Publish Date: Fri, 13 Mar 2026 (17:20 IST)
Updated Date: Fri, 13 Mar 2026 (17:49 IST)
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 14वां दिन है। इजराइल-अमेरिका और ईरान की जंग के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट और सप्लाई चेन में उथल-पुथल मची हुई है। ईरान के साथ युद्ध किस दिशा में जा रहा है और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है? खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस युद्ध को लेकर कन्फ्यूजन में हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में कहा था कि ये हमले बड़े सैन्य अभियान हैं जो 4 से 5 हफ्तों में खत्म हो जाएंगे। लेकिन तब से अब तक, वे कभी युद्ध 'जीतने' का दावा करते हैं, तो कभी कहते हैं कि अभी 'काम पूरा करना' बाकी है। कभी लगता है कि ऑपरेशन 'जल्द' खत्म होगा, तो कभी सेना को 'और आगे' जाने की जरूरत महसूस होती है।
अचानक हमले ने अमेरिकियों को चौंकाया
28 फरवरी की सुबह बिना किसी ठोस समय सीमा के ईरान पर हमला करने और संघर्ष में उतरने के ट्रंप प्रशासन के फैसले ने कई अमेरिकियों को चौंका दिया। यह उस राष्ट्रपति की ओर से आया है जिसने 'अमेरिका फर्स्ट' के एजेंडे पर चुनाव लड़ा और हमेशा विदेशी हस्तक्षेपों की आलोचना की। हालांकि ट्रंप ने अपने 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन में ईरान का जिक्र किया था- यह दावा करते हुए कि अमेरिकी सेना ने जून में 'ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को नष्ट' कर दिया था, लेकिन उन्होंने इस युद्ध के लिए न तो कांग्रेस से अनुमति ली और न ही जनता को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार किया।
अब तक युद्ध पर कितना खर्च
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के अधिकारियों ने इस सप्ताह एक संसदीय ब्रीफिंग के दौरान अनुमान लगाया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध के पहले छह दिनों में संयुक्त राज्य अमेरिका को कम से कम 11.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 95,000 करोड़ रुपए) का खर्च आया है। सीनेटरों के लिए आयोजित एक बंद कमरे की ब्रीफिंग में शेयर किए गए इस आंकड़े में युद्ध की पूरी लागत शामिल नहीं थी। यह जानकारी उन सांसदों को दी गई है जो लगातार इस संघर्ष के बारे में अधिक विवरण और स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
ट्रंप ने लगाए थे आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरान पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले चार महीनों से मध्य पूर्वी देशों की ओर हजारों मिसाइलें तैनात कर रखी थीं। इसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण करना था।
क्या ट्रंप के कदम से अमेरिकी हैं खुश
अब ट्रंप प्रशासन एक ऐसी जनता के सामने युद्ध को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है जो पहले से ही पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की मार झेल रही है। पिछले हफ्ते जारी एनबीसी न्यूज के एक पोल के मुताबिक 54 प्रतिशत मतदाता ट्रंप के इस कदम से असहमत हैं और उनका मानना है कि अमेरिका को सैन्य कार्रवाई नहीं करनी चाहिए थी।
आखिर क्या है डोनाल्ड ट्रंप का लक्ष्य
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इन दावों को 'फर्जी नैरेटिव' करार दिया है कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के उद्देश्यों को लेकर कोई भ्रम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना, उसकी नौसेना को खत्म करना और यह सुनिश्चित करना है कि उसके 'आतंकवादी प्रॉक्सी' अब इस क्षेत्र को अस्थिर न कर सकें।
ईरान पर हमले के 3 तर्क
1.47 साल पुराने संघर्ष का अंत
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के मुताबिक पिछले 47 वर्षों से, तेहरान के विस्तारवादी और कट्टरपंथी शासन ने अमेरिका के खिलाफ एक क्रूर और एकतरफा युद्ध छेड़ रखा है, जिसे खत्म करना जरूरी था।
2. बातचीत से ईरान का इनकार
हेगसेथ ने यह भी दावा किया कि पिछले जून में 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' ने उनके परमाणु कार्यक्रम को मलबे में बदल दिया था। हमने उन्हें शांति का रास्ता दिया, लेकिन उन्होंने अहंकार में इसे ठुकरा दिया। ट्रंप प्रशासन ने कूटनीति की हर संभव कोशिश की, लेकिन तेहरान बातचीत नहीं कर रहा था, बल्कि अपना मिसाइल भंडार भरने के लिए समय काट रहा था।
3. इजराइल के हमले का डर
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक अलग तर्क दिया। उन्होंने कहा कि खतरा एकदम करीब था। हमें पता था कि अगर इजरायल ईरान पर हमला करता है तो ईरान तुरंत हम पर (अमेरिका पर) हमला करेगा। रक्षा विभाग का मानना था कि अगर हम उनके हमले का इंतजार करते, तो हमारे और अधिक सैनिक मारे जाते। इसलिए हमने बचाव के तौर पर पहले ही हमला कर दिया। Edited by : Sudhir Sharma
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