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ट्रंप को 'अपनों' ने ही दिया झटका! क्या थम जाएगा US-ईरान युद्ध? जानें पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

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Iran US War 2026
America Iran war ceasefire resolution: मिडिल ईस्ट से आ रही इस वक्त की सबसे बड़ी खबर ने दुनिया को हैरान कर दिया है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब हमेशा के लिए खत्म होने जा रहा है? क्या दुनिया को इस महासंकट से राहत मिलने वाली है? यह सवाल इसलिए उठ खड़ा हुआ है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी अपनी ही जमीन पर, और वो भी 'अपनों' ने ही एक बहुत बड़ा झटका दे दिया है।
 
अमेरिकी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव' में ईरान युद्ध को रोकने का प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हो गया है। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए पाला बदल लिया और विपक्ष के सुर में सुर मिलाकर इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया। ALSO READ: मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के हालात: अमेरिका का केशम द्वीप पर हमला, ईरान ने कुवैत में अमेरिकी एयरबेस पर दागीं मिसाइलें

215 बनाम 208 की वो कांटे की टक्कर!

निचले सदन में 'वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन' (युद्ध रोकने के प्रस्ताव) को लेकर जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला। राष्ट्रपति ट्रंप के विरोध में 215 वोट पड़े, जबकि इसके पक्ष में सिर्फ 208 वोट ही आ पाए। इस प्रस्ताव के पास होते ही सदन ने साफ निर्देश दे दिया है कि ईरान के साथ जारी युद्ध से अमेरिकी बलों को तुरंत वापस बुलाया जाए।
 
इस ऐतिहासिक कदम के बाद एक बात तो शीशे की तरह साफ हो गई है—अब राष्ट्रपति ट्रंप अपनी मर्जी से किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं कर सकेंगे। भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए उन्हें संसद और दोनों सदनों की हरी झंडी लेनी ही पड़ेगी। ALSO READ: क्या ईरान के बाद ट्रंप ओमान पर भी हमला कर सकते हैं? ऐसा हुआ तो क्या होगा...
 

ट्रंप के पास अब भी ब्रह्मास्त्र!

भले ही निचले सदन ने यह प्रस्ताव पास कर दिया हो, लेकिन ट्रंप का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने के लिए अभी दो बड़े पड़ाव पार करने बाकी हैं। दरअसल, इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए संसद के ऊपरी सदन यानी 'सीनेट' से पास कराना अनिवार्य होगा। अगर यह प्रस्ताव सीनेट से भी पास हो जाता है, तो यह राष्ट्रपति ट्रंप की टेबल पर पहुंचेगा। ट्रंप के पास इसे 'वीटो' (खारिज) करने का पूरा अधिकार है। अगर ट्रंप ने वीटो लगा दिया, तो संसद को उस वीटो को बेअसर करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो फिलहाल विपक्ष के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है।

हम जंग जीत चुके हैं, ट्रंप का दावा

हालांकि नवंबर में होने वाले मिड इलेक्शन को देखते हुए ट्रंप स्वयं भी अब युद्ध के मूड में दिखाई नहीं दे रहे हैं। वे जल्द ही इससे पीछा छुड़ाना चाहते हैं। एक तरफ जहां संसद में ट्रंप की घेराबंदी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति ट्रंप और उनके विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दावा कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ इसी हफ्ते के आखिर में एक बड़ा शांति समझौता साइन होने जा रहा है।
 
विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी को साफ शब्दों में कह दिया है कि ईरान के साथ युद्ध अब समाप्त हो चुका है और अमेरिका ने इस जंग में फतह हासिल कर ली है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उनके सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने ईरान की सरकार और उसकी सेना की कमर इस कदर तोड़ दी है कि अब ईरान दोबारा युद्ध करने की स्थिति में ही नहीं बचा है। इसलिए, अमेरिका अब आगे से ईरान पर कोई नया हमला नहीं करेगा।
 
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाकई इस हफ्ते के अंत में शांति समझौते पर मुहर लगती है, या फिर अमेरिकी संसद और व्हाइट हाउस के बीच की यह जंग कोई नया मोड़ लेती है! हालांकि लेबनान पर इजराइली हमलों के चलते युद्धविराम खटाई में पड़ता दिख रहा है। लेबनान पर इजराइल के हालिया और भीषण हवाई हमलों के बाद शांति वार्ता लगभग पटरी से उतर चुकी है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 

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