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देश के 26 राज्यों में है फायर सेफ्टी एक्‍ट, क्‍यों मप्र में लागू नहीं हो रहा, 7 साल पहले बना ड्राफ्ट कहां अटका है?

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Indore Fire Tragedy
इंदौर के बृजेश्वरी एनेक्स में आग में झुलसने से हुई 8 मौतों के बाद फायर ब्रिगेड पर सवाल उठ रहे हैं। आग में झुलसकर जान गवां देने वाले मनोज पुगलिया के बेटे सौरभ पुगलिया ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से कहा था कि फायर ब्रिगेड एक से डेढ़ घंटा लेट आई। समय रहते आ जाती तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। टैंकरों में पानी नहीं होने की भी बात सामने आ रही है।

मुख्‍यमंत्री यादव ने भले की यह बेहतर इंतजाम करने का आश्‍वासन दिया है। लेकिन इंदौर में जो लॉ एंड ऑर्डर से लेकर आम लोगों की सुरक्षा के लिए जो सिस्‍टम काम कर रहा है, वो अंदर से पूरी तरह से ध्‍वस्‍त हो चुका है। ऐसे में मध्‍यप्रदेश में फायर सेफ्टी एक्‍ट को लेकर एक बार फिर से चर्चा हो रही है। जिसके आने से फायर ब्रिगेड का ढांचा दुरुस्त हो सकता है, लेकिन शायद सिस्‍टम में बैठे लोग ही प्रदेश और इंदौर का भला नहीं चाहते हैं। क्‍योंकि देश के 26 राज्‍यों में फायर सेफ्टी एक्‍ट लागू होकर काम कर रहा है। लेकिन मध्‍यप्रदेश में पिछले 7 साल से ये अधर में लटका हुआ है।
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क्‍या कहते हैं जिम्‍मेदार : इस बारे में जब वेबदुनिया ने फायर सर्विस का जिम्‍मा संभाल रहे अधिकारयों से चर्चा की तो उनका कहना था कि ये शासन स्‍तर पर अटका हुआ है। वहीं से कुछ हो सकता है। फिलहाल इसका स्‍टेटस क्‍या है, इसके लिए शासन से ही चर्चा करना होगी। अपर आयुक्त, नगर निगम इंदौर आशीष कुमार पाठक ने बताया कि फायर एक्‍ट प्रस्‍तावित है, उसका क्‍या स्‍टेटस है वो तो शासन स्‍तर का ही काम है, वही बता पाएंगे। हम इस बारे में कुछ नहीं बता सकते हैं।

7 साल से कहां अटका है एक्‍ट : बता दें कि मध्‍यप्रदेश में पिछले 7 साल से फायर एक्ट लागू नहीं हो सका है, जबकि केंद्र सरकार 2019 में ही एक्ट का एक मॉडल ड्राफ्ट बनाकर सभी राज्यों को भेज चुकी है। इसके बाद मप्र को छोड़कर देश के करीब 26 राज्य इसे लागू कर दिया गया है। जिससे इन राज्‍यों में फायर सर्विस बेहतर काम कर रही है।
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साल 2019: केंद्र ने सभी राज्यों को भेजा फायर एक्ट का मॉडल ड्राफ्ट केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में एकरूपता लाने के लिए फायर एक्ट का एक मॉडल ड्राफ्ट भेजा। 16 सितंबर 2019 को केंद्र सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी ने इस संबंध में एक पत्र भेजा, जिसे नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव ने नगरीय प्रशासन संचालनालय को भेज दिया। इसके बाद डायरेक्ट्रेट ने केंद्र के मॉडल ड्राफ्ट के आधार पर प्रस्तावित फायर एक्ट का प्रस्ताव पेश किया। एक प्रेजेंटेशन के बाद इसमें संशोधन के निर्देश दिए गए।

क्‍या है वजह, क्‍यों नहीं आ रहा एक्‍ट : दरअसल, केंद्र ने जो मॉडल एक्ट का मसौदा दिया है उसमें एक नया डायरेक्ट्रेट (संचालनालय) बनाने का प्रावधान है। इसके बनने के बाद नगरीय आवास एवं विकास विभाग की अहमियत कम हो जाएगी। दूसरा फायर सर्विस नगरपालिका और नगर निगम के अधीन नहीं होंगी। बड़े-बड़े राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों के लिए फायर एनओसी लेना पड़ेगी।

फायर एक्‍ट को लेकर कब कब क्‍या क्‍या हुआ?
साल 2020: कांग्रेस के तत्कालीन विभागीय मंत्री ने दी एक्ट को मंजूरी
10 फरवरी 2020 को संशोधित प्रस्ताव नगरीय प्रशासन विभाग के अपर आयुक्त को भेजा गया।
24 फरवरी 2020 को तत्कालीन आयुक्त पी नरहरी ने इसे अनुमोदन के लिए तत्कालीन प्रमुख सचिव नीतीश व्यास को भेजा। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन मंत्री जयवर्धन सिंह से मंजूरी मिलने के बाद फायर एक्ट को विधि विभाग भेजा गया। बाद में तत्कालीन पीएस नीतीश व्यास ने यह कहते हुए प्रस्ताव विधि विभाग से वापस ले लिया कि "मप्र भू-विकास नियम 2012" में पहले से ही फायर एक्ट से संबंधित प्रावधान हैं। अब फायर एक्ट लागू करने की जरूरत नहीं है।

फायर एक्ट 2023 के प्रावधान : क्‍या फायदा होगा अगर फायर एक्‍ट लागू हुआ तो? बता दें कि अगर फायर सेफ्टी एक्‍ट लागू होता है तो प्रदेश में अग्‍निशमन सेवाओं को लेकर कई तरह के फायदे होंगे। अगर किसी के पास फायर सेफ्टी नहीं तो 10 हजार तक का जुर्माना लग सकता है। अब 9 मीटर ऊंचाई वाले भवनों को भी फायर एनओसी लेनी होगी। अब तक 15 मीटर ऊंचाई वाले भवनों के लिए ही यह जरूरी है। एजुकेशन संस्थान, संस्थागत, सभा, व्यवसायिक- व्यापारिक, औद्योगिक गोदाम के लिए 500 मीटर से अधिक के क्षेत्र में फायर एनओसी अनिवार्य रहेगी।
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फायर NOC अनिवार्य : सार्वजनिक आयोजन के लिए भी फायर एनओसी अनिवार्य होगी। इसके लिए पंडाल लगाने वाले को एक घोषणा पत्र देना होगा, जिसमें आग से बचने के इंतजाम करने की जानकारी होगी। यदि जांच में जानकारी गलत पाई जाती है तो उसे सील करने का अधिकार होगा। इसके लिए 10 हजार रुपए का जुर्माना और 3 महीने कारावास की सजा होगी।

यूटिलिटी सर्टिफिकेट लेना होगा : ड्राफ्ट के मुताबिक, भवन निर्माण के दौरान फायर सेफ्टी सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। भवनों में ऑटोमैटिक स्प्रिंकल सिस्टम, फायर अलार्म और फायर सेफ्टी उपकरण लगाने होंगे। यदि ऐसा नहीं होगा तो निदेशक यूटिलिटी सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा। यह एक साल के लिए जारी किया जाएगा।

कारखानों और मल्‍टी स्‍टोरी इमारतों में सेफ्टी अधिकारी : सभी कारखानों और बडी इमारतों में सेफ्टी अधिकारी होगा। अफसर के पास फायर डिप्लोमा या फायर इंजीनियरिंग की डिग्री होना जरूरी होगा। ये फायर स्टेशन के प्रभारी को समय-समय पर रिपोर्ट भेजेगा। यह पद खाली नही रखा जा सकेगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो फायर स्टेशन प्रभारी को कार्यवाही करने का अधिकार होगा।

निरीक्षण में रुकावट नहीं होगी : फायर स्टेशन प्रभारी 3 घंटे की सूचना पर सुबह से शाम होने तक किसी भी भवन या प्रतिष्ठान में फायर उपकरणों की जांच कर सकेगा। इसके लिए शासन या प्रशासन से किसी अनुमति की जरूरत नहीं होगी। भवन मालिक ऐसे निरीक्षण में रुकावट पैदा नहीं कर सकेंगे।

नए फायर स्टेशन बनेंगे, भर्ती होगी, ट्रेनिंग होगी : शहरों में फायर स्टेशन बनाए जाएंगे। हर स्टेशन के लिए एक फायर अधिकारी की नियुक्ति होगी, जो इसका प्रभारी होगा। अग्निशमन सेवा का नया कैडर बनेगा। प्रदेश स्तर का फायर डायरेक्टोरेट बनेगा, जिसमें पुलिस और नगर निगम- पालिका के कर्मचारी मर्ज हो जाएंगे। नई भर्ती हो सकेगी। कर्मचारियों की ट्रेनिंग होगी। हर निकाय में फायर सेफ्टी अधिकारी नियुक्त होंगे।

अभी ये हाल है इंदौर फायर ब्रिगेड के : फायर सेफ्टी एक्‍ट लागू नहीं होने के कारण अभी इंदौर के 40 लाख जनसंख्‍या वाले शहर में महज 5 फायर स्‍टेशन ही हैं। वहीं, 2016 के बाद फायर विभाग को कोई वाहन नहीं मिला है। अभी 20, 22 और 24 साल पुराने वाहन और उपकरण हैं। इनमें से ज्‍यादातर वाहनों को आरटीओ ने कंडम घोषित कर दिया है। 2010 के बाद विभाग में कोई भर्ती नहीं हुई है।

ये थी इंदौर की दर्दनाक घटना : बता दें कि इंदौर नगर निगम के अधीन आने वाले फायर ब्रिगेड सर्विस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में बृजेश्‍वरी एनेक्‍स में आग लगने के बाद एक ही परिवार और उनके रिश्‍तेदारों समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इसके बाद पीडित परिवार के लोगों ने फायर ब्रिगेड के देरी से पहुंचने के आरोप लगाए है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल

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