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अमेरिका ने खोई वैश्विक लीडरशिप! जर्मनी के चांसलर का म्यूनिख में धमाका, क्या फ्रांस के साथ मिलकर बनेगा 'यूरोपीय परमाणु कवच'?

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friedrich merz
म्यूनिख: म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (MSC) 2026 के मंच से वैश्विक राजनीति में एक नए युग की आहट सुनाई दे रही है। जर्मनी के नवनिर्वाचित चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) ने दुनिया के सामने यह स्वीकार कर लिया है कि अमेरिका का वैश्विक नेतृत्व का दावा अब खत्म हो चुका है। मर्ज़ ने चेतावनी दी कि यूरोप को अब अपनी सुरक्षा के लिए खुद 'परमाणु निवारक' (Nuclear Deterrent) पर विचार करना होगा।

 "अमेरिका अब अकेला शक्तिशाली नहीं रहा"
चांसलर मर्ज़ ने सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और वहां मौजूद अधिकारियों को सीधे संबोधित करते हुए कहा: "महासत्ता के इस दौर में अमेरिका भी इतना शक्तिशाली नहीं रहा कि वह अकेले (Go it alone) चल सके। अमेरिकी नेतृत्व का दावा अब चुनौती का सामना कर रहा है और संभवतः वह खो चुका है।"

यह बयान उन बढ़ती दरारों को उजागर करता है जो ट्रम्प प्रशासन के 'अमेरिका फर्स्ट' नीतियों और हाल ही में ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर सहयोगी देशों पर बनाए गए दबाव के कारण पैदा हुई हैं।

'यूरोपीय न्यूक्लियर शील्ड' पर गुप्त चर्चा
भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह था जहाँ मर्ज़ ने यूरोपीय परमाणु निवारक की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि जर्मनी अब अमेरिकी 'परमाणु छत्र' (Nuclear Umbrella) पर निर्भरता कम करने के लिए फ्रांस के साथ सीधी बातचीत कर रहा है।

फ्रांस की भूमिका: फ्रांस यूरोपीय संघ का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश है। मर्ज़ ने पुष्टि की कि उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ मिलकर एक साझा 'यूरोपीय न्यूक्लियर शील्ड' बनाने की योजना पर चर्चा शुरू कर दी है।

नाटो 3.0: मर्ज़ ने स्पष्ट किया कि वे नाटो (NATO) को खत्म नहीं करना चाहते, बल्कि इसके भीतर एक "मजबूत और आत्मनिर्भर यूरोपीय स्तंभ" बनाना चाहते हैं, जो अमेरिका की अनुपस्थिति में भी काम कर सके।


नियम-आधारित व्यवस्था का अंत?
चांसलर ने अत्यंत गंभीर लहजे में कहा कि दुनिया उस अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को खो चुकी है जो अधिकारों और नियमों पर टिकी थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यूरोप मजबूत नहीं हुआ, तो दुनिया फिर से "जिसकी लाठी उसकी भैंस" (Might makes right) वाले काले युग में लौट जाएगी।

मुख्य विवाद के बिंदु:
सांस्कृतिक और आर्थिक खाई: मर्ज़ ने कहा कि अमेरिका का 'कल्चर वॉर' हमारा नहीं है। यूरोप 'फ्री ट्रेड' में यकीन रखता है, जबकि अमेरिका अब 'टैरिफ' (Tariffs) और संरक्षणवाद की ओर मुड़ गया है।

चीन और रूस: उन्होंने चेतावनी दी कि चीन जल्द ही अमेरिकी सैन्य ताकत को चुनौती देगा और यूक्रेन युद्ध तब तक नहीं थमेगा जब तक रूस पूरी तरह थक नहीं जाता।

आत्मनिर्भर यूरोप की ओर कदम
फ्रेडरिक मर्ज़ का यह भाषण एक 'रणनीतिक मोड़' है। जर्मनी, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से हमेशा अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर रहा, अब अपनी परमाणु सुरक्षा खुद डिजाइन करने की बात कर रहा है। यह न केवल नाटो के भविष्य को बदलेगा बल्कि आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति संतुलन को भी नया रूप देगा।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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