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क्या डोनाल्ड ट्रंप होंगे 'Lame Duck' प्रेसिडेंट? जानिए US Midterms Elections के 5 नियम जो ट्रंप का भविष्य तय करेंगे

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US President Donald Trump
US Midterms Elections 2026: अमेरिका में जब 2018 के मिडटर्म इलेक्शन हुए थे, तब वॉशिंगटन के गलियारों में सन्नाटा था। उस वक्त भी डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति थे और रिपब्लिकन्स ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का कंट्रोल खो दिया था। रातों-रात व्हाइट हाउस की 'अजेय' दिखने वाली ताकत आधी रह गई थी। हालांकि सीनेट में रिपब्लिकंस का बहुमत बरकरार रहा था। सीनेट पर नियंत्रण रहने से राष्ट्रपति ट्रंप को न्यायिक नियुक्तियों और अन्य महत्वपूर्ण पदों को भरने में आसानी हुई। हालांकि खास बात यह रही कि 8 साल बाद डेमोक्रेट्स ने सदन पर नियंत्रण पाया और नैन्सी पेलोसी (Nancy Pelosi) फिर से 'स्पीकर ऑफ द हाउस' बनीं।

इस बार महंगाई, टैरिफ के साथ ही ईरान से जंग का दांव ट्रंप को उलटा पड़ता दिख रहा है। 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से पहले उनकी पार्टी की हालत काफी खराब बताई जा रही है। 2026 में, इतिहास खुद को दोहराने की कगार पर खड़ा है। क्या ट्रंप फिर से एक 'Lame Duck'  (शक्तिहीन) प्रेसिडेंट बनने वाले हैं? चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

क्या होता है ये 'Lame Duck' प्रेसिडेंट?

राजनीति की दुनिया में 'Lame Duck' उस नेता को कहते हैं जिसका उत्तराधिकारी (successor) चुना जा चुका हो, या जिसके पास अब विधायी (legislative) ताकत न बची हो।
 
अमेरिका में, अगर राष्ट्रपति की पार्टी मिडटर्म चुनावों में संसद (Congress) का बहुमत खो देती है, तो राष्ट्रपति के हाथ बंध जाते हैं। वह चाहकर भी नए कानून पास नहीं करा पाता। 2026 के मिडटर्म चुनाव इसीलिए अहम हैं क्योंकि ये तय करेंगे कि ट्रंप अगले दो साल तक 'बॉस' रहेंगे या सिर्फ एक 'हस्ताक्षर करने वाली मशीन'।
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2026 मिडटर्म इलेक्शन : नियम जो खेल बिगाड़ सकते हैं

अमेरिकी संविधान के Article 2 और 20th Amendment के तहत चुनाव की प्रक्रिया चलती है। यहां कुछ मुख्य नियम हैं, जिन्हें आपको जानना चाहिए:
  • सभी 435 सीटों पर वोटिंग : हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी सीटों पर हर दो साल में चुनाव होते हैं।
  • सीनेट की 35 सीटें : इस साल सीनेट की 35 सीटों पर भी मुकाबला है। अगर यहां रिपब्लिकन्स हारते हैं, तो ट्रंप का 'One Big Beautiful Bill' और बजट प्रस्ताव ठंडे बस्ते में जा सकते हैं।
  • ऐतिहासिक ट्रेंड : इतिहास गवाह है कि सत्ताधारी पार्टी (Ruling Party) अक्सर मिडटर्म में सीटें हारती है। क्या ट्रंप  इस 'मिडटर्म कर्स' (Midterm Curse) को तोड़ पाएंगे?

ट्रंप के लिए क्यों बढ़ी है 'टेंशन'?

हालिया रिपोर्ट्स और Morgan Stanley जैसे संस्थानों के विश्लेषण बताते हैं कि 2026 में  'Affordability' (महंगाई) सबसे बड़ा मुद्दा है।
  • टैरिफ का असर : ट्रंप ने जो टैरिफ बढ़ाए हैं, उनका बोझ आम अमेरिकी नागरिकों पर पड़ रहा है।
  • फेडरल रिजर्व से टकराव : जेरोम पॉवेल (Fed Chair) का कार्यकाल मई 2026 में खत्म हो रहा है। ट्रंप की कोशिश है कि वहां अपना मनपसंद व्यक्ति बिठाएं, लेकिन अगर मिडटर्म में हार हुई, तो सीनेट उनके नाम को ब्लॉक कर सकती है।
अगर आप स्टॉक मार्केट या ग्लोबल इकोनॉमी पर नजर रखते हैं, तो 2026 के इन चुनावों को मिस न करें। यदि रिपब्लिकन पार्टी बहुमत खोती है, तो अमेरिकी डॉलर और आईटी स्टॉक्स में बड़ी वोलैटिलिटी (Volatility) देखने को मिल सकती है।

क्या ट्रंप का एजेंडा रुक जाएगा?

अगर ट्रंप 'Lame Duck' बनते हैं, तो उनके कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक लग सकता है:
  • Department of Education का खात्मा : ट्रंप इस विभाग को खत्म करना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें भारी बहुमत चाहिए।
  • Tax Cuts : 2026 के बाद टैक्स कटौती का फायदा कम हो सकता है अगर नई कांग्रेस ने इसे सपोर्ट नहीं किया।
2026 के मिडटर्म चुनाव सिर्फ अमेरिका के नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक 'Stress Test' हैं। क्या ट्रंप अपनी एकता की अपील (Unity Call) से वोटर्स को लुभा पाएंगे या फिर 2027 की शुरुआत एक कमजोर व्हाइट हाउस के साथ होगी?
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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