अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक नई पहल की शुरुआत की है, जिसे 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम दिया गया है। यह बोर्ड मुख्य रूप से गाजा में शांति स्थापित करने, पुनर्निर्माण और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया है, जो वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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'बोर्ड ऑफ पीस' क्या है?
'बोर्ड ऑफ पीस' एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए तैयार किया है। यह बोर्ड एक संक्रमणकालीन शासी निकाय के रूप में कार्य करेगा, जो गाजा में स्थिरता, पुनर्निर्माण और शांति की निगरानी करेगा। यह ट्रंप के 20-सूत्रीय व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसे सितंबर 2025 में घोषित किया गया था और बाद में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 द्वारा समर्थित किया गया।
बोर्ड के मुख्य कार्य
गाजा का पुनर्निर्माण: युद्ध से तबाह हुए बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करना।
शांति की निगरानी: गाजा में निशस्त्रीकरण (Disarmament) और स्थिरता सुनिश्चित करना।
अंतरिम शासन: गाजा में एक ऐसी शासन व्यवस्था बनाना जो किसी आतंकी समूह से प्रभावित न हो।
इस बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव 2803 का समर्थन प्राप्त है।
दिलचस्प बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप इस बोर्ड के 'आजीवन अध्यक्ष' (Lifetime Chairman) के रूप में काम करेंगे।
पीएम मोदी को निमंत्रण क्यों मिला?
ट्रंप ने 16 जनवरी 2026 को पीएम मोदी को एक औपचारिक पत्र भेजा, जिसमें उन्हें इस बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया। इस पत्र को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर साझा किया।
भारत की बढ़ती वैश्विक प्रभावशाली भूमिका, विशेष रूप से मध्य पूर्व में शांति प्रयासों में, भी एक कारण है। पाकिस्तान को भी इसी बोर्ड में निमंत्रण मिला है, जो भारत का पड़ोसी और प्रतिद्वंद्वी है।
16 जनवरी 2026 को ट्रंप ने पीएम मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस बोर्ड का हिस्सा बनने का अनुरोध किया। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं:
संतुलित छवि: भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से है जिसके इजरायल और अरब देशों (फिलिस्तीन समेत) दोनों के साथ बेहतरीन संबंध हैं। भारत की मौजूदगी इस बोर्ड को 'निष्पक्षता' प्रदान करेगी।
वैश्विक नेतृत्व (Global Leadership): 'ग्लोबल साउथ' की आवाज के रूप में भारत का कद बढ़ा है। ट्रंप जानते हैं कि मोदी जैसे प्रभावशाली नेता के बिना मध्य पूर्व में कोई भी शांति पहल अधूरी है।
आर्थिक शक्ति: गाजा के पुनर्निर्माण के लिए भारी निवेश की जरूरत है। भारत की तकनीकी और निर्माण क्षमता इसमें बड़ी भूमिका निभा सकती है।
पड़ोसी संतुलन: पाकिस्तान को भी इस बोर्ड में आमंत्रित किया गया है। दक्षिण एशिया की राजनीति को देखते हुए भारत का इसमें शामिल होना रणनीतिक रूप से जरूरी हो जाता है।
अन्य देशों जैसे इटली (प्रधानमंत्री मेलोनी) और हंगरी को भी आमंत्रित किया गया है, जिसमें हंगरी ने स्वीकार कर लिया है। ट्रंप का मानना है कि मोदी जैसे नेता इस पहल को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।
गाजा संघर्ष 2023 से चला आ रहा है, और ट्रंप की योजना इसे समाप्त करने का प्रयास है। बोर्ड तीन जुड़े हुए निकायों के माध्यम से काम करेगा: निशस्त्रीकरण, पुनर्निर्माण और शासन।
भारत के लिए क्या है इसके मायने?
यदि भारत इस बोर्ड में शामिल होता है, तो:
-मध्य पूर्व की कूटनीति में भारत का दखल बढ़ेगा।
-भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ेगा, जो हालिया 'टैरिफ वॉर' के तनाव को कम कर सकता है।
-वैश्विक स्तर पर भारत एक 'पीसमेकर' (Peace-maker) के रूप में उभरेगा।
हालांकि, कई देशों ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है, क्योंकि ट्रंप की आजीवन अध्यक्षता और वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठ रहे हैं।
भारत सरकार अभी इस निमंत्रण पर विचार कर रही है। यदि भारत शामिल होता है, तो यह मध्य पूर्व शांति में उसकी भूमिका को मजबूत करेगा। यह पहल वैश्विक शांति के लिए एक नया अध्याय हो सकती है, लेकिन इसके सफल होने पर कई सवाल बाकी हैं।