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अमेरिका-ईरान सीजफायर पर संकट, लेबनान में इजराइल की जंग से 2 हफ्ते भी नहीं टिकेगा समझौता?

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Benjamin Netanyahu on Israel Iran War
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर एक महीने से अधिक समय तक हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद बुधवार को दोनों पक्षों ने दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया। हालांकि, इस समझौते की नाजुक स्थिति ईरान द्वारा साझा की गई शर्तों से ही साफ नजर आ रही है। ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में हमले रोकने की बात कही है, लेकिन इज़रायल ने लेबनान में अपने सैन्य ऑपरेशन बंद करने से साफ इनकार कर दिया है।
 
यही स्थिति आने वाले दिनों में फिर से हमलों और जवाबी हमलों की चिंगारी बन सकती है, वह भी इस दो हफ्ते की अवधि के भीतर। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सीजफायर पहले से ही कमजोर माना जा रहा है, तो क्या यह तब भी टिक पाएगा जब इजराइल लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा?
यह सीजफायर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ द्वारा घोषित किया गया, जो दो सप्ताह तक लागू रहने वाला है। तेहरान और वॉशिंगटन के प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचकर स्थायी शांति समझौते पर बातचीत करने वाले हैं। हालांकि, यह विराम मध्य पूर्व में हफ्तों से जारी हमलों और खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान के बीच राहत जरूर देता है, लेकिन एक पक्ष अब भी लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखने पर अड़ा हुआ है-और वह है इजराइल।
 
सीजफायर की घोषणा करते हुए शरीफ ने इसे “हर जगह तत्काल युद्धविराम, जिसमें लेबनान भी शामिल है” बताया। लेकिन इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि “दो हफ्ते का सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। यह बयान न सिर्फ पाकिस्तान द्वारा बताए गए समझौते के विपरीत है, बल्कि ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव के एक अहम बिंदु- क्षेत्र में उसके सहयोगी संगठनों (जैसे हिज़्बुल्लाह) के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने-के भी खिलाफ जाता है।
सीजफायर की घोषणा के साथ ही इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। उसी दौरान खबरें आईं कि यूएई, इज़रायल, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए। बुधवार को अबू धाबी में एक गैस प्रोसेसिंग सुविधा ईरानी हमले के बाद आग की चपेट में आ गई। इससे पहले मंगलवार को इज़रायली सेना ने ईरान के शिराज स्थित एक पेट्रोकेमिकल साइट पर हमला करने का दावा किया था।
 

लेबनान में इज़रायल क्या कर रहा है?

अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी स्थायी शांति समझौते की सफलता इस सीजफायर के टिके रहने पर निर्भर करती है, जिसमें हर जगह संघर्ष रोकने की बात कही गई है- लेबनान भी इसमें शामिल है। लेकिन समस्या यह है कि इज़रायल ने साफ कर दिया है कि वह लेबनान में अपने ऑपरेशन जारी रखेगा। 2 मार्च को इज़रायली सेना ने लेबनान में जमीनी अभियान शुरू किया, जिसका मकसद लितानी नदी तक एक “बफर ज़ोन” बनाना बताया गया है, ताकि ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के हमलों को रोका जा सके।
 
यह सैन्य कार्रवाई तब शुरू हुई जब हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल पर हमले किए। संगठन का कहना था कि यह जवाबी कार्रवाई थी- इज़रायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या और नवंबर 2024 के सीजफायर के उल्लंघन के खिलाफ। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, 2 मार्च के बाद से इज़रायली हमलों में 1,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 12 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। Edited by : Sudhir Sharma

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