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Strait of Hormuz पर संकट बरकरार, अमेरिका ने यूरोप पर बनाया दबाव, ट्रम्प ने NATO को दी चेतावनी

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US-Iran Talks
अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम ने कूटनीति के लिए एक छोटा सा रास्ता तो खोला है, लेकिन तनाव अभी कम नहीं हुआ है। अभी वार्ता में अधर में पड़ी है। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल समर्थन के वादे पर्याप्त नहीं होंगे। ब्रिटेन के नेतृत्व में 40 से अधिक देशों के गठबंधन (जिसमें जापान, कनाडा और यूरोपीय देश शामिल हैं) ने इस मार्ग को फिर से खोलने में मदद करने की बात कही है, जहां से दुनिया का लगभग पाँचवां हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। इस संकट ने अमेरिका और नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच मतभेदों को भी उजागर कर दिया है।
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ट्रम्प ने नाटो प्रमुख मार्क रुटे से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तीखा हमला करते हुए लिखा कि जब हमें जरूरत थी तब नाटो वहां नहीं था, और अगर हमें फिर से जरूरत पड़ी तो वे वहां नहीं होंगे। ट्रम्प की यह टिप्पणी सहयोगियों द्वारा सीमित समर्थन दिए जाने की हताशा को दर्शाती है। उन्होंने यहाँ तक संकेत दिया है कि यदि समर्थन नहीं बढ़ा, तो अमेरिका इस गठबंधन से पीछे हट सकता है।
 
वॉशिंगटन अब अपने यूरोपीय सहयोगियों पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने के लिए तेजी से कदम उठाने का दबाव बना रहा है। दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग के बाधित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर भारी दबाव है।
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हालांकि जमीन पर हालात अब भी अस्थिर हैं। 14 दिनों के युद्धविराम की घोषणा के बावजूद संघर्ष पूरी तरह नहीं थमा है। ईरान ने लेबनान में इजराइली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताया है। हॉर्मुज का रास्ता फिलहाल बंद है और यातायात सामान्य होने के कोई संकेत नहीं हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ ने कहा है कि लेबनान और 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' इस 10-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव का अभिन्न अंग हैं।

इस्लामाबाद में निर्णायक वार्ता

इस बीच, कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 11 अप्रैल को ईरान के साथ सीधी बातचीत के लिए इस्लामाबाद में एक अमेरिकी दल का नेतृत्व करेंगे। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य एक स्थायी युद्धविराम स्थापित करना है। अब सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या यह शांति बनी रहती है और सहयोगी देश कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं।

नेतन्याहू ने लेबनान से सीधी बात को दी मंजूरी

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उन्होंने लेबनान के साथ जल्द सीधे बातचीत शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह बातचीत दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए अहम मानी जा रही है। नेतन्याहू ने बताया कि यह फैसला उन्होंने लेबनान की मांग के बाद लिया है। इस बातचीत में हिजबुल्लाह को हथियार छोड़ने और दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने लेबनान के प्रधानमंत्री की उस मांग का स्वागत किया। इसमें बेरूत को हथियारों से मुक्त करने की बात कही गई है। इस मामले पर अभी तक लेबनान की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। Edited by : Sudhir Sharma

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