वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (Middle East) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद दुनिया का सबसे घातक परमाणु संचालित विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln (CVN-72) अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ अरब सागर में पहुंच चुका है। अमेरिका की इस 'किलिंग मशीन' की मौजूदगी ने ईरान को बैकफुट पर धकेलने के बजाय उसे और आक्रामक बना दिया है।
USS Abraham Lincoln: समुद्र का वो 'दैत्य' जिससे दुनिया डरती है
USS अब्राहम लिंकन को "समुद्र का चलता-फिरता एयरबेस" कहा जाता है। इसकी ताकत का अंदाजा इन पॉइंट्स से लगाया जा सकता है:
F-35C और F/A-18 सुपर हॉर्नेट: इस पर दर्जनों घातक लड़ाकू विमान तैनात हैं जो पलक झपकते ही ईरान के कई शहरों को निशाना बना सकते हैं।
मिसाइल डिफेंस: यह कैरियर टोमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस विध्वंसक (Destroyers) जहाजों के बेड़े से घिरा रहता है।
स्टील्थ रणनीति: ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस जहाज ने अपना AIS (Automatic Identification System) बंद कर दिया है, जिससे यह दुश्मन के रडार और सैटेलाइट की पकड़ से बाहर होकर 'खामोश दानव' की तरह शिकार कर सकता है।
ईरान का पलटवार: 'शहीद बगेरी' ड्रोन कैरियर की एंट्री :
अमेरिका को जवाब देने के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने अपने नए 'शहीद बगेरी' (Shahid Bagheri) ड्रोन कैरियर को तैनात करने के संकेत दिए हैं।
यह एक विशाल जहाज है जिसे लंबी दूरी के आत्मघाती (Kamikaze) ड्रोन और टोही ड्रोन लॉन्च करने के लिए डिजाइन किया गया है।
ईरान का दावा है कि उनके ड्रोन झुंड (Swarm) अमेरिकी बेड़े के मिसाइल डिफेंस को चकमा देने में सक्षम हैं।
तनाव की असली वजह क्या है?
मिडिल ईस्ट में इस सैन्य जमावड़े के पीछे ईरान में जारी आंतरिक अस्थिरता और अमेरिकी प्रतिबंधों को माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई जारी रखी, तो अमेरिका सैन्य विकल्प चुन सकता है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह अमेरिकी बेस और इजरायल को सीधे निशाना बनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि "USS अब्राहम लिंकन का AIS बंद करना इस बात का संकेत है कि अमेरिका अपनी लोकेशन गुप्त रखकर 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी कार्रवाई की योजना बना सकता है।"
Edited By: Navin Rangiyal