Publish Date: Wed, 08 Apr 2026 (18:29 IST)
Updated Date: Wed, 08 Apr 2026 (18:39 IST)
ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच हुए सीजफायर ने जहां एक बड़े युद्ध को टाल दिया, वहीं पाकिस्तान के अंदर एक नई बहस को जन्म दिया। क्या देश में सेना का प्रभाव अब और बढ़ने वाला है? और क्या हालात सैन्य शासन (मार्शल लॉ) की ओर बढ़ सकते हैं?
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका बेहद अहम रही है। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इसे इस्लामाबाद समझौता नाम दिया है जबकि इस मध्यस्थता का सबसे ज्यादा श्रेय पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर को दिया जा रहा है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान में सैन्य शासन लगने वाला है, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि 'मुनीर फैक्टर' आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीति और सत्ता संतुलन को जरूर प्रभावित करेगा।
'मुनीर फैक्टर' क्यों बना चर्चा का केंद्र?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक मुनीर के अमेरिका और ईरान दोनों के रक्षा प्रतिष्ठानों से मजबूत संपर्क हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान, दोनों ने इस सीजफायर के लिए असीम मुनीर की भूमिका की सराहना की है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान और उसकी सेना का आभार जताया।पाकिस्तान ने खुद को एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया है यही कारण है कि पाकिस्तान की सेना एक बार फिर सत्ता के केंद्र में नजर आ रही है।
पाकिस्तान पर भरोसा क्यों?
ईरान और अमेरिका दोनों ने पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में स्वीकार किया। इसकी कई वजहें मानी जा रही हैं।
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ईरान और पाकिस्तान के बीच भौगोलिक और कूटनीतिक नजदीकी
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पाकिस्तान का इज़रायल से कोई औपचारिक संबंध न होना
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अमेरिका के साथ हाल के वर्षों में बेहतर होते रिश्ते
इसी संतुलन ने पाकिस्तान को इस बड़े वैश्विक संकट में अहम भूमिका निभाने का मौका दिया।
क्या बढ़ रहा है सेना का राजनीतिक प्रभाव?
पाकिस्तान में पहले भी कई बार सेना ने सीधे सत्ता संभाली है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेना प्रमुख को इतनी बड़ी कूटनीतिक सफलता मिलती है, तो देश के अंदर उनकी ताकत और प्रभाव बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक सरकार की तुलना में सेना की छवि ज्यादा मजबूत बन रही है। विदेश नीति और सुरक्षा मामलों में सेना की भूमिका निर्णायक होती जा रही है। इससे सिविल सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल मार्शल लॉ जैसे हालात के सीधे संकेत नहीं हैं, लेकिन सत्ता संतुलन सेना की ओर झुकता जरूर दिख रहा है। Edited by : Sudhir Sharma
वेबदुनिया न्यूज डेस्क
Publish Date: Wed, 08 Apr 2026 (18:29 IST)
Updated Date: Wed, 08 Apr 2026 (18:39 IST)