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अमेरिका हुआ लाचार! सबसे महंगे वॉरशिप में शौचालय चौक, क्या 'टॉयलेट संकट' से टलेगा ईरान पर हमला?

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Gerald R Ford Toilet
वाशिंगटन, 24 फरवरी 2026 (एजेंसी): अमेरिका की नौसेना का सबसे उन्नत और महंगा न्यूक्लियर पावर वाला एयरक्राफ्ट कैरियर  यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड इन दिनों एक अजीब समस्या से जूझ रहा है। जहाज पर शौचालयों की पाइपलाइन और वैक्यूम  सिस्टम खराब हो चुके हैं, जिससे 4,600 से अधिक नाविकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह कैरियर पिछले 11 महीनों से समुद्र में तैनात है और अब गल्फ ऑफ ओमान की ओर बढ़ रहा था, लेकिन इन तकनीकी खामियों के कारण ईरान  पर संभावित हमले की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

ईरान मिशन पर 'ब्रेक' लगने का खतरा?
कैरियर की तैनाती की शुरुआत वेनेजुएला के पास मदुरो संकट के दौरान हुई थी, जहां इसे तेल टैंकरों को जब्त करने और  राष्ट्रपति निकोलस मदुरो पर दबाव बनाने के लिए भेजा गया था। उसके बाद, इसे मध्य पूर्व की ओर रवाना किया गया, जहां  ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना की मुख्य भूमिका निभानी थी। लेकिन अब, जहाज पर शौचालयों की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। नाविकों को शौचालय इस्तेमाल करने के लिए 45 मिनट तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है, और कई  टॉयलेट पूरी तरह बंद हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, वैक्यूम-बेस्ड सीवेज सिस्टम में रोजाना मरम्मत की जरूरत पड़ रही है, लेकिन समुद्र में रहते हुए पूर्ण  मरम्मत संभव नहीं है।

एक 'फ्लश' की कीमत क्या समझेंगे ट्रंप
हैरानी की बात यह है कि इस जहाज को बनाने में 13 अरब डॉलर (करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये) खर्च हुए थे। इसका सीवेज सिस्टम पानी बचाने के लिए 'वैक्यूम तकनीक' का इस्तेमाल करता है, जो 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार से सक्शन करता है। लेकिन यही हाई-टेक सिस्टम अब इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है। 2025 में ही इस खराबी को ठीक करने के लिए 32 बार बाहरी मदद लेनी पड़ी, लेकिन समुद्र के बीचों-बीच पूरी मरम्मत मुमकिन नहीं है।

नाविकों की शिकायत है कि लंबी तैनाती के कारण परिवार से दूर रहना पहले ही मुश्किल था, ऊपर से ये दैनिक समस्याएं उन्हें  मानसिक रूप से तोड़ रही हैं। कुछ नाविक तो नौसेना छोड़ने की सोच रहे हैं।

सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक
एक्स (X) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर इस मुद्दे को लेकर मीम्स की बाढ़ आ गई है। एक वायरल वीडियो में तंज कसा गया है कि "दुनिया की सबसे आधुनिक सेना को एक साधारण प्लंबिंग की समस्या ने घुटनों पर ला दिया है।"

अमेरिकी नौसेना का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द ही जहाज को डॉकयार्ड (मरम्मत के लिए बंदरगाह) भेजा जाएगा। हालांकि, सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस तकनीकी खामी के बीच ईरान पर दबाव बनाए रख पाएगा या उसे अपनी रणनीति बदलनी होगी?

अमेरिकी नौसेना का दावा है कि इन समस्याओं से जहाज की ऑपरेशनल तैयारियां प्रभावित नहीं हुई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का  कहना है कि लंबी तैनाती और रखरखाव की कमी से मोराल पर असर पड़ रहा है।

Fact Check: USS जेराल्ड आर. फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है, लेकिन इसकी प्लंबिंग समस्या 2017 से ही सिरदर्द बनी हुई है। ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने कैरियर की तैनाती को दो बार बढ़ाया है। लेकिन अगर समस्या बनी रही, तो ईरान पर हमले की योजनाओं को स्थगित करना पड़ सकता है। दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना को एक साधारण पाइपलाइन समस्या ने रोक दिया है, जो तकनीकी प्रगति और व्यावहारिक चुनौतियों के बीच का विरोधाभास दर्शाता है। नौसेना अधिकारियों ने कहा है कि जहाज को जल्द ही डॉकयार्ड में लाकर मरम्मत की जाएगी, लेकिन फिलहाल नाविकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है
Edited By: Naveen R Rangiyal

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