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जख्मी खामनेई मोजतबा की अमेरिका-ईरान सीजफायर में क्या रही भूमिका, कैसे पर्दे के पीछे चली हाईलेवल कूटनीति, पढ़िए पूरी कहानी

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Mojtaba Khamenei iran new supreme leader
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव मंगलवार तक एक बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा था। ईरान संभावित अमेरिकी हमले के लिए तैयार था, वहीं खाड़ी देशों में ईरानी जवाबी कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। वॉशिंगटन भी लंबे संघर्ष की तैयारी में था, लेकिन मंगलवार शाम, डेडलाइन से कुछ मिनट पहले हालात अचानक बदल गए और दोनों पक्षों ने दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान कर दिया। यह पिछले पांच हफ्तों से चल रहे संघर्ष का सबसे चौंकाने वाला मोड़ रहा।
यह पहली बार था जब मोजतबा खामेनेई ने इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अपने वार्ताकारों को समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए। पहले ऐसी खबरें थीं कि वे गंभीर रूप से घायल हैं और इलाज करा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने नोट्स के जरिए बातचीत का नेतृत्व किया और अंततः सीजफायर प्रस्ताव को मंजूरी दी।
 
 
पर्दे के पीछे पाकिस्तान के मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच ड्राफ्ट साझा कर रहे थे जबकि चीन का दबाव और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई के निर्देश इस समझौते में अहम साबित हुए। रिपोर्ट के अनुसार यह समझौता बेहद 'अराजक' कूटनीतिक दिन के दौरान तैयार हुआ। अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ ने शुरुआत में ईरान के प्रस्ताव को 'बेकार' बताया था, लेकिन पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों की मध्यस्थता से कई ड्राफ्ट के बाद सहमति बनी।
 
सीजफायर के तहत ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोलने और अमेरिका, इज़रायल व अन्य मध्य पूर्वी देशों पर हमले रोकने पर सहमति जताई। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान पर हमले बढ़ाने की धमकियों को फिलहाल वापस लेने की बात कही। हालांकि इज़रायल ने साफ किया कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ उसकी कार्रवाई जारी रहेगी।

चीन भी रहा लगातार सक्रिय 

ईरान का करीबी सहयोगी चीन इस पूरे घटनाक्रम में पर्दे के पीछे सक्रिय रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने ईरान पर दबाव डाला कि वह लचीलापन दिखाए और तनाव कम करे।  चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने संघर्ष शुरू होने के बाद 26 बार अलग-अलग देशों से बातचीत की जबकि बीजिंग ने शटल डिप्लोमेसी के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की। चीन ने लगातार सीजफायर और कूटनीतिक समाधान की वकालत की और अंततः समझौते को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। Edited by : Sudhir Sharma

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