000 से अधिक हो गई है, जिसमें दो विमान वाहक पोत (Aircraft Carriers) और दर्जनों युद्धपोत शामिल हैं।
ईरान की 'ऑपरेशन मैडमैन' रणनीति
दूसरी ओर, तेहरान ने लंबी लड़ाई की तैयारी कर रखी है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरान 'ऑपरेशन मैडमैन' रणनीति पर काम कर रहा है। उसका लक्ष्य युद्ध को इतना लंबा खींचना है कि अमेरिका और इजरायल पर असहनीय आर्थिक बोझ पड़ जाए। ईरान सस्ते 'शाहेद ड्रोन' का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि अमेरिका उन्हें गिराने के लिए करोड़ों डॉलर की महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग कर रहा है।
तेल और गैस की सप्लाई ठप
इस युद्ध का असर केवल सीमा तक सीमित नहीं है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का 25 प्रतिशत हिस्सा ले जाने वाले 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।
कतर: दुनिया की 20 प्रतिशत एलएनजी (LNG) सप्लाई करने वाले कतर ने 'फोर्स मेज्योर' घोषित कर निर्यात रोक दिया है।
सऊदी अरब: ड्रोन हमलों के बाद दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्रों में से एक 'रस तनुरा' रिफाइनरी बंद हो गई है। Edited by : Sudhir Sharma
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