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क्या उलझ गया US, डोनाल्ड ट्रंप को क्यों महंगी पड़ रही है लड़ाई, क्या ईरान को लेकर अमेरिका-इजराइल के रास्ते हुए अलग

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Iran war news
मिडिल ईस्ट के गैस ठिकानों पर ईरान के ताबड़तोड़ हमले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बैकफुट पर आ गए हैं। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि अब ईरान के किसी भी गैस या तेल ठिकाने पर इजराइल हमला नहीं करेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि वे ईरान में जमीनी सेना नहीं भेजेंगे। तो क्या ईरान पर हमले को लेकर अब अमेरिकी राष्ट्रपति बैकफुट पर आ गए हैं। ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका और इजराइल के रास्ते अलग-अलग हो गए हैं। इजराइल ने हाइफा तेल रिफाइनरी पर हमला किया है। हमले में बहुत नुकसान की खबर है। 
US के डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने कहा कि यहां का मीडिया, सारा तो नहीं, लेकिन ज्यादातर चाहता है कि आप इस लड़ाई के सिर्फ 19 दिनों में ही सोचें कि हम किसी तरह कभी न खत्म होने वाली खाई या हमेशा के लिए जंग या दलदल की ओर बढ़ रहे हैं। सच इससे ज़्यादा दूर हो ही नहीं सकता। इसे मुझसे सुनिए, जो इराक और अफ़गानिस्तान में लड़ने वाले लाखों लोगों में से एक है, जिसने बुश, ओबामा और बाइडेन जैसे पिछले बेवकूफ नेताओं को अमेरिका की साख बर्बाद करते देखा है। यह वह जंग नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप बेहतर जानते हैं। एपिक फ्यूरी अलग है। 

क्या ईरान और इजराइल के रास्ते हुए अलग 

ईरान के खिलाफ जारी जंग को लेकर अमेरिका और इजराइल की रणनीति में अंतर सामने आया है। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने कहा कि दोनों देशों के लक्ष्य अलग-अलग हैं। गबार्ड के मुताबिक, इजराइल का फोकस ईरान की टॉप लीडरशिप को खत्म करने पर है और उसने कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका सीधे तौर पर इजराइल के ऑपरेशनल फैसलों में शामिल नहीं है, बल्कि लगातार इंटेलिजेंस इनपुट दे रहा है। 
 
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का लक्ष्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, उसके उत्पादन ढांचे और नौसेना, खासकर IRGC नेवी को कमजोर करना है। गबार्ड ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि इजराइल ईरान के साथ किसी समझौते का समर्थन करेगा या नहीं।

युद्ध पर खर्चा बना डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुसीबत 

इस युद्ध का असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। पेट्रोल की कीमतें 30 साल के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं और $2.9 प्रति गैलन से बढ़कर $3.8 हो गई हैं। आर्थिक वृद्धि घटकर 0.7% रह गई है, बेरोजगारी बढ़ी है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हजारों नौकरियां गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से ज्यादा की मंजूरी मांगी है जबकि अब तक करीब 30 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। यह 200 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त अनुरोध अमेरिका के पहले से ही ऊंचे, लगभग 900 अरब डॉलर से अधिक वार्षिक रक्षा बजट के ऊपर है।
पेंटागन ने सांसदों को बताया कि अमेरिका ने ईरान पर अपने सैन्य हमले के पहले ही सप्ताह में 11.3 अरब डॉलर यानी 1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। यह बताता है कि युद्ध में पैसा कितनी तेजी से खर्च हो रहा है। पेंटागन के जारी किए इस आंकड़े में केवल प्रारंभिक हमलों में इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद की लागत शामिल है। इसका असर पूरी दुनिया पर भी पड़ रहा है।

अमेरिका नहीं भेजेगा अपनी सेना 

डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इस संघर्ष पर वॉशिंगटन का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हवाई हमले जारी रहने के बावजूद अमेरिका जमीनी सेना  तैनात करने से बचेगा। वॉशिंगटन में जापानी राजनेता साने ताकाइची के साथ एक बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान में 'सेना नहीं भेज रहा है।'  उनके इस बयान को जमीनी आक्रमण से बचने के एक जानबूझकर किए गए प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। 

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से तेल और गैस फील्ड पर हमला करने के बारे में बात की थी, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हां, मैंने की थी। मैंने उनसे कहा, ऐसा मत करो। वह ऐसा नहीं करेंगे। हमने बात नहीं की। हम इंडिपेंडेंट हैं। हमारी अच्छी बनती है। यह कोऑर्डिनेटेड है। लेकिन कभी-कभी, वे कुछ कर देते हैं। और अगर मुझे यह पसंद नहीं आता, तो हम अब ऐसा नहीं कर रहे हैं। 

होर्मुज स्ट्रेच टैक्स वसूलेगा ईरान

ईरान ने इजराइल के हमलों के बाद सख्त चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर आगे और हमले हुए, तो ईरान करारा जवाब देगा। ईरान होर्मुज स्ट्रेच से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने पर विचार कर रहा है। एक ईरानी सांसद ने गुरुवार को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी। होर्मुज से दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नैचुरल गैस गुजरती है। Edited by : Sudhir Sharma

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